बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने हाईवे में हो रही मवेशियों की मौतों पर सख्त रुख अपनाते हुए राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण और नगर निगम को जरूरी निर्देश दिए हैं। कोर्ट ने कहा है कि नेशनल हाईवे में मवेशियों की सुरक्षा के लिए लगाए जाने वाले “काऊ कैचर” खाली पड़े हैं और सिर्फ दिखावे के लिए खड़े किए जाते हैं। इस पर अब कार्रवाई होगी।
मुख्य न्यायाधीश रमेश कुमार सिन्हा और न्यायमूर्ति रविंद्र कुमार अग्रवाल की खंडपीठ ने सुनवाई के दौरान कहा कि हाईवे पर कोई साइनबोर्ड नहीं लगे हैं, जिससे हादसे और बढ़ रहे हैं। कोर्ट ने साफ कहा कि आपका हाइवे बेरंग और खाली पड़ा है, अब इस स्थिति को बदला जाए।
हादसों से नाराज़ कोर्ट, शासन से जवाब तलब
बुधवार रात दामाखेड़ा में 9 गायों की मौत और 14 जुलाई को बारीडीह में 14 गायों के मारे जाने की घटनाएं भी अदालत में रखी गईं। इन पर नाराज़गी जताते हुए कोर्ट ने पूछा कि अब तक कितने मवेशी मालिकों पर कार्रवाई हुई और आगे की क्या योजना है।
राज्य सरकार की ओर से महाधिवक्ता प्रफुल्ल एन भारत ने बताया कि अब तक चार मवेशी मालिकों पर एफआईआर की गई है। उन्होंने यह भी जानकारी दी कि बिलासपुर पुलिस एक अभियान चला रही है जिसमें मवेशियों के गले में रेडियम पट्टी लगाई जा रही है ताकि रात के समय हादसे कम हों।
दुकानें भी बनीं हादसों की वजह
अधिवक्ता गौतम खेत्रपाल ने पेंड्रीडीह बाईपास में हो रहे हादसों और सड़क किनारे की दुकानों से हो रही परेशानी का मुद्दा उठाया। इस पर हाईकोर्ट ने पेंड्रीडीह पंचायत और बिलासपुर कलेक्टर को आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए।
ये बातें सामने आई सुनवाई में
- हाईकोर्ट ने राज्य सरकार और नेशनल हाईवे अथॉरिटी को निर्देश दिया कि हर जरूरी जगह पर साइनबोर्ड और सुरक्षा व्यवस्था हो।
- काऊ कैचर अब सिर्फ नाम के नहीं, उपयोग के लायक बनें। कोर्ट का निर्देश।
- राज्य सरकार ने बताया कि 40 लाख रुपए से शेड बनाए जा रहे हैं और 9 नई जगहें चिन्हांकित की गई हैं।
- जिला पंचायत को 5 लाख रुपए शेड निर्माण के लिए दिए गए हैं।
- राज्य सरकार ने पहले ही एसओपी (मानक प्रक्रिया) जारी कर दी है।
- गौशालाओं के लिए फंड भी स्वीकृत किया गया है।
अधिकारियों से मांगा व्यक्तिगत हलफनामा
हाईकोर्ट ने मुख्य सचिव और राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजना निदेशक को आदेश दिया है कि वे व्यक्तिगत रूप से हलफनामा दाखिल कर बताएं कि अब तक क्या-क्या कदम उठाए गए हैं।













