नगांव के समागुरी में चुनाव प्रचार के दौरान हुआ विवाद; पुलिस ने स्थिति संभाली
रायपुर/गुवाहाटी, 22 सितंबर। असम के नगांव में चुनाव प्रचार के दौरान कांग्रेस नेताओं के काफिले पर कथित पथराव की घटना के बाद राजनीतिक विवाद तेज हो गया है। काफिले में छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल, असम कांग्रेस अध्यक्ष गौरव गोगोई, नगांव उपचुनाव की कांग्रेस प्रत्याशी सिबामोनी बोरा और अन्य नेता मौजूद थे। घटना सोमवार को समागुरी विधानसभा क्षेत्र के बरमा बाजार इलाके में हुई। पुलिस और अन्य सुरक्षा बलों की तैनाती के बाद स्थिति को नियंत्रित किया गया।
काले झंडे दिखाने के बाद बढ़ा विवाद
रिपोर्टों के अनुसार कांग्रेस का काफिला लोरिमुख में आयोजित चुनावी सभा की ओर जा रहा था। इसी दौरान बरमा बाजार क्षेत्र में कुछ लोगों ने काले झंडे दिखाए और कांग्रेस नेताओं के खिलाफ नारेबाजी की। इसके बाद दोनों पक्षों के समर्थकों के बीच तनाव की स्थिति बनी और काफिले की कुछ गाड़ियों पर पत्थर तथा बोतलें फेंके जाने की बात सामने आई।
घटना में कांग्रेस की कुछ गाड़ियों के शीशे टूटने की जानकारी सामने आई है। कांग्रेस नेताओं ने दावा किया कि एआईसीसी सचिव मनोज चौहान समेत कुछ कार्यकर्ताओं को चोटें आई हैं। पुलिस सूत्रों ने भी घटना की पुष्टि की है।
CRPF ने किया लाठीचार्ज, कुछ लोग हिरासत में
स्थिति बिगड़ने पर मौके पर तैनात CRPF और पुलिस ने भीड़ को नियंत्रित करने के लिए लाठीचार्ज किया। रिपोर्टों के मुताबिक पथराव के दौरान सुरक्षा बलों पर भी पत्थर फेंके गए। पुलिस ने कुछ लोगों को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू की है।
कांग्रेस ने भाजपा समर्थकों पर लगाया आरोप
कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि काले झंडे दिखाने और पथराव के पीछे भाजपा समर्थक थे। गौरव गोगोई ने पुलिस की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाए और कहा कि पार्टी की ओर से पहले ही संभावित टकराव की आशंका की जानकारी प्रशासन को दी गई थी। कांग्रेस की ओर से नगांव सदर थाने में शिकायत भी दी गई है।
भूपेश बघेल ने भी घटना को लेकर पुलिस प्रशासन पर सवाल उठाए हैं। उनके अनुसार सभा से लौटते समय भी काफिले पर हमला हुआ। दूसरी ओर, प्रशासन की ओर से स्थिति को नियंत्रित करने और नेताओं को सुरक्षा उपलब्ध कराने की जानकारी सामने आई है।
नगांव उपचुनाव से पहले बढ़ा राजनीतिक तनाव
यह घटना नगांव उपचुनाव के प्रचार के दौरान हुई है। रिपोर्टों के अनुसार नगांव में 6 अक्टूबर को मतदान और 9 अक्टूबर को मतगणना निर्धारित है। चुनावी प्रचार के दौरान हुई इस घटना ने समागुरी क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था और राजनीतिक दलों के बीच टकराव को लेकर चर्चा तेज कर दी है।
एसिड फेंके जाने का आरोप भी कुछ रिपोर्टों और कांग्रेस नेताओं के बयानों में सामने आया है।














