पटना। बिहार में विधानसभा चुनाव से पहले सियासी हलचल तेज हो गई है। राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के नेता और बिहार के पूर्व उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव पर बीजेपी ने दो वोटर आईडी रखने का गंभीर आरोप लगाया है। इस दावे के बाद चुनाव आयोग ने तेजस्वी को नोटिस भेजकर जवाब मांगा है, जिससे सियासी माहौल और गर्म हो गया है।
दरअसल, तेजस्वी ने शनिवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस में दावा किया था कि उनका नाम बिहार की ड्राफ्ट वोटर लिस्ट से गायब है। उन्होंने अपने वोटर आईडी (EPIC नंबर RAB2916120) को चुनाव आयोग के ऐप में डालकर दिखाया, जिसमें “कोई रिकॉर्ड नहीं मिला” का मैसेज आया। तेजस्वी ने इसे साजिश बताते हुए कहा कि अगर उनका नाम वोटर लिस्ट में नहीं है, तो वे चुनाव कैसे लड़ेंगे? उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि बिहार में 65 लाख वोटरों के नाम बिना बताए हटा दिए गए हैं, जो खासकर गरीब, दलित और विपक्षी समर्थकों के हैं।
लेकिन चुनाव आयोग ने तेजस्वी के दावे को खारिज करते हुए कहा कि उनका नाम वोटर लिस्ट में मौजूद है, सीरियल नंबर 416 पर, और उनका EPIC नंबर RAB0456228 है। आयोग ने बताया कि तेजस्वी ने जो दूसरा EPIC नंबर दिखाया, वह रिकॉर्ड में नहीं है और संभवतः फर्जी हो सकता है। इस पर बीजेपी ने तुरंत हमला बोला। बीजेपी प्रवक्ता संबित पात्रा ने कहा, “अगर तेजस्वी जैसे नेता के पास दो वोटर आईडी हैं, तो उनके कार्यकर्ता क्या-क्या कर सकते हैं?” बीजेपी के आईटी सेल प्रमुख अमित मालवीय ने भी X पर लिखा कि तेजस्वी का दावा झूठा है और उनका नाम वोटर लिस्ट में है।
पटना के जिला मजिस्ट्रेट डॉ. थियागराजन ने भी साफ किया कि तेजस्वी का नाम वोटर लिस्ट में उसी EPIC नंबर (RAB0456228) के साथ है, जिसका इस्तेमाल उन्होंने 2020 के चुनाव में किया था। अब सवाल उठ रहा है कि तेजस्वी के पास दूसरा EPIC नंबर कहां से आया? चुनाव आयोग ने इसकी जांच शुरू कर दी है और अगर दो वोटर आईडी की बात सही पाई गई, तो तेजस्वी के खिलाफ FIR दर्ज हो सकती है।
विपक्ष ने इसे बीजेपी की साजिश करार दिया है। तेजस्वी ने कहा, “चुनाव आयोग पारदर्शी नहीं है। 20-30 हजार वोटरों के नाम हर विधानसभा से हटाए गए हैं, लेकिन कोई जानकारी नहीं दी गई।” कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने भी चुनाव आयोग पर वोटर लिस्ट में हेरफेर का आरोप लगाया है। उधर, बिहार के डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी ने तेजस्वी पर तंज कसते हुए कहा, “उन्हें अपनी जानकारी चेक करने की अक्ल नहीं है और वे झूठ फैला रहे हैं।”
इस विवाद ने बिहार में चल रहे विशेष मतदाता सूची संशोधन (SIR) को और चर्चा में ला दिया है। विपक्ष का कहना है कि यह प्रक्रिया बीजेपी के इशारे पर हो रही है ताकि उनके वोटरों को हटाया जा सके। वहीं, चुनाव आयोग का कहना है कि यह सिर्फ डुप्लिकेट और अवैध वोटरों को हटाने का काम है।













