मुंबई। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) के विधायक जितेंद्र आव्हाड ने शनिवार को सनातन धर्म पर टिप्पणी करते हुए कहा कि इसने “भारत को बर्बाद कर दिया” और इसकी विचारधारा को “विकृत” बताया। यह बयान 2008 के मालेगांव बम विस्फोट मामले में सभी सात आरोपियों को विशेष एनआईए अदालत द्वारा बरी किए जाने के बाद आया, जिसने “भगवा आतंक” शब्द पर राजनीतिक बहस को फिर से हवा दी। आव्हाड के बयान पर भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने तीखी प्रतिक्रिया दी और इसे सनातन धर्म का अपमान बताया।
आव्हाड का बयान और उसका संदर्भ
आव्हाड ने पत्रकारों से बात करते हुए कहा, “सनातन धर्म ने भारत को बर्बाद कर दिया। कोई सनातन धर्म नाम का धर्म कभी था ही नहीं। हम हिंदू धर्म के अनुयायी हैं।” उन्होंने दावा किया कि सनातन धर्म ने 17वीं सदी के मराठा शासक छत्रपति शिवाजी महाराज को उनका राज्याभिषेक करने से रोका और छत्रपति संभाजी महाराज को बदनाम किया। इसके अलावा, उन्होंने सनातन धर्म पर सामाजिक सुधारकों जैसे ज्योतिराव फुले और डॉ. बी.आर. आंबेडकर के उत्पीड़न का आरोप लगाया। आव्हाड ने कहा, “इसी सनातन धर्म ने आंबेडकर को पानी पीने या स्कूल जाने से रोका। यह बाबासाहेब आंबेडकर ही थे जिन्होंने सनातन धर्म के खिलाफ खड़े होकर मनुस्मृति को जलाया और इसकी दमनकारी परंपराओं को खारिज किया।”
बीजेपी का तीखा पलटवार
बीजेपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता और सांसद संबित पात्रा ने आव्हाड के बयान की कड़ी निंदा की। उन्होंने कहा, “आव्हाड ने सनातन धर्म के खिलाफ अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल किया है। यह भारत की खूबसूरती का अपमान है, जो सभी के प्रति सम्मान में निहित है।” पात्रा ने एनसीपी-एसपी प्रमुख शरद पवार और उनकी बेटी, सांसद सुप्रिया सुले से सवाल किया कि क्या यह उनकी पार्टी की आधिकारिक राय है या केवल आव्हाड का निजी विचार। उन्होंने यह भी कहा कि अगर यह बयान इस्लाम या किसी अन्य धर्म के खिलाफ होता, तो प्रतिक्रिया इतनी शांतिपूर्ण नहीं होती।
बीजेपी सांसद मेधा कुलकर्णी और शिवसेना नेता शाइना एनसी ने भी आव्हाड की टिप्पणियों की आलोचना की। शाइना एनसी ने कहा, “सनातन धर्म सामंजस्य और सहिष्णुता की विचारधारा है। आव्हाड का यह कहना कि यह हिंदू धर्म से अलग और विकृत है, उनकी अशिक्षा को दर्शाता है।” बीजेपी नेता राम कदम ने इसे “शास्त्रों के अपूर्ण अध्ययन” पर आधारित बताया और इसे वोट-बैंक की राजनीति के लिए अपमानजनक करार दिया।
मालेगांव विस्फोट और “भगवा आतंक” का मुद्दा
आव्हाड का बयान 2008 के मालेगांव विस्फोट मामले में विशेष अदालत द्वारा बीजेपी नेता प्रज्ञा सिंह ठाकुर, लेफ्टिनेंट कर्नल प्रसाद पुरोहित और पांच अन्य आरोपियों को बरी करने के बाद आया। इस मामले को “भगवा आतंक” से जोड़ा गया था, और बीजेपी ने इस फैसले को “हिंदू आतंक” की कहानी को खारिज करने वाला बताया। बीजेपी ने कांग्रेस पर इस तरह के शब्दों का इस्तेमाल करके सनातन धर्म को बदनाम करने का आरोप लगाया।
बीजेपी की चिंता नकली
शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) नेता प्रियंका चतुर्वेदी ने परोक्ष रूप से आव्हाड के बयान की आलोचना करते हुए कहा कि सनातन धर्म “शाश्वत सत्य” का प्रतीक है। हालांकि, उन्होंने बीजेपी पर भी “नकली चिंता” दिखाने का आरोप लगाया। कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों ने इस मामले पर कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया है, लेकिन बीजेपी ने दावा किया कि यह विपक्षी गठबंधन (INDIA) की सनातन धर्म के खिलाफ साझा रणनीति का हिस्सा है।
सनातन धर्म डेंगू , मलेरिया
यह पहली बार नहीं है जब सनातन धर्म पर टिप्पणियों ने राजनीतिक विवाद को जन्म दिया है। सितंबर 2023 में, डीएमके नेता उदयनिधि स्टालिन ने सनातन धर्म की तुलना “डेंगू, मलेरिया और कोरोना” से की थी और इसे समाप्त करने की बात कही थी। उस समय भी बीजेपी ने इसे “नरसंहार का आह्वान” करार दिया था, जबकि उदयनिधि ने स्पष्ट किया कि उनका इरादा सामाजिक बुराइयों के खिलाफ था, न कि नरसंहार का।













