हाईवे निर्माण के लिए अधिग्रहित जमीन का मामला, 25 डिसमिल की सीमा पार होते ही बदल गया मूल्यांकन का नियम
बिलासपुर। सकरी गांव में नेशनल हाईवे के लिए अधिग्रहित जमीन के मुआवजे का मामला अब उलझता नजर आ रहा है। करीब 3-4 डिसमिल अतिरिक्त जमीन के इस्तेमाल का दावा लेकर हाईकोर्ट पहुंचे जमीन मालिकों को अब अतिरिक्त मुआवजा मिलने के बजाय पहले से मिले 1.43 करोड़ रुपये में से बड़ी राशि लौटाने की स्थिति का सामना करना पड़ रहा है। राजस्व नियमों के तहत जमीन का क्षेत्रफल 25 डिसमिल से अधिक होने के बाद पूरे भू-भाग के मूल्यांकन की दर बदल जाने से यह स्थिति बनी है।
सकरी के खसरा नंबर 407/5 में विजय गिरी, भरत भूषण गिरी, राकेश कुमार गिरी और सोहगी बाई की करीब 25 डिसमिल जमीन राष्ट्रीय राजमार्ग निर्माण के लिए अधिग्रहित की गई थी। इसका मुआवजा छोटे आवासीय-वाणिज्यिक भूखंडों पर लागू प्रति वर्गफुट/डिसमिल दर के आधार पर करीब 1.43 करोड़ रुपये दिया गया था।
अतिरिक्त जमीन के दावे पर हुआ भौतिक सत्यापन
जमीन मालिकों ने बाद में दावा किया कि उनकी करीब 3-4 डिसमिल अतिरिक्त जमीन का भी उपयोग हुआ है। हाईकोर्ट के निर्देश पर सकरी तहसीलदार और एनएचएआई अधिकारियों की संयुक्त टीम ने मौके का भौतिक सत्यापन किया। जांच में अतिरिक्त क्षेत्र प्रभावित पाया गया।
लेकिन इसके बाद मुआवजे की गणना को लेकर राजस्व नियम सामने आ गए।
25 डिसमिल की सीमा ने बदल दिया पूरा हिसाब
राजस्व नियमों के अनुसार 25 डिसमिल तक के छोटे भूखंडों का मूल्यांकन प्रति वर्गफुट या डिसमिल की दर से किया जाता है। वहीं, क्षेत्रफल 25 डिसमिल से अधिक होने पर जमीन बड़े भू-भाग की श्रेणी में चली जाती है और उसका मूल्यांकन हेक्टेयर आधारित गाइडलाइन दर से किया जाता है।
अतिरिक्त जमीन जुड़ने पर कुल क्षेत्रफल करीब 28 डिसमिल हो गया। इसके चलते पूरे भू-भाग पर हेक्टेयर आधारित दर लागू होने की स्थिति बनी। यह दर पहले लागू छोटी भूखंड वाली दर की तुलना में काफी कम है।
अतिरिक्त मुआवजा नहीं, अब वसूली का आदेश
नए मूल्यांकन में जमीन की कुल कीमत पहले भुगतान किए गए 1.43 करोड़ रुपये से काफी कम निकल रही है। इसी आधार पर एसडीएम न्यायालय ने एनएचएआई को जमीन का पुनर्मूल्यांकन कर अधिक भुगतान की राशि वसूलने के निर्देश दिए हैं।
राजस्व सूत्रों के अनुसार नए मूल्यांकन और पहले भुगतान की राशि के बीच अंतर के आधार पर 50 से 70 लाख रुपये से अधिक की वसूली की तैयारी की जा रही है। यानी अतिरिक्त 3-4 डिसमिल जमीन के लिए मुआवजे की उम्मीद कर रहे जमीन मालिकों के सामने अब पहले प्राप्त राशि का एक बड़ा हिस्सा वापस करने की स्थिति बन गई है।













