कोरबा। आर्थिक तंगी से जूझ रहे महासमुंद निवासी संदीप गुप्ता ने अपनी पत्नी और 8 वर्षीय बेटे की बेरहमी से हत्या कर दी थी। वारदात को अंजाम देने के बाद वह फरार हो गया और परिवार के अंतिम संस्कार में भी शामिल नहीं हुआ। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने इसे मजबूत परिस्थितिजन्य साक्ष्य मानते हुए धारा 302 के तहत दोहरी उम्रकैद की सजा को सही ठहराया है और उसकी अपील खारिज कर दी।
मां ने दर्ज कराई थी रिपोर्ट
इस हृदयविदारक हत्याकांड की रिपोर्ट खुद आरोपी की मां मीरा देवी गुप्ता ने दर्ज कराई थी। घटना 12 नवंबर 2016 की है, जब मीरा देवी ड्यूटी पर थीं और घर में बहू अंजू गुप्ता, पोता प्रतीक राज (8) और बेटा संदीप गुप्ता मौजूद थे।
दोपहर करीब ढाई बजे संदीप ने मां को फोन कर झूठी बात कही कि वह परिवार के साथ रायपुर आ गया है और घर की चाबी देना भूल गया है, इसलिए वह भी रायपुर आ जाएं। मीरा देवी रायपुर पहुंचीं, लेकिन संदीप से संपर्क नहीं हो पाया। जब वे वापस महासमुंद लौटीं तो घर बंद मिला।
खून से सने शव देख कांप उठी मां
मकान मालिक की मदद से ताला तोड़ा गया, तो अंदर का दृश्य रोंगटे खड़े कर देने वाला था। बहू और पोते के शव खून से सने पड़े थे, जबकि संदीप वहां से गायब था। पुलिस जांच के बाद संदीप गुप्ता को गिरफ्तार किया गया और उसके खिलाफ हत्या का मामला दर्ज किया गया।
कर्ज और टूटे सपनों ने बनाया हत्यारा
जांच में सामने आया कि संदीप भारी कर्ज और आर्थिक तंगी से मानसिक रूप से परेशान था। उसने सिटी कोतवाली महासमुंद में मीडिया से बातचीत में खुद स्वीकार किया कि वह कई बार आत्महत्या करने की सोच चुका था, लेकिन हर बार पत्नी और बेटे का चेहरा सामने आ जाता था।
उसने बताया कि वह खुद भी जान देना चाहता था, लेकिन मजबूरी और डर की वजह से खुद को मार नहीं पाया। आखिरकार आत्मग्लानि में डूबा संदीप खुद महासमुंद थाने पहुंचा और आत्मसमर्पण कर दिया।
बेटे की हत्या ने मां के सपनों को तोड़ दिया
संदीप के पिता का साया 10 साल की उम्र में उठ गया था। मां ने कठिनाइयों से उसे बड़ा किया था, एक सपना देखा था कि बेटा बड़ा आदमी बनेगा और बुढ़ापे का सहारा बनेगा। लेकिन बेटा खुद अपराध के अंधेरे में डूब गया।
हाईकोर्ट ने कहा – अंतिम संस्कार से दूरी भी अपराध का प्रमाण
निचली अदालत से सजा मिलने के बाद संदीप ने हाईकोर्ट में अपील दायर की थी। लेकिन हाईकोर्ट ने पाया कि वह अंतिम संस्कार में भी शामिल नहीं हुआ और इस पर कोई संतोषजनक सफाई भी नहीं दी।
कोर्ट ने कहा कि अभियोजन पक्ष ने मौखिक और दस्तावेजी साक्ष्यों के आधार पर आरोपों को पूरी तरह साबित कर दिया है। लिहाजा, हाईकोर्ट ने संदीप गुप्ता को धारा 302 के तहत दोहरे हत्याकांड में दोषी मानते हुए दोहरी उम्रकैद की सजा को बरकरार रखा।













