Blive Digital Desk
क्या राहुल गांधी का ‘वोट चोरी’ का मुद्दा भारतीय लोकतंत्र की नींव को हिलाने वाला सवाल बन गया है? 7 अगस्त 2025 को दिल्ली में उनकी प्रेस कांफ्रेंस से शुरू हुआ यह विवाद 8 अगस्त की शाम तक और गहरा गया है। राहुल ने डिजिटल वोटर लिस्ट और सीसीटीवी फुटेज की मांग की, लेकिन न चुनाव आयोग ने और न ही बीजेपी ने उनके पांच बिंदुओं को पूरी तरह खारिज किया। जवाब में शपथपत्र की मांग कर राहुल को घेरने की कोशिश की गई है।
11 अगस्त को इंडिया ब्लॉक का मार्च इस आग में और घी डालने को तैयार है। राहुल गांधी का ‘वोट चोरी’ का मुद्दा 7 अगस्त से 8 अगस्त 2025 तक और तेज हो गया है। उनकी प्रेस कॉन्फ्रेंस, बेंगलुरु रैली, और इंडिया ब्लॉक की बैठक ने इसे राष्ट्रीय चर्चा का विषय बना दिया। आयोग और बीजेपी ने उनके पांच बिंदुओं का सीधा जवाब देने के बजाय शपथपत्र मांगकर या व्यक्तिगत हमलों से पलटवार किया। डिजिटल वोटर लिस्ट और सीसीटीवी फुटेज न देने का सवाल अनुत्तरित है। 11 अगस्त का मार्च इस विवाद को नई ऊंचाई दे सकता है। लेकिन अभी सवाल बरकरार हैं, और जवाब का इंतजार है।
राहुल गांधी ने कौन से खुलासे किए थे?
7 अगस्त को नई दिल्ली में प्रेस कॉन्फ्रेंस में राहुल गांधी ने वोटर लिस्ट में धांधली के पांच तरीकों का दावा किया, जिसे उन्होंने “संस्थागत चोरी” बताया:
- डुप्लीकेट वोटर: 11,965 वोटरों के नाम कई बार दर्ज।
- फर्जी पते: 40,009 वोटरों के पते गलत, शून्य या असत्यापित।
- एक पते पर कई वोटर: 10,452 वोटर एक ही पते पर, जैसे एक बेडरूम में 46 वोटर।
- अमान्य फोटो: 4,132 वोटरों की तस्वीरें ऐसी जिनसे पहचान असंभव।
- फॉर्म 6 का दुरुपयोग: 30,000 नए वोटर गलत तरीके से जोड़े गए।
राहुल ने केवल एक कर्नाटक की बेंगलुरु सेंट्रल लोकसभा सीट के महादेवपुरा विधानसभा क्षेत्र का उदाहरण दिया, जहां 6.5 लाख वोटरों में 1,00,250 फर्जी वोटर पाए गए। उन्होंने दावा किया कि कांग्रेस को कर्नाटक में 16 सीटें जीतने की उम्मीद थी, लेकिन केवल 9 मिलीं। महाराष्ट्र में लोकसभा और विधानसभा चुनावों के बीच 1 करोड़ नए वोटर जोड़े गए, जो ज्यादातर बीजेपी को गए। उन्होंने विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को “लोकतंत्र की लूट” करार दिया और डिजिटल वोटर लिस्ट और सीसीटीवी फुटेज न देने पर आयोग को कटघरे में खड़ा किया।
आदित्य श्रीवास्तव मिला गोदी मीडिया को
- आज तक: राहुल के आदित्य श्रीवास्तव वाले दावे की जांच में पाया गया कि यह व्यक्ति केवल कर्नाटक में वोटर है, न कि उत्तर प्रदेश या महाराष्ट्र में। इससे राहुल का एक दावा कमजोर हुआ, लेकिन अन्य चार बिंदुओं पर कोई खंडन नहीं हुआ।
- इंडिया टीवी: राहुल के आरोपों को प्रमुखता तो दी, लेकिन आयोग की प्रतिक्रिया को भी शामिल किया, जिसमें राहुल से शपथपत्र मांगा गया।
- लाइव हिंदुस्तान: राहुल के यूट्यूब वीडियो का हवाला देते हुए बताया कि उन्होंने SIR को “संस्थागत चोरी” कहा। प्रियंका गांधी के बयान को भी कवर किया, जिसमें उन्होंने आयोग से जांच की मांग की।
- द हिंदू: राहुल के 7 अगस्त के प्रेस कॉन्फ्रेंस को विस्तार से कवर किया, जिसमें 1,00,250 फर्जी वोटरों का दावा और आयोग पर बीजेपी के साथ साठगांठ का आरोप शामिल था।
विदेशी मीडिया में अभी चर्चा सीमित
विदेशी मीडिया में इस मुद्दे को ज्यादा कवरेज नहीं मिला है। बीबीसी हिंदी और अंग्रेजी ने इसे कवर किया। न्यूयॉर्क टाइम्स, गार्जियन, या अल जज़ीरा जैसे प्रकाशनों में 8 अगस्त तक कोई उल्लेख नहीं मिला, जो दर्शाता है कि यह मुद्दा अभी वैश्विक स्तर पर बड़ा नहीं बना।
पात्रा, प्रियंका, रवीश और थरूर का रुख
- संबित पात्रा (बीजेपी प्रवक्ता): राहुल पर संवैधानिक संस्थाओं को धमकाने का आरोप लगाया। कहा कि राहुल हार के बाद ही आयोग पर सवाल उठाते हैं।
- प्रियंका गांधी: 8 अगस्त को आयोग पर निशाना साधते हुए कहा कि अगर आयोग को लगता है कि उनकी जिम्मेदारी केवल बीजेपी के लिए है, तो उन्हें फिर से सोचना चाहिए।
- रवीश कुमार (पत्रकार, @ravish_journo): एक्स पर लिखा कि राहुल की प्रेस कॉन्फ्रेंस गंभीर सवाल उठाती है और आयोग को पारदर्शिता दिखानी चाहिए।
- शशि थरूर: आयोग से तत्काल कार्रवाई की मांग की और कहा कि लोकतंत्र की रक्षा के लिए राहुल के दावों की जांच जरूरी है।
राहुल के चैलेंज के जवाब में सन्नाटा
राहुल ने कहा, “मैंने संसद में संविधान की शपथ ली है, यही मेरी सबसे बड़ी शपथ है। मेरे दावे जनता के सामने हैं, इसे शपथ मानें।” उन्होंने डिजिटल वोटर लिस्ट और सीसीटीवी फुटेज की मांग दोहराई। आयोग और बीजेपी ने उनके पांच बिंदुओं-डुप्लीकेट वोटर, फर्जी पते, एक पते पर कई वोटर, अमान्य फोटो, और फॉर्म 6 का दुरुपयोग- को पूरी तरह खारिज नहीं किया। इसके बजाय, आयोग ने शपथपत्र मांगकर राहुल को घेरने की कोशिश की। राहुल ने जवाब दिया, “अगर मेरा डेटा गलत है, तो आयोग क्यों नहीं कहता कि वोटर लिस्ट झूठी है? क्योंकि वे जानते हैं कि हम सच बोल रहे हैं।”
चुनाव आयोग ने बचाव में मांगा हलफनामा
दरअसल, चुनाव आयोग ने राहुल के आरोपों को “बेबुनियाद” और “गैर-जिम्मेदाराना” बताया। उसने कहा-
- पारदर्शिता का दावा: वोटर लिस्ट जनप्रतिनिधित्व अधिनियम 1950 के तहत पारदर्शी तरीके से बनती है और सभी दलों को दी जाती है।
- शपथपत्र की मांग: आयोग ने राहुल से औपचारिक शपथपत्र पर दावों को साबित करने को कहा, वरना माफी मांगने की बात कही।
- 12 जून का पत्र: आयोग ने दावा किया कि राहुल को महाराष्ट्र में धांधली के दावों पर बातचीत के लिए बुलाया गया था, लेकिन जवाब नहीं मिला।
- आदित्य श्रीवास्तव का खंडन: आयोग ने कहा कि यह व्यक्ति केवल कर्नाटक में वोटर है।
- कर्मचारियों को निर्देश: आयोग ने अपने कर्मचारियों से कहा कि वे ऐसे बयानों से प्रभावित न हों।
हालांकि, आयोग ने डिजिटल वोटर लिस्ट न देने या सीसीटीवी फुटेज नष्ट करने के सवाल पर कोई जवाब नहीं दिया। राहुल के चार बिंदुओं पर भी कोई विस्तृत खंडन नहीं हुआ।
बीजेपी चुनाव आयोग के साथ
- भूपेंद्र यादव (केंद्रीय मंत्री): राहुल पर संवैधानिक संस्थाओं को धमकाने का आरोप। कहा कि उनका “एटम बम” हार का बहाना है।
- अमित मालवीय: राहुल के दावों को “लापरवाह और भ्रामक” बताया। कहा कि महादेवपुरा में बीजेपी का वोट शेयर स्वाभाविक रूप से बढ़ा।
- देवेंद्र फडणवीस: महाराष्ट्र के सीएम ने राहुल के दावों को “झूठ” करार दिया। कहा कि राहुल के आंकड़े बार-बार बदलते हैं।
- बी. वाई. विजयेंद्र: राहुल के बेंगलुरु रैली को “राजनीतिक नाटक” बताया और कहा कि अगर आयोग बीजेपी के साथ है, तो कांग्रेस कर्नाटक में 136 सीटें कैसे जीती?
- बीजेपी ने राहुल को कोर्ट में याचिका दायर करने की चुनौती दी, लेकिन उनके पांच बिंदुओं पर सीधा खंडन नहीं किया।
इंडिया ब्लॉक की बैठक में 50 नेता हुए शामिल
7 अगस्त 2025 को राहुल गांधी ने अपने सरकारी आवास पर इंडिया ब्लॉक के 25 दलों के 50 नेताओं के साथ डिनर बैठक की। इस बैठक में:
- राहुल ने 22 पेज का प्रेजेंटेशन देकर वोट चोरी का “खेल” समझाया, जिसमें कर्नाटक और महाराष्ट्र के आंकड़े शामिल थे।
- नेताओं ने 11 अगस्त को फ्रीडम पार्क से चुनाव आयोग कार्यालय तक मार्च की योजना बनाई।
- बिहार में SIR, जम्मू-कश्मीर में राज्य का दर्जा, और उपराष्ट्रपति चुनाव पर भी चर्चा हुई।
- फारूक अब्दुल्ला और महबूबा मुफ्ती ने जम्मू-कश्मीर के लिए एकजुटता की अपील की।
यह बैठक राहुल की नेतृत्व क्षमता का प्रदर्शन थी, क्योंकि पहले ऐसी बैठकों की मेजबानी सोनिया गांधी या मल्लिकार्जुन खड़गे करते थे।
आज हुई बेंगलूरु में रैली
8 अगस्त को राहुल ने बेंगलुरु के फ्रीडम पार्क में ‘वोट अधिकार रैली’ का नेतृत्व किया। उन्होंने:
- आयोग पर बीजेपी के साथ मिलकर “सीटें और चुनाव चुराने” का आरोप लगाया।
- कर्नाटक सरकार से महादेवपुरा में वोट धांधली की जांच और दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग की।
- हालांकि, वे मुख्य निर्वाचन अधिकारी के कार्यालय में ज्ञापन देने नहीं गए, जैसा कि पहले प्रस्तावित था।
सवाल गंभीर लेकिन आयोग खामोश..
राहुल के आरोप लोकतंत्र की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल उठाते हैं। उनके पांच बिंदुओं में से केवल आदित्य श्रीवास्तव के मामले में खंडन आया, लेकिन बाकी चार बिंदुओं, डुप्लीकेट वोटर, फर्जी पते, एक पते पर कई वोटर, और फॉर्म 6 का दुरुपयोग पर आयोग और बीजेपी खामोश हैं। डिजिटल वोटर लिस्ट न देने का सवाल सबसे बड़ा है। राहुल का दावा है कि 6 महीने की जांच में 1 लाख फर्जी वोटर पकड़े गए, और डिजिटल डेटा से यह मिनटों में सत्यापित हो सकता था। आयोग का वेबसाइट बंद करने का दावा भी अनुत्तरित है। यह वेबसाइट राहुल गांधी की प्रेस कांफ्रेंस के बाद से बंद है।
शपथपत्र की मांग आयोग की रणनीति हो सकती है, ताकि राहुल कानूनी पचड़े में फंसें। लेकिन उनके डेटा को पूरी तरह गलत न बताना यह सवाल उठाता है कि क्या आयोग कुछ छिपा रहा है? अगर डेटा गलत है, तो आयोग स्पष्ट रूप से इसे क्यों नहीं खारिज करता?
अब आगे बहुत कुछ होने वाला है..
- 11 अगस्त का मार्च: इंडिया ब्लॉक का फ्रीडम पार्क से चुनाव आयोग तक मार्च इस मुद्दे को जन आंदोलन बना सकता है। लाखों लोगों की भागीदारी से सरकार और आयोग पर दबाव बढ़ेगा।
- कानूनी रास्ता: बीजेपी और आयोग ने राहुल को कोर्ट जाने की चुनौती दी है। अगर कांग्रेस याचिका दायर करती है, तो यह मामला लंबा खिंच सकता है।
- आयोग की अगली चाल: अगर राहुल शपथपत्र नहीं देते, तो आयोग इसे उनके दावों में विश्वास की कमी के रूप में पेश कर सकता है।
- राजनीतिक प्रभाव: बिहार, पश्चिम बंगाल, और असम में यह मुद्दा विपक्ष के लिए हथियार बन सकता है। ममता बनर्जी और हेमंत सोरेन ने भी SIR का विरोध किया है।
- सोशल मीडिया और जनता: एक्स पर कांग्रेस समर्थकों ने राहुल के दावों का समर्थन किया, जबकि बीजेपी समर्थकों ने इसे “नौटंकी” बताया है।













