कहा- गरीब और महिलाओं को विधिक सहायता देना कोर्ट की जिम्मेदारी, तलाक का एकतरफा आदेश रद्द

बिलासपुरछत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने फैमिली कोर्ट की कार्यप्रणाली पर अहम दिशा-निर्देश जारी करते हुए कहा है कि राज्य की सभी फैमिली कोर्ट को अब अपना अलग वकीलों का पैनल तैयार करना होगा। अदालत ने स्पष्ट किया है कि अब केवल जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के पास भेजकर कोर्ट अपनी जिम्मेदारी से मुक्त नहीं हो सकती, बल्कि जरूरत पड़ने पर फैमिली कोर्ट को अपने पैनल से वकील नियुक्त कर तुरंत कानूनी सहायता उपलब्ध करानी होगी।

सरकारी खर्च पर मिलेगी कानूनी सहायता

हाई कोर्ट की डिवीजन बेंच ने कहा कि फैमिली कोर्ट द्वारा नियुक्त वकीलों का मानदेय राज्य सरकार के राजस्व से दिया जाएगा। अदालत ने विशेष रूप से यह टिप्पणी की कि यदि कोई पक्ष, खासकर महिला या आर्थिक रूप से कमजोर व्यक्ति, वकील का खर्च उठाने में असमर्थ है तो उसे तत्काल कानूनी सहायता देना फैमिली कोर्ट का संवैधानिक दायित्व है।

केवल लीगल सर्विस अथॉरिटी जाइएकहना गलत

हाई कोर्ट ने फैमिली कोर्ट के रवैये पर नाराजगी जताते हुए कहा कि सिर्फ यह कह देना कि जिला विधिक सेवा प्राधिकरण में आवेदन करें, पर्याप्त नहीं है। कोर्ट ने कहा कि फैमिली कोर्ट की भूमिका केवल मामलों का निपटारा करना नहीं, बल्कि महिलाओं और बच्चों को वास्तविक न्याय दिलाना भी है।

मौखिक मांग पर भी वकील देना जरूरी

अदालत ने स्पष्ट किया कि कानूनी सहायता के लिए लिखित आवेदन जरूरी नहीं है। यदि कोई पक्ष मौखिक रूप से भी यह कहता है कि वह वकील नहीं कर सकता, तो कोर्ट को तत्काल सहायता उपलब्ध करानी चाहिए। ऐसा न करना संविधान के अनुच्छेद 21 के तह त प्रदत्त जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के अधिकार का उल्लंघन है।

ओडिशा से जांजगीर आ रही थी पेशी में 

यह मामला जांजगीर-चांपा की फैमिली कोर्ट में लंबे समय से लंबित एक तलाक प्रकरण से जुड़ा है। पत्नी ने अदालत को बताया था कि आर्थिक तंगी के कारण वह वकील नहीं कर सकती और ओडिशा से बार-बार जांजगीर आना भी संभव नहीं है। इसके बावजूद फैमिली कोर्ट ने उसे जिला विधिक सेवा प्राधिकरण जाने की सलाह देकर अपना दायित्व पूरा मान लिया।
जब महिला वहां नहीं पहुंच सकी, तो फैमिली कोर्ट ने उसे एकतरफा मानते हुए पति के पक्ष में तलाक का आदेश पारित कर दिया।

हाई कोर्ट ने दिया दोबारा सुनवाई का आदेश

महिला की अपील पर सुनवाई करते हुए हाई कोर्ट ने कहा कि छत्तीसगढ़ फैमिली कोर्ट नियम, 2007 के नियम 14 के तहत प्रत्येक फैमिली कोर्ट को वकीलों का पैनल रखना अनिवार्य है, ताकि जरूरत पड़ने पर तुरंत सहायता दी जा सके। कोर्ट ने फैमिली कोर्ट का तलाक आदेश रद्द करते हुए मामले की नए सिरे से सुनवाई करने का निर्देश दिया है।

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