शिमला। हिमाचल प्रदेश में इस साल का मानसून अब तक की सबसे विनाशकारी साबित हो रहा है। 20 जून से शुरू हुई भारी बारिश, भूस्खलन और अचानक बाढ़ ने राज्य में भारी तबाही मचाई है, जिसमें अब तक 257 लोगों की मौत हो चुकी है। राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के अनुसार, इनमें से 133 मौतें सीधे बारिश से जुड़ी घटनाओं जैसे भूस्खलन, फ्लैश फ्लड, डूबने और बिजली के करंट लगने से हुई हैं, जबकि 124 मौतें सड़क दुर्घटनाओं में दर्ज की गई हैं। इसके अलावा, 331 लोग घायल हुए हैं और 37 लोग अभी भी लापता हैं।
15 और 16 अगस्त को राज्य के कई जिलों में लगातार बारिश ने स्थिति को और गंभीर बना दिया है। मौसम विभाग ने 17 से 20 अगस्त तक चंबा, कांगड़ा, मंडी, शिमला और सिरमौर जिलों में भारी बारिश का ऑरेंज अलर्ट जारी किया है, जिसमें बादल फटने, भूस्खलन और बाढ़ की चेतावनी शामिल है। राज्य में 455 सड़कें बंद हैं, जिनमें तीन नेशनल हाईवे (NH-305, NH-5, NH-707) शामिल हैं। कुल्लू जिले में सबसे ज्यादा 73 सड़कें प्रभावित हैं, जबकि मंडी और शिमला में 58-58 सड़कों पर यातायात ठप है। बिजली आपूर्ति भी बुरी तरह प्रभावित हुई है, जहां 681 ट्रांसफार्मर खराब हो चुके हैं।
प्रमुख जिलों में तबाही का मंजर
- मंडी जिला: यहां सबसे ज्यादा नुकसान हुआ है, जहां 74 लोगों की मौत हो चुकी है और 30 लोग लापता हैं। भूस्खलन और फ्लैश फ्लड ने दर्जनों गांवों को अलग-थलग कर दिया है। राज्य सरकार ने पूरे जिले में रेड अलर्ट जारी किया है।
- शिमला: राजधानी शिमला में भारी बारिश से आईजीएमसी अस्पताल के पास भूस्खलन हुआ, जिसमें दो कारें क्षतिग्रस्त हो गईं। चौपाल की खगना पंचायत में एक घर पर चट्टान गिरने से परिवार बेघर हो गया, और उन्होंने सरकार से मदद की गुहार लगाई है। रामपुर में एक महिला की मौत हो गई, जबकि कुल्लू से एक व्यक्ति लापता है।
- कांगड़ा और कुल्लू: जोगिंदरनगर उपमंडल के गदियाड़ा गांव में भारी भूस्खलन से सड़कें अवरुद्ध हो गईं, और तबाही का मंजर देखने को मिला। किन्नौर कैलाश यात्रा स्थगित कर दी गई है, और कई स्कूल बंद हैं।
- लाहौल-स्पीति: यहां बादल फटने से पुल बह गए और गांव खाली कराए गए।
आर्थिक नुकसान की बात करें तो राज्य को अब तक 1700 करोड़ रुपये से ज्यादा का घाटा हो चुका है, जिसमें सड़कें, सिंचाई प्रणालियां और घरेलू संपत्ति शामिल हैं। कुल 562 घर पूरी तरह नष्ट हो गए हैं, जबकि 1705 घरों को आंशिक नुकसान पहुंचा है। विशेषज्ञों का मानना है कि हिमालयी क्षेत्र में बादल फटने की घटनाएं पिछले 9 सालों में तेजी से बढ़ी हैं, जो जलवायु परिवर्तन और अनियोजित विकास का नतीजा है।
राहत और बचाव कार्य
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) और सेवा भारती के स्वयंसेवकों ने मोर्चा संभाला है। उन्होंने सहायता केंद्र स्थापित कर राशन, कपड़े और अन्य आवश्यक वस्तुएं वितरित की हैं। मंत्री हर्षवर्धन चौहान ने कहा, “इस साल भी राज्य के विभिन्न क्षेत्रों में बाढ़ और बादल फटने से सरकारी और निजी संपत्तियों को भारी नुकसान हुआ है। अब तक 1600 करोड़ रुपये का नुकसान हो चुका है, साथ ही जान-माल और पशुधन को हानि पहुंची है।”
मौसम विभाग ने चेतावनी दी है कि आने वाले दिनों में और भारी बारिश हो सकती है, इसलिए पहाड़ी इलाकों में यात्रा से बचें। राज्य सरकार ने केंद्र से अतिरिक्त सहायता मांगी है, और बचाव कार्यों में एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की टीमें लगी हुई हैं। हिमाचल की यह तबाही न केवल स्थानीय निवासियों बल्कि पर्यटकों और तीर्थयात्रियों के लिए भी खतरा बनी हुई है।













