बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC) से जुड़े एक गंभीर धोखाधड़ी मामले में आरोपी की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी है। अदालत ने माना कि मृत व्यक्तियों के नाम पर बीमा पॉलिसियां जारी कराकर क्लेम राशि हड़पने की साजिश के पुख्ता सबूत रिकॉर्ड पर मौजूद हैं।


ब्रांच मैनेजर की शिकायत से खुला मामला

इस मामले की जांच भारतीय जीवन बीमा निगम की बिलासपुर शाखा के प्रबंधक एल्बन टोप्पो की लिखित शिकायत से शुरू हुई। उन्होंने सिविल लाइंस थाना, बिलासपुर में दर्ज शिकायत में बताया कि संतोषी साहू, ममता पांडेय और बबला पांडेय की पहले ही मृत्यु हो चुकी थी, इसके बावजूद उनके नाम पर फर्जी दस्तावेजों के आधार पर बीमा पॉलिसियां ली गईं।


मृत्यु दावा राशि की अवैध निकासी

शिकायत के अनुसार, सुनियोजित तरीके से इन पॉलिसियों पर मृत्यु दावा प्रस्तुत किया गया और क्लेम की राशि निकाल ली गई। पुलिस जांच में सामने आया कि इस धोखाधड़ी में एलआईसी एजेंट नरेश अग्रवाल, राजेश कुमार शर्मा और राशि सखुजा की अहम भूमिका रही। इन एजेंटों ने मृतकों के परिजनों और नामांकित व्यक्तियों के साथ मिलकर यह फर्जीवाड़ा किया।


सह-आरोपियों के बयान से उजागर हुआ नाम

जांच के दौरान सह-आरोपियों के बयानों के आधार पर विजय कुमार पांडेय का नाम सामने आया। पुलिस ने आरोपी के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 420, 120-बी, 467, 468 और 471 के तहत अपराध दर्ज किया है।


उम्र और बीमारी का हवाला बेअसर

आरोपी विजय कुमार पांडेय ने हाईकोर्ट में अग्रिम जमानत के लिए आवेदन करते हुए खुद को 64 वर्षीय वृद्ध और पैरालिसिस से पीड़ित बताया। हालांकि अदालत ने इस दलील को स्वीकार नहीं किया।


अदालत की टिप्पणी: गंभीर अपराध के संकेत

मामले की सुनवाई मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा की पीठ में हुई। अदालत ने टिप्पणी की कि रिकॉर्ड पर मौजूद दस्तावेज साफ तौर पर गंभीर जालसाजी और आपराधिक षड्यंत्र की ओर इशारा करते हैं। यह भी कहा गया कि आरोपी ने तथ्यों को छिपाकर पॉलिसियों को दोबारा जारी कराया, जिससे बीमा कंपनी को नुकसान पहुंचाया गया।


अग्रिम जमानत से इनकार

अपराध की गंभीरता को देखते हुए हाईकोर्ट ने आरोपी को अग्रिम जमानत देने से साफ इनकार कर दिया। अदालत के इस फैसले के बाद अब पुलिस को आगे की जांच और कार्रवाई का रास्ता खुल गया है।

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