आठ साल के आंदोलन के बाद भी अधूरी हवाई सुविधाएं; शहर के कारोबारियों, सामाजिक संगठनों और जनप्रतिनिधियों ने एकजुट होकर उठाई आवाज
बिलासपुर। बिलासा एयरपोर्ट के विकास में लगातार हो रही देरी के विरोध में रविवार को हवाई सुविधा जन संघर्ष समिति के नेतृत्व में निकाले गए ‘उल्टा मार्च’ में शहर के अलग-अलग वर्गों के लोगों ने उत्साह से हिस्सा लिया। करीब डेढ़ किलोमीटर तक पीछे चलते हुए प्रदर्शनकारियों ने संदेश दिया कि देश आगे बढ़ रहा है, लेकिन बिलासपुर की हवाई कनेक्टिविटी अब भी पिछड़ी हुई है।
आंदोलन के आठवें वर्ष में प्रवेश के मौके पर आयोजित इस अनोखे प्रदर्शन में कारोबारियों, सामाजिक संगठनों, जनप्रतिनिधियों और आम नागरिकों ने भागीदारी की। प्रदर्शन के जरिए रनवे विस्तार में देरी, नए टर्मिनल भवन और स्थायी एयर ट्रैफिक कंट्रोल (एटीसी) टावर का अभाव तथा बड़े शहरों के लिए सीधी उड़ानों की कमी पर नाराजगी जताई गई। मौजूदा उड़ानों की अनियमितता और सेवाओं में कटौती का मुद्दा भी उठाया गया।
300 करोड़ रुपये और दो साल की समयसीमा की मांग
समिति ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम ज्ञापन सौंपकर बिलासपुर एयरपोर्ट के विकास के लिए 300 करोड़ रुपये का विशेष बजट देने की मांग की। साथ ही सभी जरूरी निर्माण कार्य दो साल के भीतर पूरे कराने की मांग रखी गई।
ज्ञापन में कहा गया कि बिलासपुर छत्तीसगढ़ का दूसरा प्रमुख शहर है। यहां हाईकोर्ट, दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे का मुख्यालय, केंद्रीय विश्वविद्यालय और साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (एसईसीएल) का मुख्यालय स्थित है। प्रधानमंत्री कार्यालय की सहायता से निर्मित सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल समेत कई महत्वपूर्ण संस्थान भी यहां हैं। इसके बावजूद शहर को देश के प्रमुख महानगरों से जोड़ने वाली हवाई सेवाएं पर्याप्त नहीं हैं।
3C से आगे बढ़कर 4C एयरपोर्ट बनाने की जरूरत
समिति के सदस्य सुदीप श्रीवास्तव के मुताबिक, छत्तीसगढ़ में रायपुर ही ऐसा एयरपोर्ट है जहां 4C श्रेणी के तहत बड़े विमानों के संचालन की सुविधा उपलब्ध है। बिलासपुर में फिलहाल 3C श्रेणी का एयरपोर्ट है, जहां मुख्य रूप से एटीआर जैसे छोटे विमान संचालित होते हैं। उड़ानों की सीमित संख्या और सुविधाओं की कमी के कारण यात्रियों को परेशानी उठानी पड़ती है।
समिति ने एयरपोर्ट को 4C श्रेणी में अपग्रेड करने की मांग करते हुए रनवे की लंबाई 1,500 मीटर से बढ़ाकर 2,800 मीटर करने, स्थायी एटीसी टावर बनाने और नया टर्मिनल भवन तैयार करने की जरूरत बताई। ज्ञापन के अनुसार, रनवे विस्तार के लिए जमीन उपलब्ध है और इन कार्यों पर करीब 300 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है।
केंद्र और राज्य सरकार से जवाब मांग रहा आंदोलन
समिति ने सवाल उठाया कि छत्तीसगढ़ के कोयला कारोबार और रेलवे के जरिए केंद्र सरकार को बड़ी आर्थिक आय होती है, लेकिन बिलासपुर एयरपोर्ट के विकास के लिए अब तक कोई विशेष केंद्रीय सहायता नहीं दी गई। उड़ान योजना के तहत मिली सीमित मदद से शहर की जरूरतें पूरी नहीं हो पा रही हैं।
ज्ञापन में केंद्र सरकार से विशेष अनुदान देने अथवा राज्य सरकार को तय समयसीमा में विकास कार्य पूरे करने के निर्देश देने की मांग की गई। समिति का कहना है कि बिलासपुर जैसे महत्वपूर्ण शहर को बेहतर हवाई संपर्क से वंचित रखना उसके आर्थिक, औद्योगिक और शैक्षणिक विकास के साथ अन्याय है।
ज्ञापन सौंपने का तरीका भी बना विरोध का प्रतीक
उल्टा मार्च के समापन पर ज्ञापन सौंपने की प्रक्रिया को भी विरोध का हिस्सा बनाया गया। कलेक्टर के प्रतिनिधि के रूप में पहुंचे तहसीलदार ने ज्ञापन लिया। समिति ने उनसे कलेक्ट्रेट की ओर पीठ करके खड़े होने का आग्रह किया और उसी उल्टी मुद्रा में प्रधानमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा। यह प्रतीकात्मक तरीका शहर के विकास में हो रही देरी के प्रति लोगों की नाराजगी जाहिर करने के लिए अपनाया गया।
सामाजिक और व्यापारिक संगठनों की भागीदारी
प्रदर्शन में उद्योग संघ, होटल एसोसिएशन, रेलवे मेंस कांग्रेस, कान्यकुब्ज समाज, आंध्र समाज और जिला निषाद संघ सहित विभिन्न संगठनों के प्रतिनिधि शामिल हुए। अलग-अलग क्षेत्रों से आए लोगों की भागीदारी ने एयरपोर्ट विस्तार के मुद्दे को शहरव्यापी मांग के रूप में सामने रखा।
समिति का कहना है कि अब केवल आश्वासनों से काम नहीं चलेगा। रनवे विस्तार, टर्मिनल और एटीसी टावर के निर्माण के लिए बजट, स्पष्ट कार्ययोजना और समयसीमा तय करनी होगी। उल्टा मार्च के जरिए आंदोलनकारियों ने सरकारों को यही संदेश देने की कोशिश की कि बिलासपुर की हवाई सुविधाओं को लेकर इंतजार अब और लंबा नहीं होना चाहिए।
प्रमुख सहभागी: हवाई सुविधा जन संघर्ष समिति के रवि बनर्जी, रामशरण यादव, परशुराम केवट, महेश दुबे, मनोज तिवारी, देवेंद्र सिंह ठाकुर, समीर अहमद ‘बबला’, सीमा पांडेय, मोहन जायसवाल और अन्य सदस्य। जनप्रतिनिधियों व नागरिकों में कोटा विधायक अटल श्रीवास्तव, पूर्व विधायक शैलेश पांडेय, विजय पांडेय, विजय केशरवानी और विवेक बाजपेयी सहित अनेक लोग शामिल रहे। संगठनों की ओर से उद्योग संघ के राकेश खरे, होटल एसोसिएशन के सनी अजमानी, रेलवे मेंस कांग्रेस के विजय अग्निहोत्री और संतोष अग्रवाल, कान्यकुब्ज समाज के टिंकू दुबे तथा आंध्र समाज के के. वेणुगोपाल सहित अन्य प्रतिनिधियों ने भाग लिया।














