राख-धुआं ऐसा फैला कि 20 मिनट तक बचाव के लिए नहीं पहुंच पाया
रायपुर। छत्तीसगढ़ के बलौदाबाजार-भाटापारा जिले के ग्राम बकुलाही स्थित रियल इस्पात एंड पावर लिमिटेड में गुरुवार सुबह करीब 9:40 बजे भीषण विस्फोट हो गया। डस्ट सेटलिंग चैंबर (डीएससी) कोल फर्नेस में अचानक हुए धमाके से गर्म राख और कोयला नीचे काम कर रहे मजदूरों पर गिर पड़ा। इस हादसे में 6 मजदूरों की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि कई अन्य गंभीर रूप से झुलस गए। मृतकों में अधिकांश बिहार और झारखंड के प्रवासी मजदूर बताए गए हैं, जो स्पंज आयरन यूनिट में तैनात थे।
कैसे बढ़ा खतरा, क्या रहा कारण
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, यूनिट नंबर-2 के स्पंज आयरन किल्न में दबाव असामान्य रूप से बढ़ने की शिकायत थी। शुरुआती तकनीकी आकलन में प्रेशर गेज के सही रीडिंग न देने की आशंका जताई गई है, जिससे डीएससी में गैसों का दबाव क्षमता से बाहर हो गया। धमाका इतना तेज था कि चैंबर का ऊपरी हिस्सा उड़ गया और 500–600 डिग्री सेल्सियस तक की ‘हॉट डस्ट’ व चारकोल का लावा मजदूरों पर गिरा। विस्फोट के बाद बिजली गुल हो गई और घना राख-धुआं फैलने से करीब 20 मिनट तक बचाव दल अंदर नहीं जा सका।
क्या हुआ था उस वक्त?
प्लांट के भीतर मौजूद चश्मदीदों के अनुसार, सुबह की पाली (शिफ्ट) का काम सुचारू रूप से चल रहा था। यूनिट नंबर 2 के स्पंज आयरन किल्न (Kiln) में अचानक दबाव (Pressure) बढ़ने की शिकायत आई थी।
- प्रेशर गेज की विफलता: शुरुआती तकनीकी अंदेशा है कि प्रेशर गेज ने सही रीडिंग नहीं दी, जिससे डस्ट सेटलिंग चैंबर (DSC) में गैसों का दबाव क्षमता से बाहर हो गया।
- विस्फोट और तबाही: धमाका इतना भीषण था कि चैंबर का ऊपरी हिस्सा उड़ गया और लगभग 500 से 600 डिग्री सेल्सियस गर्म ‘हॉट डस्ट’ और चारकोल का लावा नीचे खड़े मजदूरों पर सैलाब की तरह गिर गया।
- मौके का मंजर: विस्फोट के बाद प्लांट में बिजली गुल हो गई और हर तरफ चीख-पुकार मच गई। राख का गुबार इतना घना था कि अगले 20 मिनट तक बचाव दल अंदर नहीं जा सका।
बचाव, इलाज और प्रशासनिक कदम
हादसे की सूचना मिलते ही जिला कलेक्टर दीपक सोनी और एसपी भावना गुप्ता मौके पर पहुंचे और राहत कार्यों की निगरानी की। प्लांट को तत्काल सील कर दिया गया है। एसडीएम की अगुवाई में जांच समिति बनाई गई है, जिसमें पुलिस, राजस्व, श्रम विभाग और फोरेंसिक विशेषज्ञ शामिल हैं। घायलों को नजदीकी अस्पतालों में भर्ती कराया गया, जिनमें से 5 की हालत गंभीर होने पर बिलासपुर रेफर किया गया। श्रम विभाग ने मृतकों के परिजनों के लिए मुआवजा प्रक्रिया शुरू कर दी है।
प्रबंधन पर शिकंजा, कड़ी कार्रवाई के संकेत
कलेक्टर ने प्लांट प्रबंधन से पिछली सुरक्षा ऑडिट रिपोर्ट तलब की है। यदि जांच में मशीनरी के पुराने होने, अलार्म सिस्टम के निष्क्रिय रहने या सुरक्षा प्रोटोकॉल के उल्लंघन की पुष्टि होती है, तो प्रबंधन पर गैर-इरादतन हत्या (IPC/BNS) के तहत मामला दर्ज किया जाएगा। औद्योगिक स्वास्थ्य एवं सुरक्षा विभाग ने घटनास्थल से नमूने लेकर तकनीकी जांच शुरू कर दी है।
श्रम विभाग की जांच: औद्योगिक स्वास्थ्य एवं सुरक्षा (Industrial Health & Safety) विभाग की टीम ने घटनास्थल से नमूने लिए हैं ताकि यह पता लगाया जा सके कि भट्ठी के भीतर रासायनिक संतुलन बिगड़ा था या नहीं।
‘हृदयविदारक है यह घटना’ – सीएम साय
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने इस हादसे पर गहरा दुख व्यक्त किया है। उन्होंने अपने शोक संदेश में कहा:
“बलौदाबाजार की स्पंज आयरन फैक्ट्री में हुई घटना अत्यंत दुखद और हृदयविदारक है। जान गंवाने वाले श्रमिकों के परिवारों के प्रति मेरी गहरी संवेदनाएं हैं। घायलों के बेहतर इलाज के लिए निर्देश दिए गए हैं और सुरक्षा मानकों की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।”
कैबिनेट मंत्री लखन लाल देवांगन ने सोशल मीडिया पर संवेदना व्यक्त करते हुए बताया कि प्लांट सील है और घायलों के इलाज की बेहतर व्यवस्था की जा रही है। विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने दिवंगतों की आत्मा की शांति और घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना की।
सरकार ने मृतकों के परिजनों को ₹5-5 लाख की सहायता राशि और घायलों के इलाज का पूरा खर्च वहन करने के निर्देश दिए हैं।
विपक्ष ने सुरक्षा मानकों पर उठाए सवाल
पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने सोशल मीडिया पर इस घटना को लेकर सरकार और प्रबंधन को घेरा है। उन्होंने मृतकों को श्रद्धांजलि देते हुए मांग की है कि:
- पीड़ित परिवारों को तत्काल पर्याप्त मुआवजा दिया जाए।
- हादसे की उच्च स्तरीय निष्पक्ष जांच हो।
- औद्योगिक सुरक्षा नियमों की अनदेखी करने वाले प्रबंधन पर कड़ी दंडात्मक कार्रवाई की जाए।
विपक्ष के नेता डॉ. चरणदास महंत ने इस घटना को “प्रबंधन की आपराधिक लापरवाही” करार दिया है। उन्होंने मांग की है कि:
- मृतक परिवारों को कम से कम ₹50-50 लाख का मुआवजा प्रबंधन की ओर से दिया जाए।
- मृतक के एक परिजन को स्थायी सरकारी या प्लांट में नौकरी दी जाए।
- प्रदेश के सभी स्पंज आयरन प्लांटों का 7 दिनों के भीतर सेफ्टी ऑडिट अनिवार्य हो।
परिजनों का दर्द और स्थानीय लोगों में आक्रोश
एक मजदूर के भाई ने बताया, “मेरा भाई पिछले दो साल से यहाँ काम कर रहा था। हमें कल ही उसने फोन कर घर आने की बात कही थी, लेकिन आज खबर मिली कि वह मलबे में दब गया।” स्थानीय ग्रामीणों में इस बात को लेकर भी आक्रोश है कि ‘रियल इस्पात’ प्रबंधन ने पहले भी सुरक्षा संबंधी छोटी घटनाओं को दबाने की कोशिश की थी। एक घायल मजदूर ने बताया कि “अचानक लपटें निकलीं, सब कुछ जलने लगा।” मृतकों के रिश्तेदारों ने सुरक्षा उपकरणों की कमी और लापरवाही का आरोप लगाया है। स्थानीय ग्रामीणों ने भी प्लांट गेट पर प्रदर्शन कर जिम्मेदार अधिकारियों की गिरफ्तारी की मांग की।
इस घटना के चलते छत्तीसगढ़ के औद्योगिक गलियारे में आज मातम का दिन रहा। रियल इस्पात एंड पावर लिमिटेड में हुए भीषण विस्फोट ने औद्योगिक सुरक्षा के दावों की पोल खोल दी है। औद्योगिक विशेषज्ञों के मुताबिक, स्पंज आयरन प्लांटों में ‘एक्रिएशन’ यानी भट्ठी के अंदर कचरा जमना आम समस्या है। सफाई या रखरखाव के दौरान सुरक्षा नियमों का पालन न हो, तो दबाव बढ़ने से ऐसे विस्फोट हो सकते हैं। जांच का मुख्य फोकस यही है कि क्या रखरखाव में शॉर्टकट अपनाया गया।














