बिलासपुरसीपत क्षेत्र के NTPC Sipat के राखड़ बांध इलाके में रविवार को एक दुर्लभ प्रवासी हंस देखा गया। आर्कटिक टुंड्रा से आने वाले इस पक्षी का वैज्ञानिक नाम आंसर एल्विफ्रॉम है, जिसे ग्रेटर व्हाइट-फ्रंटेड गूज कहा जाता है। यह छत्तीसगढ़ में इस प्रजाति का दूसरा पुष्ट रिकॉर्ड है। इससे पहले वर्ष 2020 में इसका अवलोकन Raipur के पास दर्ज किया गया था।

पक्षी प्रेमियों की टीम ने किया दस्तावेजीकरण

इस महत्वपूर्ण अवलोकन का दस्तावेजीकरण पक्षी प्रेमियों डॉ. हिमांशु गुप्ता, राहुल गुप्ता और रत्नेश गुप्ता की टीम ने किया। विशेषज्ञों के अनुसार यह हंस आर्कटिक टुंड्रा क्षेत्र में प्रजनन करता है, जो ग्रीनलैंड से लेकर रूस (साइबेरिया), उत्तरी कनाडा और अलास्का तक फैला है। सर्दियों में यह यूरोप और एशिया की ओर दक्षिण दिशा में प्रवास करता है।

भारत में विरल, नलसरोवर सबसे चर्चित स्थल

भारत में यह प्रजाति बहुत कम दिखाई देती है। कभी-कभार इसके रिकॉर्ड गुजरात, महाराष्ट्र और हरियाणा से मिलते हैं। गुजरात स्थित Nal Sarovar Bird Sanctuary इस हंस के अवलोकन के लिए देश के सबसे प्रसिद्ध स्थलों में गिना जाता है। चीन में भी इस प्रजाति के प्रमाणित रिकॉर्ड उपलब्ध हैं।

पहचान की खासियत: सफेद धब्बा और धब्बेदार पेट

ग्रेटर व्हाइट-फ्रंटेड गूज की पहचान इसकी चोंच के आधार पर मौजूद विशिष्ट सफेद धब्बे और पेट पर काले ‘नमक-मिर्च’ जैसे धब्बेदार निशानों से होती है। इन्हीं विशेषताओं के कारण इसे आम तौर पर स्पेकलबेलिड गूज भी कहा जाता है।

सीपत क्षेत्र बनता जा रहा प्रवासी पक्षियों का हॉटस्पॉट

विशेषज्ञों का मानना है कि एनटीपीसी सीपत का राखड़ बांध सेंट्रल एशियन फ्लाईवे पर स्थित होने के कारण प्रवासी पक्षियों के लिए तेजी से एक सक्रिय हॉटस्पॉट के रूप में उभर रहा है। यहां स्वच्छ जल, पर्याप्त भोजन और कम मानवीय हस्तक्षेप जैसी परिस्थितियां अनेक दुर्लभ प्रजातियों को आकर्षित करती हैं।
नवीनतम अवलोकन ने इस आद्रभूमि के पारिस्थितिक महत्व को और मजबूत किया है तथा इसके सतत संरक्षण और नियमित निगरानी की आवश्यकता को रेखांकित किया है।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here