मध्यप्रदेश के बाद छत्तीसगढ़ में हो रहा, आगे ओडिशा की तैयारी

नई दिल्ली। कांग्रेस ने पेसा (PESA) और वनाधिकार कानून (FRA) के क्रियान्वयन को लेकर छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश की भाजपा सरकारों पर गंभीर आरोप लगाए हैं। पार्टी के वरिष्ठ नेता Jairam Ramesh ने कहा है कि दोनों राज्यों में गठित टास्क फोर्स इन कानूनों के मूल लोकतांत्रिक ढांचे को कमजोर करने का काम कर रही हैं और इनके माध्यम से राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) से जुड़े संगठनों की भूमिका को संस्थागत स्वरूप दिया जा रहा है।

जयराम रमेश ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर जारी बयान में कहा कि छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश सरकारों ने पेसा अधिनियम, 1996 तथा वनाधिकार अधिनियम, 2006 के क्रियान्वयन के लिए टास्क फोर्स बनाई हैं। उनका दावा है कि जल्द ही ओडिशा भी ऐसा करने वाला तीसरा राज्य बन सकता है।

कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया कि इन टास्क फोर्स के कारण संसद द्वारा पारित दोनों महत्वपूर्ण कानूनों के कार्यान्वयन की मूल लोकतांत्रिक व्यवस्था प्रभावित हो रही है। उन्होंने कहा कि RSS से संबद्ध संगठन अखिल भारतीय वनवासी कल्याण आश्रम इस पूरी प्रक्रिया में प्रमुख भूमिका निभा रहा है और विशेष रूप से ग्राम सभाओं से जुड़े वैधानिक अधिकारों को प्रभावित किया जा रहा है।

रमेश ने कहा कि पेसा और वनाधिकार कानून दोनों ही लंबे जनआंदोलनों के परिणामस्वरूप अस्तित्व में आए थे। इनका उद्देश्य अनुसूचित क्षेत्रों में रहने वाले आदिवासी समुदायों और ग्राम सभाओं को निर्णय लेने की शक्तियां प्रदान करना था। लेकिन वर्तमान में गठित टास्क फोर्स, जिन्हें प्रशासनिक जिम्मेदारियां भी दी गई हैं, इन कानूनों की मूल भावना को कमजोर कर रही हैं।

उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि इन व्यवस्थाओं का प्रभाव भविष्य में वन क्षेत्रों में मौजूद प्राकृतिक संसाधनों के दोहन के रूप में दिखाई दे सकता है। उनके अनुसार खनन गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए पर्यावरणीय और पारिस्थितिकीय चिंताओं की अनदेखी की जा सकती है। रमेश ने अपने बयान में कहा कि इसका लाभ बड़े खनन और कॉरपोरेट समूहों को मिल सकता है।

हालांकि, कांग्रेस के इन आरोपों पर संबंधित राज्य सरकारों की ओर से तत्काल कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

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