बिलासपुर। छत्तीसगढ़ मेडिकल स्नातकोत्तर (पीजी) प्रवेश नियम, 2025 के नियम-11 में किए गए संशोधन को लेकर चल रहा विवाद अब सर्वोच्च न्यायालय तक पहुँच गया है। डॉ. समृद्धि दुबे द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई के बाद सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार से जवाब तलब करते हुए नोटिस जारी किया है।

नियम-11 को हाईकोर्ट में चुनौती दी गई

डॉ. समृद्धि दुबे ने पहले बिलासपुर स्थित छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में याचिका दायर कर छत्तीसगढ़ मेडिकल पोस्ट-ग्रेजुएट एडमिशन रूल्स, 2025 के नियम-11 को चुनौती दी थी। हाईकोर्ट ने याचिका स्वीकार करते हुए नियम-11 को असंवैधानिक करार दिया और उसे निरस्त कर दिया था।

सरकार का संशोधन और आरक्षण प्रावधान

हाईकोर्ट के निर्णय के बाद राज्य सरकार ने 1 दिसंबर 2025 को नियम-11 में संशोधन किया। संशोधित नियम के तहत राज्य कोटे की सीटों में 50 प्रतिशत संस्थागत (इंस्टीट्यूशनल) और 50 प्रतिशत गैर-संस्थागत (नॉन-इंस्टीट्यूशनल) आरक्षण लागू किया गया।

सुप्रीम कोर्ट में राज्य सरकार की अपील

राज्य सरकार ने हाईकोर्ट के 20 नवंबर 2025 के आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी। सर्वोच्च न्यायालय ने राज्य सरकार को नोटिस जारी करते हुए हाईकोर्ट में स्पष्टीकरण याचिका दाखिल करने की अनुमति दी। इसके बाद राज्य सरकार ने हाईकोर्ट में पुनर्विचार याचिका दाखिल की।

हाईकोर्ट का स्पष्टीकरण, फिर नया विवाद

16 जनवरी 2026 को हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान आदेश का स्पष्टीकरण दिया गया। इसके बावजूद, आरोप है कि राज्य सरकार ने आदेश की गलत व्याख्या करते हुए 22 जनवरी 2026 को फिर से अधिसूचना जारी कर नियम-11 में संशोधन कर दिया और काउंसलिंग के दौरान किए गए प्रवेश निरस्त कर दिए।

दूसरी याचिका भी खारिज

डॉ. समृद्धि दुबे ने 22 जनवरी 2026 की अधिसूचना और नियम-11 के संशोधन को चुनौती देते हुए पुनः हाईकोर्ट का रुख किया, लेकिन यह याचिका खारिज कर दी गई।

अब सुप्रीम कोर्ट में अंतिम चुनौती

इसके बाद डॉ. समृद्धि दुबे ने अपने अधिवक्ताओं—समीर श्रीवास्तव, प्रियंका श्रीवास्तव, शशिभूषण तिवारी और संगीता वर्मा—के माध्यम से सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की। याचिका में नियम-11 के संशोधन और 22 जनवरी 2026 की अधिसूचना को असंवैधानिक बताया गया है। 5 फरवरी को हुई सुनवाई के बाद सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार से जवाब मांगा है।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here