बिलासपुर। अचानकमार टाइगर रिजर्व (एटीआर) एक नवंबर से पर्यटकों के लिए फिर से खुलने जा रहा है। हर साल की तरह इस वर्ष भी रिजर्व को मानसून सीजन में, एक जुलाई से 31 अक्टूबर तक, राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण के निर्देश पर बंद रखा गया था। बरसात के दौरान सड़कें कीचड़भरी हो जाती हैं और यह समय वन्य प्राणियों के प्रजनन का होता है, इसलिए पर्यटकों की सुरक्षा और वन्य जीवन की शांति बनाए रखने के लिए यह पाबंदी लगाई जाती है।

अब मौसम साफ होने के साथ ही एटीआर प्रबंधन ने भ्रमण मार्ग की मरम्मत, रंग-रोगन और सफाई का काम पूरा कर लिया है। 1 नवंबर से पार्क में सफारी शुरू हो जाएगी। जैसे ही ऑनलाइन बुकिंग शुरू हुई, पर्यटकों ने सफारी के लिए अग्रिम बुकिंग कर ली है।

हालांकि, पिछले कुछ वर्षों से शिवतराई स्थित बैगा रिसॉर्ट को मानसून के दौरान भी खुला रखा जाता है ताकि पर्यटक वहां ठहरकर जंगल की प्राकृतिक सुंदरता का आनंद ले सकें।

भ्रमण की समय-सारिणी:
सुबह 6 बजे से 9 बजे तक
सुबह 10 बजे से दोपहर 12 बजे तक
दोपहर 3 बजे से शाम 6 बजे तक

वाहन किराया:

  • जिप्सी – ₹3500
  • यौद्धा वाहन – ₹5500
  • बस – ₹7500

एटीआर प्रबंधन ने इस बार भ्रमण वाहनों की कमी दूर कर ली है। सफारी के लिए पांच नए यौद्धा वाहन खरीदे गए हैं, जो रणथंभौर में मॉडिफाई होने के बाद जल्द ही रिजर्व में उपलब्ध होंगे। वहीं, शिवतराई स्थित बैगा रिसॉर्ट में पर्यटकों के ठहरने के लिए 14 कमरे तैयार हैं, जिनका किराया ₹3500 प्रति दिन  है।

बाघ अभयारण्य भ्रमण के लिए मुख्य दिशानिर्देश

आगमन:

  • सफारी समय से कम से कम 45 मिनट पहले पहुंचें।
  • देरी से आने पर टिकट स्वतः रद्द हो सकता है।

प्रवेश:

  • प्रवेश से पहले अनुमति आवश्यक है।
  • अनुमति हस्तांतरणीय नहीं है और नियमों के उल्लंघन पर रद्द की जा सकती है।

सुरक्षा व आचरण:

  • आग्नेयास्त्र, विस्फोटक, माचिस या लाइटर साथ न लाएँ।
  • धूम्रपान व तेज़ आवाज़ (ट्रांज़िस्टर, हॉर्न आदि) पूरी तरह वर्जित है।
  • सफारी के दौरान शांति और अनुशासन बनाए रखें।

वाहन संचालन:

  • अधिकतम गति सीमा 20 किमी/घंटा रखें।
  • हमेशा अधिकृत गाइड के साथ रहें और उसके निर्देशों का पालन करें।
  • बिना अनुमति वाहन से बाहर न निकलें।

वन्यजीवों का सम्मान:

  • जानवरों का पीछा या छेड़छाड़ न करें, उन्हें रास्ते का अधिकार दें।
  • कचरा न फैलाएँ और किसी भी वन संपत्ति को नुकसान न पहुँचाएँ।
  • पानी साथ रखें और पर्यावरण स्वच्छ रखें।

अनुपालन:

  • सभी आगंतुकों को वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972NTCA के दिशानिर्देशों का पालन करना अनिवार्य है।
  • उल्लंघन पर आरक्षित क्षेत्र से निष्कासन और कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।

अचानकमार टाइगर रिज़र्व : छत्तीसगढ़ का प्राकृतिक धरोहर स्थल

छत्तीसगढ़ के बिलासपुर ज़िले में स्थित अचानकमार टाइगर रिज़र्व (ATR) की स्थापना वर्ष 1975 में वन्यजीव अभयारण्य के रूप में की गई थी। वर्ष 2009 में इसे बाघ अभयारण्य का दर्जा प्राप्त हुआ। यह अचानकमार–अमरकंटक बायोस्फीयर रिज़र्व का हिस्सा है और कान्हा तथा बांधवगढ़ टाइगर रिज़र्व को जोड़ने वाला एक महत्वपूर्ण गलियारा है, जो बाघों की आवाजाही और आनुवंशिक विविधता को बनाए रखने में सहायक है।

यह क्षेत्र मुख्यतः बैगा (PVTG), गोंड और यादव जनजातीय समुदायों का निवास स्थान है। अभयारण्य से होकर बहने वाली मनियारी नदी इसकी जीवनरेखा कही जाती है, जो आगे चलकर शिवनाथ नदी में मिल जाती है।

वनस्पति की दृष्टि से यह क्षेत्र उष्णकटिबंधीय आर्द्र पर्णपाती वन से आच्छादित है, जहाँ साल, साजा, तिनसा, बीजा, हल्दू, सागौन, धावरा, लेंडिया, खमार और बाँस जैसे वृक्ष प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं।

यहाँ के प्रमुख वन्यजीवों में बाघ, तेंदुआ, वन्य कुत्ता, लकड़बग्घा, बाइसन, चिंकारा, सांभर, चीतल और उड़ने वाली गिलहरी (फ्लाइंग स्क्विरेल) शामिल हैं।

अचानकमार टाइगर रिज़र्व न केवल जैव-विविधता का केंद्र है, बल्कि यह छत्तीसगढ़ की पारिस्थितिक संपन्नता और सांस्कृतिक विरासत का भी प्रतीक है।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here