आठ लोगों की संदिग्ध मौतों के बाद पुलिस ने रामसहाय जायसवाल को किया था गिरफ्तार

रायपुर। बलौदाबाजार जिले के खरवे गांव में लगातार हुई संदिग्ध मौतों के मामले में फॉरेंसिक जांच ने चौंकाने वाला खुलासा किया है। आठ लोगों की हत्या के आरोप में गिरफ्तार 46 वर्षीय रामसहाय जायसवाल के मामले में फॉरेंसिक साइंस लैबोरेटरी (FSL) की रिपोर्ट में कम से कम पांच मृतकों के नमूनों में जहर की पुष्टि हुई है। जांच में बोरैक्स और साइनाइड की मौजूदगी सामने आई है।

पुलिस के मुताबिक दो अन्य मामलों की फॉरेंसिक रिपोर्ट अभी लंबित है, जबकि एक मृतक का अंतिम संस्कार हो जाने के कारण उसका विसरा नमूना नहीं लिया जा सका।

शराब पिलाने के बाद मौतों का सिलसिला

एक हजार से अधिक आबादी वाले खरवे गांव में इस साल फरवरी से मई के बीच एक के बाद एक कई पुरुषों की मौत हुई। शुरुआत में ग्रामीण इन मौतों के पीछे की वजह समझ नहीं पा रहे थे। बाद में एक बात सामने आई कि मृतकों ने आरोपी रामसहाय जायसवाल के साथ शराब पी थी या उसके द्वारा दी गई शराब का सेवन किया था।

पहली मौत 7 फरवरी को हुई थी। उस दिन 58 वर्षीय राजमिस्त्री बद्री पटेल अपने घर में मृत मिले थे। इसके बाद भी मौतों का सिलसिला जारी रहा। अंतिम मौत 14 मई को 40 वर्षीय मैहत्रू साहू की हुई।

लगातार मौतों से परेशान ग्रामीणों ने पहले पूजा-पाठ और अन्य धार्मिक उपाय भी किए। लेकिन मैहत्रू साहू की मौत के बाद ग्रामीणों का शक रामसहाय पर गहराने लगा।

एक युवक के उल्टी करने से जुड़ी कड़ियां

जांच के दौरान यह भी सामने आया कि 23 वर्षीय मजदूर कार्तिक कुम्हार ने रामसहाय द्वारा दी गई शराब पीने के तुरंत बाद उल्टी शुरू कर दी थी। इस घटना ने ग्रामीणों के संदेह को और मजबूत किया।

ग्रामीणों ने 6 जून को पुलिस को लिखित शिकायत दी। जांच आगे बढ़ने के बाद पुलिस ने 22 जून को रामसहाय जायसवाल को गिरफ्तार कर लिया।

हर हत्या के पीछे अलग वजह का आरोप

पुलिस जांच में आरोपी के बारे में बताया गया कि वह कथित तौर पर प्रत्येक व्यक्ति से किसी न किसी बात को लेकर नाराज था। किसी पर गाली देने, किसी पर उसकी पत्नी पर नजर रखने, किसी से पैसे लेने-देने और किसी पर उसके खिलाफ जादू-टोना करने का आरोप लगाने जैसी वजहें सामने आईं। पुलिस के अनुसार, आरोपी को यह भी लगता था कि गांव में उसे वह सम्मान नहीं मिलता, जिसका वह हकदार है।

जांच के दौरान पुलिस ने सात शवों को कब्र से बाहर निकलवाकर पोस्टमार्टम कराया और उनके विसरा नमूने एफएसएल, रायपुर भेजे।

‘सुहागा’ के इस्तेमाल का था संदेह

शुरुआती जांच में पुलिस को आशंका थी कि आरोपी शराब में सुहागा नामक जहरीला पदार्थ मिलाकर लोगों को पिला रहा था। अब एफएसएल की रिपोर्ट में जांच किए गए नमूनों में बोरैक्स और साइनाइड की मौजूदगी की पुष्टि हुई है।

एफएसएल रिपोर्ट बलौदाबाजार पुलिस को हाल ही में मिली है। अधिकारियों के अनुसार, मामले में दो अन्य रिपोर्ट का इंतजार है। पुलिस अब फॉरेंसिक रिपोर्ट समेत अन्य साक्ष्यों के आधार पर मामले की जांच आगे बढ़ा रही है।

खरवे गांव में लगातार हुई मौतों का यह सिलसिला उस समय सामने आया, जब ग्रामीणों ने अलग-अलग घटनाओं के बीच समानता को जोड़ना शुरू किया। इसके बाद शिकायत, पुलिस जांच और फॉरेंसिक परीक्षण ने कथित हत्याओं की कड़ियों को जोड़ने में अहम भूमिका निभाई।

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