बिलासपुरप्रेस सूचना ब्यूरो (पीआईबी) द्वारा बिलासपुर के एक निजी होटल में आयोजित प्रेस वार्ता में केंद्रीय राज्य मंत्री सह बिलासपुर लोकसभा सांसद Tokhan Sahu ने विपक्ष पर ग्रामीण भारत को भ्रमित करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि विकसित भारत–रोज़गार एवं आजीविका मिशन गारंटी (ग्रामीण) अधिनियम, 2025 का लागू होना किसी योजना को खत्म करना नहीं है, बल्कि ग्रामीण रोज़गार व्यवस्था को अधिक सशक्त, पारदर्शी और परिणामोन्मुख बनाना है।

इतिहास के आईने में नाम परिवर्तन

तोखन साहू ने कहा कि केवल नाम परिवर्तन पर सवाल उठाने वालों को योजना के इतिहास को देखना चाहिए। उन्होंने क्रमवार बताया कि समय-समय पर सरकारों ने ज़मीनी ज़रूरतों के अनुसार योजनाओं का विस्तार और पुनर्गठन किया है—

  • 1989: कांग्रेस सरकार में प्रधानमंत्री Rajiv Gandhi के नेतृत्व में जवाहर रोज़गार योजना की शुरुआत।
  • 1993: प्रधानमंत्री V. Narasimha Rao के कार्यकाल में इसे रोज़गार आश्वासन योजना के रूप में विस्तार।
  • 1999: एनडीए सरकार में प्रधानमंत्री Atal Bihari Vajpayee ने पुनर्गठन कर जवाहर ग्राम समृद्धि योजना बनाई। साहू ने कहा कि उस दौर में नाम नहीं, काम को प्राथमिकता दी गई।
  • 2004–05: यूपीए सरकार ने इसे कानून का दर्जा देकर राष्ट्रीय ग्रामीण रोज़गार गारंटी अधिनियम बनाया।
  • 2009: इसका नाम बदलकर महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोज़गार गारंटी अधिनियम किया गया।

ग्रामीण हित सर्वोपरि

केंद्रीय मंत्री ने स्पष्ट किया कि नया अधिनियम ग्रामीण रोज़गार और आजीविका को टिकाऊ बनाने, पारदर्शिता बढ़ाने और परिणामों पर केंद्रित है। उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य ग्रामीण परिवारों को मज़बूत सुरक्षा और बेहतर अवसर देना है, न कि किसी योजना को कमजोर करना।

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