विवाद मध्यप्रदेश का होने पर छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट में चुनौती को माना क्षेत्राधिकार से बाहर
बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने SECL के 132 संविदा कर्मचारियों को 2-2 लाख रुपये मुआवजा देने के केंद्रीय औद्योगिक न्यायाधिकरण, जबलपुर के आदेश को चुनौती देने वाली याचिका खारिज कर दी है। कोर्ट ने कहा कि केवल नियोक्ता का मुख्यालय या प्रशासनिक कार्यालय छत्तीसगढ़ में होने से यहां की हाई कोर्ट को मामले की क्षेत्रीय अधिकारिता नहीं मिल जाती।
जस्टिस सचिन सिंह राजपूत ने यह आदेश दिया। मामला SECL के हसदेव क्षेत्र से जुड़े 132 संविदा कर्मचारियों की सेवा समाप्ति से संबंधित है। CGIT जबलपुर ने 2 मई 2024 के अपने अवार्ड में कर्मचारियों की सेवा समाप्ति को अनुचित माना था।
ट्रिब्यूनल ने प्रत्येक कर्मचारी को दो लाख रुपये का एकमुश्त मुआवजा और 50 हजार रुपये मुकदमा खर्च के रूप में देने का निर्देश SECL प्रबंधन को दिया था। SECL ने इस आदेश को छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट में चुनौती दी थी।
हाई कोर्ट ने कहा कि क्षेत्रीय अधिकारिता निर्धारित करने के लिए यह देखना जरूरी है कि विवाद से जुड़े मुख्य और महत्वपूर्ण तथ्य तथा cause of action कहां उत्पन्न हुए। इस मामले में 132 संविदा कर्मचारी मध्यप्रदेश में कार्यरत थे और विवाद भी वहीं उत्पन्न हुआ था।
इसलिए केवल SECL का मुख्यालय छत्तीसगढ़ में होने के आधार पर छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट इस मामले की सुनवाई नहीं कर सकता। कोर्ट ने याचिकाकर्ता को उचित क्षेत्राधिकार वाली हाई कोर्ट में जाने की स्वतंत्रता दी है।














