जीएसटी 2.0 के तहत सरकार का मक़सद है कि रोज़मर्रा की ज़रूरतों की चीज़ें सस्ती हों और कंपनियाँ टैक्स कटौती का पूरा फायदा जनता तक पहुँचाएँ। आने वाले महीनों में हर रिपोर्ट से साफ होगा कि दाम सचमुच घटे हैं या नहीं।
नई दिल्ली। GST दरों में कटौती का पूरा लाभ आम उपभोक्ताओं तक पहुँचे, इसके लिए केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। वित्त मंत्रालय के राजस्व विभाग ने देशभर के अपने अधिकारियों को आदेश दिया है कि वे रोज़मर्रा में इस्तेमाल होने वाले 54 सामानों की कीमत का ब्योरा हर महीने तैयार करें।
नई जीएसटी दरें 22 सितंबर से लागू होंगी। मंत्रालय ने साफ कहा है कि दाम घटने या बढ़ने की जानकारी हर महीने रिपोर्ट के रूप में 20 तारीख तक केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर एवं सीमा शुल्क बोर्ड (CBIC) को भेजी जाए। पहली रिपोर्ट 30 सितंबर तक सौंपनी होगी। यह प्रक्रिया छह महीने तक चलेगी और इसे “प्राथमिकता” में रखा गया है।
किन सामानों पर नज़र रखी जाएगी?
खाने-पीने का सामान:
कंडेन्स्ड मिल्क, मक्खन, चीज़, घी, UHT मिल्क, सूखे मेवे, बिस्किट और कुकीज़, चॉकलेट, कॉर्नफ्लेक्स, टोमैटो कैचप, जैम, आइसक्रीम, केक और पैक्ड ड्रिंकिंग वाटर बॉटल।
➡️ इन पर जीएसटी 12% या 18% से घटाकर 5% कर दिया गया है। UHT मिल्क पर टैक्स अब शून्य होगा।
➡️ 20 लीटर की बोतल में पैक पीने का पानी और मिनरल वाटर पर टैक्स 18% या 12% से घटाकर 5% किया गया है।
दैनिक उपयोग के घरेलू सामान:
टॉयलेट सोप, हेयर ऑयल, शैम्पू, टूथब्रश, टूथपेस्ट, डेंटल फ्लॉस, टैल्कम और फेस पाउडर, शेविंग क्रीम, आफ्टरशेव लोशन।
➡️ इन पर जीएसटी घटाकर 5% किया गया है।
शैक्षिक सामग्री:
मैथमैटिकल बॉक्स, रबर, शार्पनर, पेंसिल, क्रेयॉन्स, नोटबुक, एक्सरसाइज़ बुक और ग्राफ बुक।
सफेद और बड़े घरेलू उपकरण (White Goods):
एयर कंडीशनर, डिशवॉशर, टीवी सेट आदि पर जीएसटी 28% से घटाकर 18% कर दिया गया है।
अन्य रोज़मर्रा के सामान:
रसोई का बर्तन (किचनवेयर), टेबलवेयर, छतरी (Umbrella), बच्चों के खिलौने (ट्राइसाइकिल, स्कूटर, पैडल कार), बच्चों के नैपकिन और फीडिंग बॉटल, दवाइयाँ और मेडिकल आइटम जैसे गॉज़, बैंडेज, थर्मामीटर, ग्लूकोमीटर।
निर्माण सामग्री में सीमेंट पर भी नज़र रखी जाएगी।
निगरानी की ज़रूरत क्यों?
जीएसटी लागू होने के बाद से कई बार टैक्स दरों में बदलाव किया गया है। लेकिन कई बार शिकायतें आईं कि कंपनियाँ टैक्स कटौती का पूरा फायदा ग्राहकों तक नहीं पहुँचा रही हैं और मनमाने दाम वसूल रही हैं।
इसी उद्देश्य से 2017 में “नेशनल एंटी-प्रॉफिटियरिंग अथॉरिटी” बनाई गई थी, लेकिन अब इसकी ज़िम्मेदारी प्रतिस्पर्धा आयोग (CCI) के पास है। आँकड़ों के मुताबिक, 2017 से अब तक सिर्फ 704 मामले दर्ज हुए थे।
पिछले हफ़्ते जीएसटी परिषद की बैठक में दो-स्लैब स्ट्रक्चर (5% और 18%) लागू करने का रास्ता साफ हुआ। इसके बाद राजस्व सचिव अरविंद श्रीवास्तव ने कहा कि सरकार उपभोक्ताओं को राहत सुनिश्चित करने के लिए क़ीमतों पर सीधी निगरानी रखेगी।













