केस चलेगा, कोर्ट ने FIR रद्द करने से इनकार

बिलासपुर। इंदिरा कला संगीत विश्वविद्यालय, खैरागढ़ के थिएटर विभाग के विभागाध्यक्ष और प्रोफेसर के खिलाफ एक पूर्व छात्रा की शिकायत पर दर्ज FIR को रद्द करने की मांग हाईकोर्ट ने खारिज कर दी है। कोर्ट ने कहा कि आरोपों में पहली नजर में गंभीरता है, इसलिए केस चलेगा।

पीड़ित छात्रा ने 29 मार्च 2025 को पुलिस में शिकायत दर्ज कराई थी कि जब वह लॉकडाउन और मां की मौत के बाद पढ़ाई छोड़ चुकी थी और दोबारा पढ़ाई शुरू करना चाह रही थी, तब प्रोफेसर योगेन्द्र चौबे से फीस और एग्ज़ाम फॉर्म की जानकारी लेने गई थी। लेकिन प्रोफेसर ने मदद के बदले उससे शारीरिक संबंध बनाने का दबाव बनाया।

छात्रा का आरोप है कि प्रोफेसर ने कहा कि पहले शाम को उनके घर आकर बात करनी होगी और रात रुकना होगा। इंकार करने पर उन्होंने छात्रा को बार-बार कॉल कर परेशान किया, गाली दी, धमकाया और मिलने का दबाव बनाया।

छात्रा ने यह भी बताया कि जब वह मानसिक इलाज के लिए दिल्ली गई थी, तब भी प्रोफेसर ने उसे एक होटल में बुलाकर फिर से संबंध बनाने का प्रस्ताव दिया और जबरदस्ती हाथ पकड़कर खींचने की कोशिश की, लेकिन वह किसी तरह वहां से बच निकली।

पुलिस ने शिकायत के बाद प्रोफेसर के खिलाफ IPC की धाराएं 354, 354A, 354D, 506, 509 और SC/ST एक्ट की धाराएं 3(1)(V)(A), 3(1)(B) के तहत मामला दर्ज किया और जांच के बाद कोर्ट में चार्जशीट पेश की गई।

प्रोफेसर ने FIR रद्द करने के लिए हाईकोर्ट में याचिका लगाई थी, जिसमें कहा गया कि यह शिकायत तीन साल बाद की गई है और आरोप जातीय द्वेष से प्रेरित हैं। उन्होंने इसे अपने करियर को खत्म करने की साजिश बताया।

राज्य सरकार की तरफ से जवाब दिया गया कि जांच पूरी तरह कानूनी प्रक्रिया के तहत हुई है। हाईकोर्ट ने यह मानते हुए कि प्रथम दृष्टया अपराध बनता है, प्रोफेसर की याचिका खारिज कर दी। अब केस की सुनवाई ट्रायल कोर्ट में जारी रहेगी।

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