BSL-3 लैब से संक्रमण की जल्द पहचान, वैक्सीन और इलाज पर शोध को मिलेगी रफ्तार
रायपुर। छत्तीसगढ़ में अब गंभीर संक्रामक बीमारियों की पहचान, उनकी रोकथाम और वैक्सीन पर रिसर्च को नई ताकत मिलेगी। इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय, रायपुर परिसर में अत्याधुनिक बायोसेफ्टी लेवल-3 (BSL-3) लैब स्थापित की गई है। यहां वैज्ञानिक नियंत्रित और सुरक्षित माहौल में संक्रमण फैलाने वाले रोगजनकों का अध्ययन कर सकेंगे। इससे इंसानों, पशुओं और फसलों को प्रभावित करने वाली बीमारियों पर रिसर्च के नए रास्ते खुलेंगे।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने इसे छत्तीसगढ़ में उच्चस्तरीय वैज्ञानिक शोध और आधुनिक लैब सुविधाओं के विस्तार की दिशा में अहम उपलब्धि बताया है।
पशुओं से इंसानों में फैलने वाली बीमारियों पर भी नजर
इस लैब की खासियत यह है कि यहां पशुओं से इंसानों में फैलने वाली बीमारियों यानी जूनोटिक डिजीज पर भी शोध किया जा सकेगा। ऐसी बीमारियों की समय रहते पहचान होने से संक्रमण के फैलाव को रोकने और संभावित प्रकोप से निपटने की तैयारी बेहतर हो सकती है।
लैब में संक्रामक रोगों की जांच, उनके वैज्ञानिक अध्ययन, वैक्सीन और इलाज से जुड़े शोध के साथ आधुनिक डायग्नोस्टिक तकनीकों को विकसित करने में मदद मिलेगी। इससे बीमारी की पहचान और निगरानी की व्यवस्था मजबूत होने की उम्मीद है।
28 सितंबर को हुआ था उद्घाटन
BSL-3 लैब का निर्माण इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय परिसर में नवनिर्मित सुभाष चंद्र बोस बायोटेक इन्क्यूबेशन सेंटर के तहत छत्तीसगढ़ बायोटेक प्रमोशन सोसायटी ने कराया है। इसका उद्घाटन 28 सितंबर को किया गया था।
मुख्यमंत्री साय ने इस उपलब्धि के लिए कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति और छत्तीसगढ़ बायोटेक प्रमोशन सोसायटी के सीईओ डॉ. गिरिश चंदेल को बधाई दी। उन्होंने कहा कि राज्य में आधुनिक वैज्ञानिक सुविधाओं का विस्तार विकसित भारत के लक्ष्य की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
खेती और पशुपालन के लिए भी अहम
छत्तीसगढ़ की अर्थव्यवस्था में खेती और पशुपालन की बड़ी भूमिका है। ऐसे में पौधों, पशुओं और इंसानों की सेहत से जुड़े शोध को एक साथ बढ़ावा देना महत्वपूर्ण माना जा रहा है। नई लैब से कृषि जैव प्रौद्योगिकी, पशु स्वास्थ्य और संक्रामक रोगों पर काम करने वाले वैज्ञानिकों के बीच बेहतर तालमेल बनाने में मदद मिलेगी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि यह सुविधा ‘वन हेल्थ’ यानी एकीकृत स्वास्थ्य दृष्टिकोण को मजबूत करेगी। इस अवधारणा के तहत इंसानों, पशुओं और पर्यावरण की सेहत को एक-दूसरे से जुड़ा हुआ माना जाता है। बीमारियों की निगरानी और उनके वैज्ञानिक समाधान तलाशने में यह दृष्टिकोण उपयोगी हो सकता है।
वैज्ञानिकों को प्रशिक्षण और रिसर्च के अवसर
इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय पहले से कृषि अनुसंधान, बायोटेक्नोलॉजी और आधुनिक लैब सुविधाओं के विकास में काम कर रहा है। विश्वविद्यालय की फाइटोसैनिटरी लैब कृषि नमूनों, मिट्टी, पानी और फसल अवशेषों की जांच व शोध में अहम भूमिका निभाती है।
BSL-3 लैब बनने से वैज्ञानिकों, शोधकर्ताओं और लैब टेक्नीशियनों को उच्चस्तरीय बायोसेफ्टी मानकों के अनुरूप प्रशिक्षण और रिसर्च के अवसर मिलेंगे। इससे राज्य में वैज्ञानिक मानव संसाधन तैयार करने और आधुनिक शोध तकनीकों को बढ़ावा देने में भी मदद मिल सकती है।
मुख्यमंत्री ने उम्मीद जताई कि यह लैब संक्रामक रोगों की निगरानी, पशुजनित बीमारियों के अध्ययन और बीमारी के प्रकोप से निपटने की तैयारी के लिए महत्वपूर्ण वैज्ञानिक केंद्र बनेगी।














