कोरबा। धान खरीदी व्यवस्था में बदलाव का दावा ज़मीनी हकीकत से टकराता दिख रहा है। कोरबा जिले में टोकन न मिलने से परेशान एक किसान द्वारा ज़हर पी लेने की घटना ने प्रशासन और सरकार की तैयारियों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। एक ओर दोषी पटवारी पर त्वरित निलंबन की कार्रवाई हुई, वहीं दूसरी ओर पीड़ित किसान और उसके परिवार की व्यावहारिक समस्याओं के समाधान की पहल नज़र नहीं आई।

हरदीबाजार क्षेत्र की घटना, हालत गंभीर

यह घटना हरदीबाजार थाना क्षेत्र की है। जानकारी के अनुसार कोरबी गांव निवासी 40 वर्षीय किसान सुमेर सिंह गोंड ने सोमवार देर रात कीटनाशक पी लिया। हालत बिगड़ने पर परिजन उन्हें पहले हर्दीबाजार स्वास्थ्य केंद्र ले गए, जहां से गंभीर स्थिति में मेडिकल कॉलेज अस्पताल, कोरबा रेफर किया गया। डॉक्टरों की कोशिशों से उनकी स्थिति में कुछ सुधार बताया जा रहा है।


3.75 एकड़ में खेती, 68 क्विंटल धान, फिर भी टोकन नहीं

सुमेर सिंह के पास लगभग 3 एकड़ 75 डिसमिल भूमि है। इस साल उन्होंने करीब 68 क्विंटल से अधिक धान उपजाया, लेकिन टोकन न मिलने के कारण खरीदी केंद्र पर फसल बेच नहीं पाए। बताया गया कि उनके पास मोबाइल फोन तक नहीं था, जिससे नई प्रक्रिया और सत्यापन की जानकारी जुटाना और मुश्किल हो गया।


दफ्तरों के चक्कर, समाधान शून्य

परिजनों और गांव के किसानों के मुताबिक सुमेर सिंह करीब डेढ़ महीने तक खरीदी केंद्र, पटवारी कार्यालय और तहसील कार्यालय के चक्कर लगाते रहे। आवेदन दिया, पीए के माध्यम से प्रयास किया और कलेक्टर के जनदर्शन में भी शिकायत दर्ज कराई—लेकिन कहीं से समाधान नहीं मिला। लगातार निराशा और आर्थिक दबाव ने उन्हें मानसिक रूप से तोड़ दिया।


रात में कांच टूटने की आवाज़, बची जान

किसान की पत्नी मुकुंदी बाई ने बताया कि रविवार रात करीब 12–1 बजे कांच टूटने की आवाज़ आई। दौड़कर पहुंचीं तो पति की हालत बिगड़ी हुई थी। पड़ोसियों की मदद से तुरंत अस्पताल पहुंचाया गया, जिससे उनकी जान बच सकी।


नेतृत्व की प्रतिक्रिया: व्यवस्था पर सवाल

घटना की सूचना मिलते ही क्षेत्रीय सांसद ज्योत्सना महंत अस्पताल पहुंचीं। उन्होंने इसे बेहद दुखद बताते हुए कहा कि आदिवासी मुख्यमंत्री वाले राज्य में एक आदिवासी किसान को ज़हर पीने को मजबूर होना पड़ा—यह दिखाता है कि व्यवस्थाएं कागज़ों तक सीमित हैं। कांग्रेस जिलाध्यक्ष (ग्रामीण) और अन्य नेताओं ने भी परिवार से मुलाकात कर शासन से जवाब मांगा।

वहीं श्रम मंत्री लखन देवांगन ने जांच टीम गठित कर दोषियों पर कार्रवाई का भरोसा दिलाया।


प्रशासनिक कार्रवाई: निलंबन और कारण बताओ नोटिस

मामले की गंभीरता देखते हुए प्रशासन ने प्रारंभिक जांच के बाद तिवरता क्षेत्र की पटवारी कामिनी करे को निलंबित कर दिया। हर्दीबाजार के तहसीलदार अभिजीत राजभानु को पर्यवेक्षण में लापरवाही पर कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। हालांकि किसानों का कहना है कि कार्रवाई से अधिक ज़रूरी समस्या का स्थायी समाधान है।


परिवार की आजीविका खेती पर निर्भर

मुकुंदी बाई ने बताया कि परिवार में तीन बच्चे हैं—एक बेटी की शादी हो चुकी है, बेटा राजेंद्र और छोटी बेटी रागिनी घर पर रहते हैं। खेती ही एकमात्र सहारा है। इस बार भी सारी बचत खेती में लगाई, जिसकी भरपाई धान बेचकर होनी थी। धान न बिकने की चिंता ने पति को यह कठोर कदम उठाने पर मजबूर कर दिया।


घर के बाहर पड़ा 68 क्विंटल धान

सीमित जगह के कारण 68 क्विंटल धान घर के बाहर रखा है। चोरी और नुकसान की आशंका बनी रहती है, इसलिए पति-पत्नी को रात में भी पहरा देना पड़ता है। लंबे समय तक धान बाहर रखना संभव नहीं, लेकिन टोकन और सत्यापन के बिना बिक्री भी नहीं हो पा रही।


पहले भी सामने आईं ऐसी घटनाएं

महासमुंद जिले के बागबाहरा में भी टोकन न मिलने से परेशान किसान द्वारा आत्मघाती कदम उठाने की घटना सामने आ चुकी है। लगातार आ रही ऐसी खबरों ने धान खरीदी व्यवस्था, सत्यापन प्रक्रिया और नए नियमों की व्यावहारिकता पर बड़े प्रश्न खड़े कर दिए हैं।


नियम बदले, ज़रूरत राहत की

सरकार ने अनियमितताओं पर रोक के लिए नियम बदले, लेकिन असर बिचौलियों की जगह किसानों पर पड़ता दिख रहा है। अंतिम तिथि नज़दीक है, सर्वे और सत्यापन की लापरवाही उजागर हो रही है। सुमेर सिंह की घटना ने साफ कर दिया है कि त्वरित प्रशासनिक कार्रवाई के साथ-साथ किसानों को तत्काल राहत और प्रक्रिया में मानवीय लचीलापन जरूरी है।

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