सरगुजा। छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले में 30 और 31 जुलाई की दरम्यानी रात जंगली हाथियों के हमले से चार ग्रामीणों की मौत हो गई। ये घटनाएं लुण्ड्रा और सीतापुर वन परिक्षेत्र के अलग-अलग गांवों में हुईं, जहां एक भटके हुए हाथी ने अचानक हमला कर लोगों को कुचल डाला। इस घटना के बाद गांवों में डर और गुस्से का माहौल है।
खेत और घर पर बोला धावा
पहली घटना सीतापुर परिक्षेत्र के देवगढ़ गांव की है, जहां 30 जुलाई को 55 वर्षीय मोहर साय सैराम खेत में थे। तभी अचानक एक हाथी ने हमला कर दिया और उन्हें कुचलकर मार डाला।
दूसरी घटना लुण्ड्रा परिक्षेत्र के बेवरा गांव की है। यहां 60 वर्षीय राम कोरवा और उनकी 35 साल की बेटी प्यारी खेत से काम कर लौट रहे थे। रास्ते में हाथी ने दोनों पर हमला किया और मौके पर ही दोनों की जान चली गई।
तीसरी घटना सुबह 4 बजे बकिला गांव में हुई, जहां एक हाथी ने घर में घुसकर हमला कर दिया। भागने की कोशिश में सनमेत बाई हाथी के पैरों के नीचे आ गईं और उनकी मौके पर ही मौत हो गई।
कहां से आया यह हाथी?
बताया जा रहा है कि यह हाथी बलरामपुर जिले के राजपुर वन परिक्षेत्र से भटककर सरगुजा के गांवों तक पहुंच गया। पिछले कुछ दिनों से यह हाथी अलग-अलग इलाकों में घूम रहा है और ग्रामीणों के लिए खतरा बना हुआ है।
गांव वालों का आरोप
गांववालों का आरोप है कि वन विभाग की टीम समय रहते अलर्ट नहीं कर पाई। अगर पहले से सतर्कता बरती जाती, तो शायद इन जानें बचाई जा सकती थीं। अब प्रशासन ने इलाके में अलर्ट जारी कर दिया है, लेकिन ग्रामीण डरे हुए हैं और खेत या जंगल की ओर जाने से कतरा रहे हैं।
वन विभाग ने गश्त बढ़ाई
वन विभाग की टीमें फिलहाल मौके पर तैनात हैं और हाथी की गतिविधियों पर नजर रखी जा रही है। साथ ही आसपास के गांवों में गश्त बढ़ा दी गई है।
इसके अलावा 30 जुलाई को सरगुजा में चार राज्यों के वन अधिकारियों की बैठक भी हुई, जिसमें हाथी-मानव संघर्ष को कम करने के लिए समन्वय और अलर्ट सिस्टम को बेहतर बनाने पर चर्चा की गई।
एक दशक में 220 मौतें
उत्तर छत्तीसगढ़ के सरगुजा, बलरामपुर, कोरबा, रायगढ़ जैसे जिलों में पिछले एक दशक में 220 से ज्यादा लोग हाथियों के हमले में मारे जा चुके हैं।
सिर्फ 2024-25 के दौरान सरगुजा में ही हाथी के हमले से अब तक 7 मौतें हो चुकी हैं, जिनमें मार्च से अब तक 5 जानें गई हैं।













