नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने बस्तर संभाग में नक्सलवाद से जुड़े संवेदनशील मामलों की सुनवाई को तेज करने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। गृह मंत्रालय (MHA) ने छत्तीसगढ़ के जगदलपुर में नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (NIA) की एक विशेष अदालत स्थापित कर दी है, जो विशेष रूप से NIA द्वारा जांच किए गए अनुसूचित अपराधों (Scheduled Offences) की सुनवाई करेगी।
यह अधिसूचना 1 जून 2026 को जारी की गई, जिसमें 2008 के NIA अधिनियम की धारा 11 के तहत अधिकारों का प्रयोग किया गया है। नई विशेष अदालत जगदलपुर के एडिशनल सेशंस जज की अदालत के अंतर्गत काम करेगी। यह 2019 की पुरानी अधिसूचनाओं को ओवरराइड करेगी (पहले लिए गए कदमों को छोड़कर)।
क्षेत्राधिकार और महत्व
इस विशेष NIA अदालत का क्षेत्राधिकार बस्तर संभाग के प्रमुख जिलों तक फैला होगा, जिसमें शामिल हैं:
- बस्तर (जगदलपुर)
- दक्षिण बस्तर (दंतेवाड़ा)
- कोंडागांव
- उत्तर बस्तर (कांकेर)
ये सभी क्षेत्र ऐतिहासिक रूप से नक्सल प्रभावित रहे हैं। 31 मार्च 2026 को केंद्र सरकार द्वारा पूरे देश को नक्सल प्रभाव से मुक्त घोषित किए जाने के दो महीने बाद यह कदम उठाया गया है।
स्थानीय प्रभाव: बस्तर के विभिन्न जिलों (जगदलपुर, दंतेवाड़ा, बीजापुर आदि) की जेलों में लंबे समय से बंद नक्सलियों के मददगार, समर्थक या उनसे जुड़ी गतिविधियों में शामिल आरोपियों के हजारों मामले लंबित हैं। नई अदालत इन मामलों की सुनवाई में तेजी लाएगी, देरी को कम करेगी और जांच एजेंसियों व न्यायपालिका के बीच बेहतर समन्वय सुनिश्चित करेगी।
सरकारी मंशा
केंद्र सरकार का मानना है कि इस विशेष अदालत से:
- संवेदनशील मामलों में दोषसिद्धि दर बढ़ेगी।
- न्याय प्रक्रिया अधिक कुशल बनेगी।
- आतंकवाद, संगठित अपराध और विद्रोह से संबंधित मामलों में मजबूत कानूनी ढांचा तैयार होगा।
यह फैसला छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश और राज्य सरकार से परामर्श के बाद लिया गया है।
बस्तर के आम नागरिकों, खासकर उन परिवारों के लिए जिनके सदस्य लंबे समय से जेल में बंद हैं, यह खबर महत्वपूर्ण है। अब इन मुकदमों की सुनवाई जगदलपुर में केंद्रित हो जाएगी, जिससे प्रक्रिया तेज होने की संभावना है। हालांकि, कई सामाजिक कार्यकर्ता और परिवार न्यायिक प्रक्रिया में उचित समयसीमा और निष्पक्षता की मांग कर रहे हैं।
वैसे, यह कदम नक्सल उन्मूलन के बाद बस्तर में शांति, विकास और कानून व्यवस्था को और मजबूत करने की केंद्र की व्यापक रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।














