जांजगीर-चांपा। नैला-जांजगीर का दुर्गा उत्सव इस वर्ष भी पूरे वैभव और आकर्षण के साथ मनाया जा रहा है। आयोजन का यह 42वां वर्ष है, और इस बार यहां म्यांमार के प्रसिद्ध श्वेत मंदिर की प्रतिकृति पर आधारित 140 फीट ऊंचा और 150 फीट चौड़ा पंडाल तैयार किया गया है। इसके भीतर मां दुर्गा की 35 फीट ऊंची भव्य प्रतिमा स्थापित है, जिसे हीरे, मोती और रत्नों से सजाया गया है।
अद्भुत थीम और दिव्य सज्जा
प्रतिमा की पृष्ठभूमि अक्षरधाम मंदिर के गुंबद और शीशमहल की शैली में बनाई गई है। इससे पूरा माहौल एक अलौकिक आभा से दमक रहा है। इस बार श्रद्धालुओं के लिए विशेष लेजर शो और प्रोजेक्टर लाइटिंग का आयोजन किया गया है, जिसे कोलकाता के अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त कलाकारों ने तैयार किया है।
सुरक्षा और सुविधाओं के विशेष इंतजाम
आयोजन स्थल पर श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए 100 CCTV कैमरे, ड्रोन कैमरे और 200 वालिंटियर तैनात किए गए हैं। वहीं अस्थायी पुलिस चौकी और अग्निवीर जवान भी मौजूद रहेंगे। आने-जाने में सुविधा के लिए इलेक्ट्रिक ऑटो, स्वास्थ्य और फायर ब्रिगेड सेवाएं, पेयजल तथा प्रसाद वितरण की व्यवस्था की गई है।
देशभर से जुटते हैं श्रद्धालु
नैला का दुर्गोत्सव केवल छत्तीसगढ़ ही नहीं बल्कि देशभर में प्रसिद्ध है। यहां की भव्यता को देखने के लिए मध्यप्रदेश, ओडिशा, बिहार, झारखंड, उत्तरप्रदेश और दिल्ली सहित कई राज्यों से श्रद्धालु पहुंचते हैं।
42 वर्षों से अनोखी परंपरा
इस दुर्गोत्सव की खासियत यह है कि समिति पिछले 42 वर्षों से बिना किसी औपचारिक पद के सामूहिक रूप से इसका आयोजन करती आ रही है। हर वर्ष अलग-अलग थीम पर पंडाल बनाए जाते हैं। पिछले साल थाईलैंड के अरुण देव मंदिर और उससे पहले राम मंदिर व बुर्ज खलीफा शैली की झलक श्रद्धालुओं ने देखी थी।













