रायपुर। केके श्रीवास्तव, जो खुद को तांत्रिक बताता है और पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल का करीबी माना जाता है, पिछले 12 दिनों से पुलिस रिमांड में था। सोमवार को तेलीबांधा पुलिस ने उसे कोर्ट में पेश किया, लेकिन दोबारा रिमांड की मांग नहीं की गई। कोर्ट ने उसे सीधे जेल भेज दिया। इस केस की अगली सुनवाई 21 जुलाई को होगी।
पुलिस पूछताछ में केके श्रीवास्तव ने क्या राज उगले हैं, इसका खुलासा नहीं हुआ है। हालांकि सूत्रों की मानें तो कुछ और बड़े नामों की गिरफ्तारी की तैयारी की जा रही है। चर्चा है कि इस मामले में कुछ राजनीतिक चेहरे भी फंस सकते हैं।
मामला 15 करोड़ की ठगी से जुड़ा है। आरोप है कि श्रीवास्तव ने स्मार्ट सिटी और नवा रायपुर के 500 करोड़ के ठेके का झांसा देकर दिल्ली के कारोबारी अशोक रावत से पैसे लिए थे। लेकिन काम न मिलने पर जब कारोबारी ने पैसे मांगे तो श्रीवास्तव ने तीन-तीन करोड़ के तीन चेक दिए, जो बाद में बाउंस हो गए।
इतना ही नहीं, पुलिस को जांच में यह भी पता चला है कि केके श्रीवास्तव ने गरीबों के नाम पर खुले खातों के जरिए करीब 300 करोड़ रुपए का लेनदेन किया है। ये पैसे कथित रूप से कर्ज के नाम पर आए थे। उसने भोपाल में हुलिया बदलकर छुपने की कोशिश की, लेकिन 20 जून की रात पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया।
श्रीवास्तव के बेटे कंचन श्रीवास्तव पर भी केस दर्ज है। ठगी के बाद जब कारोबारी ने दबाव बनाया, तो बाप-बेटे ने 3.40 करोड़ रुपये लौटाए, लेकिन बाकी रकम देने से मना कर दिया। जब कारोबारी ने पुलिस में जाने की धमकी दी, तो उन्हें नक्सलियों और रसूखदारों से जान-पहचान होने की धमकी देकर डराने की कोशिश की गई।
इस पूरे मामले की FIR तेलीबांधा थाने में रावत एसोसिएट के एडमिन मैनेजर अजय कुमार ने दर्ज कराई थी। इसके बाद ईडी ने भी मनी लॉन्ड्रिंग के आरोप में केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
रायपुर पुलिस को यह भी जानकारी मिली है कि राजधानी से जुड़े 41 मोबाइल नंबरों का इस्तेमाल कर देशभर में लोगों को कॉल कर ठगी की जा रही थी। इन नंबरों के जरिए 18 लाख से ज्यादा की ठगी हो चुकी है। पुलिस ने इन नंबरों के खिलाफ केस दर्ज कर लिया है और यह जांच कर रही है कि क्या ये सिम असली मालिक की जानकारी में लिए गए थे या किसी और के नाम पर बेचे गए थे।













