इधर सेंट्रल जेल में बंद चैतन्य ने दाखिल की हाईकोर्ट में याचिका, शीर्ष अदालत ने सुनवाई से किया था इनकार
रायपुर। छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस नेता भूपेश बघेल की मुश्किलें बढ़ गई हैं। सुप्रीम कोर्ट ने शराब घोटाले और महादेव सट्टा कांड में उनकी अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी है, जिससे उनकी गिरफ्तारी की आशंका गहरा रही है। अदालत ने उन्हें हाईकोर्ट जाने की सलाह दी है। इधर, कल उनके बेटे चैतन्य बघेल ने अपनी गिरफ्तारी को असंवैधानिक बताते हुए हाईकोर्ट में याचिका दायर कर दी है। उनकी जमानत अर्जी पर सुनवाई से सुप्रीम कोर्ट इनकार कर चुका है।
बघेल पर जांच एजेंसियों का आरोप है कि उन्होंने बतौर मुख्यमंत्री रहते हुए 508 करोड़ रुपये के शराब घोटाले और महादेव सट्टा एप से जुड़े आपराधिक सिंडिकेट को संरक्षण दिया। कहा जा रहा है कि उनके करीबी सहयोगी पप्पू बंसल, आईपीएस अधिकारी अभिषेक पल्लव और रायपुर के मेयर के भाई अनवर ढेबर के बयानों ने ईडी और सीबीआई को कुछ अहम सबूत हाथ लगे हैं। लक्ष्मी नारायण बंसल उर्फ पप्पू बंसल, जो 2003 से बघेल के बेहद करीबी रहे हैं, ने कथित रूप से ईडी को बताया कि सिर्फ तीन महीने में उन्होंने 136 करोड़ रुपये का अवैध लाभ कमाया, जिसमें से बड़ा हिस्सा चेतन बघेल की कंपनी तक पहुंचा। आईपीएस प्रशांत अग्रवाल, जो रायपुर, दुर्ग और बिलासपुर जैसे जिलों में एसपी रह चुके हैं, उनके साढ़ू विशाल केजरीवाल और उनके पिता के कारोबारी नेटवर्क पर भी जांच चल रही है। ईडी और एसीबी ने दावा किया है कि इनकी कई कंपनियों में घोटाले की रकम खपाई गई।
ईडी का दावा है कि इस घोटाले से जुटाई गई रकम का हिस्सा चैतन्य बघेल की कंपनी बघेल डेवलपर्स के ‘विट्ठल ग्रीन सिटी प्रोजेक्ट’ में लगाया गया। प्रोजेक्ट की वास्तविक लागत छुपाने, नकद लेन-देन और बिना पर्यावरणीय मंजूरी निर्माण जैसे आरोप भी हैं। प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने चैतन्य बघेल को भी शराब घोटाले और मनी लॉन्ड्रिंग मामले में आरोपी बनाया है। ईडी का आरोप है कि शराब घोटाले से अर्जित काली कमाई को रियल एस्टेट प्रोजेक्ट्स में निवेश कर वैध दिखाया गया। इसी घोटाले से चैतन्य बघेल को करीब 16.70 करोड़ रुपये मिले। ईडी के मुताबिक, इस पूरे सिंडिकेट ने करीब 1000 करोड़ रुपये की रकम को इधर-उधर किया। आरोप है कि फर्जी निवेश के जरिए इस ब्लैक मनी को व्हाइट किया गया और बड़े स्तर पर संपत्तियों में निवेश किया गया। छापेमारी में बघेल के घर से 33 लाख नकद मिले थे, जिन्हें बघेल ने परिवार के अलग-अलग सदस्यों की आय बताते हुए छोटी रकम बताई थी।
इधर, चैतन्य बघेल ने अपनी गिरफ्तारी को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट में मंगलवार को याचिका दायर कर दी है। इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका पर सुनवाई से इनकार कर दिया था और उन्हें हाईकोर्ट जाने की सलाह दी थी।
मालूम हो कि सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में भूपेश बघेल और उनके बेटे चैतन्य ने अलग-अलग जमानत याचिकाएं दायर की थीं। लेकिन कोर्ट ने सुनवाई से इनकार करते हुए कहा कि प्रभावशाली लोग सीधे सुप्रीम कोर्ट पहुंच जाते हैं, जबकि आम आदमी के लिए अदालतों में जगह नहीं बचती।
जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉय-माल्या बागची की बेंच ने कहा था “अगर हम हर मामला सुनेंगे तो फिर बाकी अदालतों की क्या जरूरत है? आम लोगों को भी न्याय की उम्मीद रहती है।” कोर्ट ने यह भी कहा कि बघेल पिता-पुत्र ने एक ही याचिका में कई धाराओं को चुनौती देने के साथ-साथ व्यक्तिगत राहत की मांग भी जोड़ दी है, जो उचित प्रक्रिया नहीं है।
पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA) की कुछ धाराओं की वैधता को चुनौती दी थी। उनकी याचिकाएं प्रवर्तन निदेशालय, सीबीआई और राज्य सरकारों के खिलाफ थी। चैतन्य बघेल ने भी सुप्रीम कोर्ट में ईडी की गिरफ्तारी को चुनौती दी थी, और आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो (EOW) से संभावित गिरफ्तारी से बचने के लिए अग्रिम जमानत मांगी थी।
सुप्रीम कोर्ट से अग्रिम जमानत खारिज होने के बाद राजनीतिक हलकों में यह सवाल तैर रहा है कि क्या भूपेश बघेल की गिरफ्तारी भी जल्द होने वाली है। जांच एजेंसियों का दावा है कि उनके पास उनके खिलाफ पुख्ता सबूत मौजूद हैं। कांग्रेस के भीतर इस नए घटनाक्रम को लेकर बड़ी बेचैनी देखी जा रही है। आने वाले दिनों में छत्तीसगढ़ की राजनीति में बड़ा उलटफेर देखने को मिल सकता है।













