गुरु घासीदास सेंट्रल यूनिवर्सिटी का मामला
बिलासपुर। गुरु घासीदास केंद्रीय विश्वविद्यालय (GGU) में हाल ही में हुए एक विवाद ने अब नया मोड़ ले लिया है। एक राष्ट्रीय संगोष्ठी के दौरान साहित्यकार के अपमान के मामले में विश्वविद्यालय प्रशासन ने हिंदी विभाग की विभागाध्यक्ष (HOD) डॉ. गौरी त्रिपाठी को उनके पद से हटा दिया है। उनके स्थान पर विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर रमेश गोहे को नया विभागाध्यक्ष नियुक्त किया गया है।
राष्ट्रीय परिसंवाद के मंच पर विवाद उठा
बीती 7 जनवरी को साहित्य अकादमी नई दिल्ली और विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग द्वारा ‘समकालीन हिंदी कहानी: बदलते जीवन संदर्भ’ विषय पर एक राष्ट्रीय परिसंवाद आयोजित किया गया था। कार्यक्रम के दौरान जब कुलपति प्रोफेसर आलोक कुमार चक्रवाल अपना अध्यक्षीय संबोधन दे रहे थे, तभी विवाद की स्थिति निर्मित हुई।
कुलपति ने मंच से प्रसिद्ध कथाकार मनोज रूपड़ा की ओर इशारा करते हुए पूछा, “आप बोर तो नहीं हो रहे हैं?” इस पर रूपड़ा ने सहज भाव से कहा कि “आप कृपया विषय पर बात कीजिए।” इस प्रतिक्रिया से कुलपति आपा खो बैठे और उन्होंने साहित्यकार को अपमानित करते हुए कार्यक्रम से बाहर जाने को कह दिया। इतना ही नहीं, उन्होंने वहां मौजूद अन्य साहित्यकारों से भी कहा कि जिन्हें जाना है, वे जा सकते हैं।
राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर हुई आलोचना
इस दुर्व्यवहार की राष्ट्रीय स्तर पर साहित्यिक जगत में कड़ी निंदा हुई। स्थानीय जनप्रतिनिधियों, जिनमें कोटा विधायक अटल श्रीवास्तव और मस्तूरी विधायक दिलीप लहरिया शामिल हैं, ने कुलपति के व्यवहार को अमर्यादित बताते हुए उन्हें पद से हटाने तक की मांग की थी।
विभागाध्यक्ष को बनाया गया ‘बलि का बकरा’
हैरानी की बात यह है कि जिस मामले में सवाल कुलपति पर उठे थे, उसकी गाज उस विभाग की प्रमुख पर गिरी जिन्होंने कार्यक्रम का आयोजन किया था। चर्चा है कि साहित्यकार को आमंत्रित करने के कारण डॉ. गौरी त्रिपाठी को इस विवाद का खामियाजा भुगतना पड़ा है। प्रशासन ने उन्हें पदमुक्त कर जिम्मेदारी एक जूनियर प्रोफेसर को सौंप दी है, जिसे लेकर विश्वविद्यालय परिसर में सुगबुगाहट मची हुई है।














