27 अक्टूबर से नई सुविधा लागू, टिकट बुकिंग के समय यात्रियों को देना होगा विकल्प चुनने का मौका
बिलासपुर। ट्रेन से सफर करने वाले यात्रियों को अब रिजर्वेशन काउंटर से टिकट लेते समय भी वैकल्पिक ट्रैवल इंश्योरेंस की सुविधा मिलेगी। दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे 27 अक्टूबर 2026 से इस सुविधा को यात्री आरक्षण प्रणाली (PRS) के सभी काउंटरों पर लागू करने जा रहा है। अब तक यह सुविधा मुख्य रूप से ई-टिकट बुकिंग के दौरान उपलब्ध थी।
रेलवे के मुताबिक, यह व्यवस्था 6 अक्टूबर 2026 को सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुपालन में शुरू की जा रही है। इसके लिए सेंटर फॉर रेलवे इन्फॉर्मेशन सिस्टम्स (CRIS) और IRCTC तकनीकी बदलाव कर रहे हैं।
45 पैसे के प्रीमियम पर 10 लाख रुपये तक का बीमा
योजना के तहत प्रति यात्री प्रीमियम 45 पैसे निर्धारित है, जिसमें सभी टैक्स शामिल हैं। यह दर 17 फरवरी 2024 से लागू बताई गई है। हालांकि, यात्रियों को टिकट बुक करते समय लागू प्रीमियम की पुष्टि कर लेनी चाहिए।
बीमा पूरी तरह वैकल्पिक होगा। काउंटर कर्मचारी यात्रियों को इसकी जानकारी देंगे और उनकी सहमति दर्ज करेंगे। बीमा लेने के लिए मोबाइल नंबर देना और निर्धारित प्रीमियम का भुगतान डिजिटल माध्यम से करना जरूरी होगा। पॉलिसी की जानकारी रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर पर भेजी जाएगी।
मौत पर 10 लाख, इलाज के लिए दो लाख तक
पॉलिसी की शर्तों के अधीन बीमा कवर में प्रमुख प्रावधान इस प्रकार हैं:
- रेल दुर्घटना में मृत्यु होने पर 10 लाख रुपये।
- स्थायी पूर्ण दिव्यांगता पर 10 लाख रुपये।
- स्थायी आंशिक दिव्यांगता पर 7.50 लाख रुपये।
- चोट लगने पर अस्पताल में भर्ती के खर्च के लिए दो लाख रुपये तक।
- पार्थिव शरीर के परिवहन के लिए 10 हजार रुपये तक।
बीमा का लाभ केवल पॉलिसी में निर्धारित दुर्घटनाओं और पात्र घटनाओं के लिए मिलेगा। इसकी शर्तें, अपवाद और पात्रता के नियम लागू होंगे।
कन्फर्म और RAC टिकट वाले यात्री भी पात्र
यह सुविधा पात्र भारतीय रेलवे यात्रियों को कन्फर्म, RAC और आंशिक रूप से कन्फर्म टिकट पर उपलब्ध होगी। पांच साल से कम उम्र के ऐसे बच्चों को कवर नहीं मिलेगा, जो अलग बर्थ या सीट लिए बिना यात्रा करते हैं। योजना में निर्धारित शर्तों के अनुसार कुछ वैकल्पिक परिवहन व्यवस्थाओं पर भी बीमा लागू हो सकता है।
क्लेम की जिम्मेदारी बीमा कंपनी की
रेलवे ने स्पष्ट किया है कि पॉलिसी जारी करने और पात्र दावों का निपटारा करने की जिम्मेदारी संबंधित बीमा कंपनी की होगी। यात्रियों को बीमा से जुड़ी जानकारी या क्लेम के लिए सीधे बीमा कंपनी से संपर्क करना होगा। रेलवे और IRCTC क्लेम का निपटारा नहीं करेंगे।














