अंबिकापुर। सरगुजा संभाग के सूरजपुर जिले के एक छोटे से गांव में खेलते-खेलते एक मासूम की जिंदगी खत्म हो गई। पुराने और फेंके गए मोबाइल फोन की बैटरी से हुए विस्फोट ने एक साल के बच्चे की जान ले ली।  

सूरजपुर जिले के प्रेमनगर क्षेत्र के ब्रह्मपुर गांव में रविवार को यह घटना हुई। महेंद्र सिंह नेताम का एक वर्षीय बेटा अपने भाई-बहनों और गांव के अन्य बच्चों के साथ घर के बाहर खेल रहा था। इसी दौरान कुछ बच्चों को आसपास पड़ी एक पुरानी मोबाइल बैटरी मिल गई। बच्चे उसे खिलौने की तरह लेकर खेलने लगे। किसी को अंदाजा नहीं था कि यह पुरानी बैटरी कुछ ही पलों में एक मासूम की जिंदगी छीन लेगी।

अचानक हुआ धमाका, मची चीख-पुकार

प्रत्यक्षदर्शियों और परिजनों के अनुसार बच्चों के हाथों में बैटरी आने के कुछ ही देर बाद उसमें जोरदार विस्फोट हो गया। धमाके की आवाज सुनकर आसपास के लोग दौड़कर मौके पर पहुंचे। विस्फोट की चपेट में आने से एक वर्षीय बच्चा गंभीर रूप से झुलस गया।

धमाके का सबसे ज्यादा असर उसके चेहरे पर पड़ा। इसके अलावा शरीर के कई हिस्सों में भी गंभीर जलन और चोटें आईं। मासूम की हालत देखकर परिजनों के होश उड़ गए और उसे तत्काल अस्पताल ले जाया गया।

एक अस्पताल से दूसरे अस्पताल तक संघर्ष

घटना के तुरंत बाद बच्चे को प्रेमनगर के अस्पताल पहुंचाया गया। डॉक्टरों ने उसकी गंभीर हालत को देखते हुए जिला अस्पताल रेफर कर दिया। वहां भी स्थिति में सुधार नहीं होने पर उसे अंबिकापुर मेडिकल कॉलेज अस्पताल भेजा गया।

डॉक्टरों की टीम लगातार उसके उपचार में जुटी रही और उसे बचाने की कोशिश करती रही। हालांकि शरीर का बड़ा हिस्सा झुलस जाने के कारण उसकी हालत लगातार बिगड़ती गई। आखिरकार मंगलवार तड़के करीब चार बजे उपचार के दौरान उसने दम तोड़ दिया।

बैटरी कहां से आई, जानकारी नहीं

मृतक बच्चे के पिता महेंद्र सिंह नेताम ने पुलिस को बताया कि उन्हें यह जानकारी नहीं है कि बैटरी कहां से आई थी। उनका अनुमान है कि खेलते समय बच्चों को वह कहीं आसपास पड़ी मिली होगी और वे उसे उठाकर घर के पास ले आए होंगे।

पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है। अधिकारियों का मानना है कि बैटरी काफी पुरानी और क्षतिग्रस्त हो सकती है। प्रारंभिक जांच में आशंका जताई गई है कि बच्चों के हाथों में आने के दौरान बैटरी के टर्मिनल आपस में संपर्क में आ गए होंगे, जिससे शॉर्ट सर्किट हुआ और विस्फोट हो गया।

विशेषज्ञों ने दी चेतावनी

तकनीकी विशेषज्ञों के अनुसार पुरानी और क्षतिग्रस्त लिथियम-आयन बैटरियां बेहद खतरनाक हो सकती हैं। इनमें किसी प्रकार का दबाव, टूट-फूट या शॉर्ट सर्किट होने पर आग लगने या विस्फोट की आशंका रहती है। ऐसे इलेक्ट्रॉनिक कचरे को खुले में फेंकना गंभीर खतरा पैदा कर सकता है, खासकर बच्चों के लिए।

एक लापरवाही, उजड़ गया परिवार

गांव में लोग इस बात को लेकर हैरान हैं कि एक पुरानी बैटरी जैसी सामान्य दिखने वाली वस्तु इतनी बड़ी त्रासदी का कारण बन सकती है। मासूम की मौत ने न केवल उसके परिवार को गहरे सदमे में डाल दिया है, बल्कि यह घटना इलेक्ट्रॉनिक कचरे के सुरक्षित निपटान और बच्चों की सुरक्षा को लेकर भी बड़ा सवाल खड़ा कर रही है।

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