किश्तवाड़। जम्मू-कश्मीर के किश्तवाड़ जिले में गुरुवार को एक भीषण बादल फटने की घटना ने भारी तबाही मचाई है। यह हादसा मचैल माता यात्रा मार्ग पर स्थित चोशिटी (जिसे चासोटी, चशोटी या चिशोटी के नाम से भी जाना जाता है) गांव में हुआ, जहां अचानक आई बाढ़ ने दर्जनों लोगों की जान ले ली और सैकड़ों को प्रभावित किया। अधिकारियों के अनुसार, यह घटना दोपहर करीब 11:30 बजे से 1 बजे के बीच हुई, जब भारी बारिश ने फ्लैश फ्लड को जन्म दिया। इस प्राकृतिक आपदा ने न केवल स्थानीय निवासियों बल्कि मचैल माता यात्रा पर आए श्रद्धालुओं को भी अपनी चपेट में लिया, जहां एक लंगर टेंट पूरी तरह बह गया।
मचैल माता मंदिर की यात्रा का प्वाइंट
किश्तवाड़ जिला, जो जम्मू-कश्मीर के पहाड़ी इलाकों में स्थित है, मचैल माता मंदिर के लिए प्रसिद्ध है। चोशिटी गांव 9,500 फीट की ऊंचाई पर बसा है और यह यात्रा का आखिरी मोटरेबल पॉइंट है, जहां से मंदिर तक 8.5 किलोमीटर की पैदल यात्रा शुरू होती है। गुरुवार को मॉनसून सीजन के दौरान भारी बारिश हुई, जिसे भारतीय मौसम विभाग ने क्लाउड बर्स्ट के रूप में वर्णित किया है। एक घंटे में 100 मिलीमीटर से अधिक बारिश दर्ज की गई, जिससे पहाड़ों से तेज बहाव वाली बाढ़ आई और कीचड़ स्लाइड्स भी संभावित रूप से हुए। इस बाढ़ ने गांव के एक हिस्से को बहा दिया, जिसमें एक कम्युनिटी किचन (लंगर) और एक सुरक्षा पोस्ट शामिल थे। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, बाढ़ इतनी तेज थी कि लोग चीखते हुए बहते नजर आए, और टीवी फुटेज में श्रद्धालु डर से रोते हुए दिखे। यह घटना उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश में हाल की क्लाउड बर्स्ट घटनाओं की कड़ी में जुड़ गई है, जो जलवायु परिवर्तन के बढ़ते प्रभाव को दर्शाती है।
मौतों की संख्या 38 तक पहुंची, 200 से अधिक लापता
ताजा अपडेट्स के मुताबिक, इस हादसे में कम से कम 33 लोगों की मौत हो चुकी है, जिसमें दो सेंट्रल इंडस्ट्रियल सिक्योरिटी फोर्स (CISF) के जवान शामिल हैं। कुछ स्रोतों में मौतों की संख्या 38 तक बताई जा रही है, जबकि 120 से अधिक लोग घायल हैं, जिनमें से कई की हालत गंभीर है। लापता लोगों की संख्या 200 से अधिक बताई जा रही है, हालांकि कुछ रिपोर्ट्स में यह 50 तक सीमित है। हादसे ने मचैल माता यात्रा को पूरी तरह प्रभावित किया है, जो सालाना हजारों श्रद्धालुओं को आकर्षित करती है। यात्रा को अनिश्चितकाल के लिए निलंबित कर दिया गया है। सड़कें टूट गईं, पुल बह गए और गांव का आधा हिस्सा तबाह हो गया, जिससे संचार और पहुंच मुश्किल हो गई। CISF के तीन अन्य जवान भी लापता हैं, जो मंदिर की सुरक्षा ड्यूटी पर तैनात थे।
सेना, वायुसेना, NDRF बचाव में जुटी
राहत कार्य तुरंत शुरू हो गए हैं। राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF), राज्य आपदा मोचन बल (SDRF), सेना, वायुसेना, पुलिस और स्थानीय प्रशासन की टीमें मौके पर पहुंची हैं। अब तक 100 से अधिक लोगों को सुरक्षित निकाला गया है, जिसमें 50 से अधिक घायलों को अस्पताल पहुंचाया गया। हेली-राहत की व्यवस्था की गई है, लेकिन लगातार बारिश और खराब मौसम ने इसमें बाधा डाली है। जिला प्रशासन ने कंट्रोल रूम और हेल्प डेस्क स्थापित किए हैं, जहां से सहायता प्रदान की जा रही है।
ये हेल्पलाइन नंबर जारी किए गए हैं:
9858223125, 6006701934, 9797504078, 8492886895, 8493801381, 7006463710 (पड्डर कंट्रोल रूम); 01995-259555, 9484217492 (जिला कंट्रोल रूम); और 9906154100 (किश्तवाड़ पुलिस कंट्रोल रूम)। बचाव कार्य रात भर जारी रहने की उम्मीद है, लेकिन पहाड़ी इलाके और मौसम की वजह से चुनौतियां बनी हुई हैं।
मोदी ने सिन्हा व उमर अब्दुल्ला से बात की
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने घटना पर गहरा दुख व्यक्त किया और कहा कि स्थिति की निगरानी की जा रही है, तथा सभी संभव सहायता प्रदान की जाएगी। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला और उपराज्यपाल मनोज सिन्हा से बात की, तथा NDRF टीमों को तुरंत भेजने का आश्वासन दिया। मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने स्थिति को “गंभीर” बताते हुए कहा कि जानकारी धीरे-धीरे आ रही है और राज्य के अंदर-बाहर से संसाधन जुटाए जा रहे हैं। केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने स्थानीय अधिकारियों से समन्वय किया और चिकित्सा व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। पूर्व मुख्यमंत्री फारूक अब्दुल्ला ने वैश्विक तापमान वृद्धि पर चिंता जताई और तत्काल राहत की अपील की। उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने सभी एजेंसियों को राहत कार्य तेज करने के आदेश दिए।
भारी बारिश की चेतावनी दी गई थी
यह घटना मॉनसून सीजन में पहाड़ी क्षेत्रों में बढ़ती क्लाउड बर्स्ट की प्रवृत्ति को रेखांकित करती है। मौसम विभाग ने किश्तवाड़ सहित कई इलाकों में भारी बारिश की चेतावनी पहले ही जारी की थी, जिसमें कीचड़ स्लाइड और फ्लैश फ्लड का खतरा बताया गया था। विशेषज्ञों का मानना है कि जलवायु परिवर्तन ऐसी घटनाओं को बढ़ावा दे रहा है। प्रभावित परिवारों को सहायता प्रदान करने के लिए सरकार ने तत्काल कदम उठाने का वादा किया है, लेकिन लापता लोगों की तलाश में समय लग सकता है। स्थानीय निवासियों और श्रद्धालुओं से अपील की गई है कि वे सुरक्षित स्थानों पर रहें और हेल्पलाइन का उपयोग करें।
यह आपदा न केवल मानवीय क्षति बल्कि क्षेत्र की अर्थव्यवस्था और पर्यटन को भी प्रभावित करेगी। राहत कार्यों पर सभी की नजरें टिकी हैं, और उम्मीद है कि जल्द ही स्थिति नियंत्रण में आएगी।













