सरकार ने इंटर्न का स्टाइपेंड 14,900 से बढ़कर 25 हजार रुपये किया ; अन्य मांगें पूरी नहीं होने पर अनिश्चितकालीन हड़ताल की चेतावनी

बिलासपुर। छत्तीसगढ़ आयुर्विज्ञान संस्थान (सिम्स) में जूनियर डॉक्टरों और इंटर्न डॉक्टरों की 17 सूत्रीय मांगों को लेकर चल रहा आंदोलन गुरुवार को और तेज हो गया। 180 इंटर्न डॉक्टरों ने ओपीडी सेवाओं का बहिष्कार कर हड़ताल शुरू कर दी। इससे अस्पताल में मरीजों को इलाज के लिए लंबा इंतजार करना पड़ा।

डॉक्टरों ने अपनी मांगों के समर्थन में सिम्स के मुख्य गेट के सामने प्रदर्शन किया। उनका कहना है कि जब तक सभी मांगों पर ठोस निर्णय नहीं लिया जाता, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।

ओपीडी में डॉक्टरों की कमी से मरीज परेशान

इंटर्न डॉक्टरों के ओपीडी बहिष्कार के कारण अस्पताल में उपलब्ध डॉक्टरों की संख्या कम हो गई। इसका असर इलाज के लिए पहुंचे मरीजों पर पड़ा और उन्हें सामान्य दिनों की तुलना में अधिक समय तक इंतजार करना पड़ा।

हालांकि, गंभीर मरीजों को परेशानी से बचाने के लिए आपातकालीन सेवाएं सुचारु रूप से जारी रखी गईं।

इंटर्न का स्टाइपेंड बढ़ाने की मांग सरकार ने मानी

आंदोलन के बीच राज्य सरकार ने इंटर्न डॉक्टरों के स्टाइपेंड में बढ़ोतरी की मांग स्वीकार कर ली है।

अब तक इंटर्न डॉक्टरों को हर महीने 14,900 रुपये स्टाइपेंड मिलता था। सरकार के फैसले के अनुसार, 1 अक्टूबर से यह राशि बढ़ाकर 25,000 रुपये प्रतिमाह कर दी जाएगी।

हालांकि, डॉक्टरों का कहना है कि उनकी 17 सूत्रीय मांगों में से केवल स्टाइपेंड बढ़ाने की मांग स्वीकार की गई है। अन्य मांगों पर अब तक कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया है।

पीजी डॉक्टरों की मांगों पर भी नहीं हुआ फैसला

आंदोलन में शामिल डॉक्टरों ने बताया कि स्नातकोत्तर यानी पीजी की पढ़ाई कर रहे डॉक्टरों की मांगों पर भी सरकार ने अब तक ध्यान नहीं दिया है।

जूनियर डॉक्टरों और इंटर्न का कहना है कि जब तक उनकी सभी मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया जाता, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।

28 सितंबर से प्रदेशव्यापी हड़ताल की चेतावनी

गुरुवार सुबह 11 बजे सिम्स गेट के सामने प्रदर्शन शुरू हुआ। इस दौरान डॉक्टरों ने स्पष्ट किया कि 25 और 26 सितंबर को ओपीडी सेवाओं का बहिष्कार जारी रहेगा।

डॉक्टरों ने चेतावनी दी है कि यदि मांगें पूरी नहीं हुईं तो 28 सितंबर से प्रदेशव्यापी हड़ताल शुरू की जाएगी। इसमें प्रदेश के मेडिकल कॉलेजों, जिला अस्पतालों और अन्य स्वास्थ्य केंद्रों के डॉक्टरों के शामिल होने की बात कही गई है।

जूनियर डॉक्टर एसोसिएशन (JDA) के पदाधिकारियों ने कहा कि उनका आंदोलन पूरी तरह शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक है। हालांकि, मांगों पर जल्द निर्णय नहीं होने की स्थिति में आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा।

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