16 हजार से ज्यादा संविदा कर्मचारी नियमितीकरण की मांग पर अड़े, अस्पतालों में ओपीडी से लेकर आपात सेवा तक प्रभावित

health workers’ indefinite strike in Chhattisgarh and its impact on public healthcare

बिलासपुर।  राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) के छत्तीसगढ़ के 16 हजार से ज्यादा संविदा कर्मचारी अपनी नियमितीकरण और 10 सूत्रीय मांगों को लेकर अनिश्चितकालीन हड़ताल पर डटे हुए हैं पांचवें दिन तेज बारिश के बीच कर्मचारियों ने रैली निकाली और मुख्यमंत्री के नाम पत्र भेजकर संविदा प्रथा खत्म कर नियमितिकरण की मांग दोहराई। बड़ी संख्या में महिला कर्मचारी भी छोटे बच्चों को लेकर आंदोलन में शामिल हुईं और भीगते हुए नारेबाजी की।

संगठन की ओर से कहा गया है कि हड़ताल की वजह से प्रदेशभर की स्वास्थ्य सेवाएं बुरी तरह चरमरा गईं है। अस्पतालों में मरीज इलाज के लिए भटक रहे हैं, मगर उन्हें समय पर उपचार नहीं मिल पा रहा। बिलासपुर के जिला अस्पताल, CIMS, सामुदायिक और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों के साथ-साथ ग्रामीण इलाकों के आयुष्मान आरोग्य मंदिर पूरी तरह बंद रहे। बरसात के मौसम में जहां सर्दी-जुकाम, बुखार और उल्टी-दस्त के मरीजों की संख्या बढ़ी है, वहीं हड़ताल के चलते न तो इलाज हो पा रहा है और न ही रिपोर्टिंग। मजबूरी में लोगों को निजी अस्पतालों का सहारा लेना पड़ रहा है। हड़ताल के कारण जिला अस्पताल, सीएचसी, पीएचसी समेत स्वास्थ्य विभाग से जुड़े लगभग सभी राष्ट्रीय कार्यक्रम प्रभावित हुए हैं। मलेरिया, टीबी, टीकाकरण, जन्म-मृत्यु पंजीयन, मातृत्व सेवाएं, ओपीडी, सर्जरी, आपातकालीन सेवाएं—सब ठप हो गईं।

NHM संघ का कहना है कि पिछले 20 सालों से लगातार सेवा देने के बावजूद कर्मचारियों का नियमितीकरण नहीं किया गया। समय-समय पर सरकार से बातचीत हुई, लेकिन हर बार सिर्फ आश्वासन मिला। मांगों में नियमितीकरण, समान कार्य के लिए समान वेतन, स्थानांतरण नीति, सेवा शर्तों का निर्धारण और सामाजिक सुरक्षा लाभ प्रमुख हैं।

कर्मचारियों ने कहा है कि वे तब तक आंदोलन जारी रखेंगे जब तक सरकार उनकी मांगें पूरी नहीं करती। संघ के नेताओं का कहना है – कोरोना जैसी महामारी हो या अन्य आपात परिस्थिति, हमने हमेशा प्रदेश की जनता के लिए काम किया है। लेकिन जब हमारे भविष्य की सुरक्षा और हक की बात आती है तो सरकार चुप्पी साध लेती है।

जिला अध्यक्ष राजकुमार यादव, उपाध्यक्ष जीवन महंत, सचिव प्रमोद पटेल, कोषाध्यक्ष मुकेश अग्रवाल समेत संघ के पदाधिकारियों ने कहा कि सरकार की उपेक्षा और टालमटोल की नीति से मजबूर होकर ही कर्मचारियों को आंदोलन का रास्ता चुनना पड़ा है।

इस आंदोलन में महिला विंग की अध्यक्ष अजीता पांडेय, उपाध्यक्ष डॉ. सिंड्रेला पाल और अन्य पदाधिकारी भी सक्रिय रहीं।

 

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