बिलासपुर। रेंज साइबर थाना बिलासपुर पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए 59 लाख 87 हजार 994 रुपये की ऑनलाइन वित्तीय धोखाधड़ी के मामले में चार आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। पकड़े गए आरोपियों में मास्टरमाइंड ललित कुमार भी शामिल है, जिसने एनआईआईटी दिल्ली से सॉफ्टवेयर इंजीनियरिंग की पढ़ाई की थी।
यह मामला थाना सिविल लाइन की प्रार्थिया अल्पना जैन की शिकायत से जुड़ा है। आरोपियों ने उन्हें डिमेट अकाउंट और शेयर कारोबार में मोटा मुनाफा दिलाने का झांसा दिया और अलग-अलग तारीखों में विभिन्न बैंक खातों में लगभग 60 लाख रुपये जमा करा लिए। बाद में पता चला कि पूरा निवेश फर्जी था और आरोपी नकली वेबसाइट और एप बनाकर लोगों को ठग रहे थे।
शिकायत पर अपराध क्रमांक 569/2025 दर्ज किया गया और जांच रेंज साइबर थाना को सौंपी गई। तकनीकी विश्लेषण, कॉल डिटेल और बैंक स्टेटमेंट की जांच में आरोपियों का पता महू, जिला इंदौर (मध्यप्रदेश) में चला। इसके बाद पुलिस की विशेष टीम ने वहां दबिश दी और तीन दिन तक निगरानी रखने के बाद आरोपियों को धर दबोचा।
गिरफ्तार आरोपी हैं –
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- ललित कुमार (32 वर्ष), निवासी धारनाका महू, जिला इंदौर – एनआईआईटी दिल्ली से पढ़ा सॉफ्टवेयर इंजीनियर और गिरोह का मुख्य सरगना।
- बबलू उर्फ कमलजीत सिंह चौहान (38 वर्ष), निवासी अयोध्यापुरी कॉलोनी, महू।
- अर्पित साल्वे (30 वर्ष), निवासी गिरनार सिटी फेस–1, गुजरखेड़ा, महू।
- रोहित निषाद (25 वर्ष), निवासी शिवनगर कॉलोनी, महू।
पुलिस ने आरोपियों से 4 मोबाइल, 8 एटीएम कार्ड, 2 पैन कार्ड, पासबुक, चेकबुक और ठगी में प्रयुक्त दस्तावेज जब्त किए हैं। आरोपियों ने पूछताछ में कबूला कि वे गणेशम सिक्योरिटी नाम की फर्जी एजेंसी बनाकर लोगों को सोने और शेयर कारोबार में निवेश का झांसा देते थे। निवेशकों को नकली लाभांश दिखाकर वे लगातार उनसे और रकम वसूलते थे। ठगी की रकम निकालने के लिए बैंक खातों का इस्तेमाल किया जाता था, जिन्हें वे कमीशन पर अन्य लोगों से हासिल करते थे।
पुलिस ने चारों आरोपियों को ट्रांजिट रिमांड पर बिलासपुर लाकर न्यायिक अभिरक्षा में भेज दिया है।
यह कार्रवाई पुलिस महानिरीक्षक डॉ. संजीव शुक्ला और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक रजनेश सिंह के मार्गदर्शन में की गई। इसमें एएसपी राजेन्द्र जायसवाल, एएसपी अनुज कुमार, सीएसपी निमितेश सिंह और रेंज साइबर थाना प्रभारी निरीक्षक राजेश मिश्रा सहित पूरी टीम का योगदान रहा।













