पुरी (ओडिशा)। पवित्र शहर पुरी में आज विश्व प्रसिद्ध महाप्रभु जगन्नाथ की वार्षिक रथयात्रा उत्सव के पहले दिन एक बड़ा हादसा हो गया। भगवान जगन्नाथ, भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा के रथों को खींचने के दौरान बड़ा डांडा (ग्रैंड रोड) पर लाखों की संख्या में उमड़े श्रद्धालुओं के बीच अचानक भगदड़ जैसी स्थिति पैदा हो गई। ताज़ा मीडिया रिपोर्ट्स और राष्ट्रीय समाचार पोर्टलों के अनुसार, इस दर्दनाक घटना में अत्यधिक भीड़ और उमस के कारण दम घुटने व दिल का दौरा पड़ने से 2 श्रद्धालुओं की मौत हो गई है, जबकि 100 से अधिक लोग घायल व बेहोश हो गए हैं। सभी प्रभावित लोगों को तुरंत स्थानीय अस्पतालों में भर्ती कराया गया है।

आस्था के महासैलाब के बीच अचानक मची अफरा-तफरी

आज सुबह से ही पुरी के मुख्य मंदिर से गुंडिचा मंदिर की ओर जाने वाली सड़क ‘बड़ा डांडा’ पर देश-विदेश से आए लाखों श्रद्धालुओं का हुजूम उमड़ पड़ा था। दोपहर के समय जैसे ही भगवान के दिव्य रथों—नंदीघोष, तलध्वज और दर्पदलन को खींचने की प्रक्रिया शुरू हुई, भक्तों का उत्साह चरम पर पहुंच गया। इसी दौरान बाहरी सुरक्षा घेरे से करीब 500 मीटर की दूरी पर स्थित सरधाबाली और गुंडिचा मंदिर के पास रथों को छूने और दर्शन करने की होड़ मच गई। देखते ही देखते भारी भीड़ एक-दूसरे के ऊपर दबाव बनाने लगी, जिससे लोग जमीन पर गिरने लगे और दम घुटने जैसी स्थिति पैदा हो गई।

दम घुटने और हार्ट अटैक से हुई मौतें

राष्ट्रीय समाचार चैनलों जैसे India TV News और ABP Live की रिपोर्टों के अनुसार, भीड़ के इस भारी दबाव के कारण कई लोगों को सांस लेने में गंभीर तकलीफ होने लगी। आधिकारिक सूत्रों और प्राथमिक जानकारियों के मुताबिक, मरने वालों में एक महिला शामिल है जिसकी मौत दम घुटने की वजह से हुई है। वहीं, एक अन्य युवक की मौत दिल का दौरा (हार्ट अटैक) पड़ने से दर्ज की गई है। अचानक हुए इस हादसे से उत्सव की खुशियां पल भर में चीख-पुकार में बदल गईं।

राहत और बचाव कार्य में जुटी स्पेशल रेस्क्यू यूनिट (SRU)

हादसे की खबर मिलते ही ग्रैंड रोड पर तैनात ओडिशा फायर एंड इमरजेंसी सर्विसेज और स्पेशल रेस्क्यू यूनिट (SRU) की टीमें तुरंत सक्रिय हो गईं। भीड़ के बीच से बेहोश और घायल श्रद्धालुओं को स्ट्रेचर के जरिए बाहर निकाला गया। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए रेस्क्यू टीमों ने प्रभावित भक्तों को मौके पर ही प्राथमिक उपचार के साथ-साथ तुरंत ऑक्सीजन सपोर्ट देना शुरू किया। प्रशासन ने त्वरित कार्रवाई करते हुए अब तक 100 से अधिक बीमार और घायल श्रद्धालुओं को सुरक्षित निकालकर पुरी जिला मुख्यालय अस्पताल (पूरी मेडिकल) में स्थानांतरित कर दिया है।

अस्पतालों में डॉक्टरों की विशेष टीमें मुस्तैद

पुरी जिला अस्पताल के मुख्य चिकित्सा अधिकारी ने बताया कि अस्पताल में आपातकालीन स्थिति घोषित कर दी गई है। सभी डॉक्टरों और पैरामेडिकल स्टाफ को अलर्ट पर रखा गया है। घायलों में से कुछ की हालत काफी गंभीर बताई जा रही है, जिन्हें बेहतर इलाज के लिए कटक के एससीबी मेडिकल कॉलेज भेजने की तैयारी भी की जा रही है। अस्पताल परिसर के बाहर अपनों की तलाश में आए परिजनों की भारी भीड़ देखी जा रही है, जिसके लिए प्रशासन ने हेल्पडेस्क भी स्थापित की है।

सुरक्षा व्यवस्था और प्रशासनिक खामियों पर उठे सवाल

इस हादसे के बाद ओडिशा सरकार और पुरी मंदिर प्रशासन की सुरक्षा तैयारियों पर गंभीर सवाल खड़े होने लगे हैं。 हालांकि सरकार ने रथयात्रा के सुचारू संचालन और भारी बारिश व जलभराव की स्थिति से निपटने के लिए पुरी नगर निगम (PMC) के साथ मिलकर 24 घंटे का अलर्ट जारी किया था, लेकिन इतनी बड़ी भीड़ के दबाव को नियंत्रित करने वाले बैरिकेडिंग और क्राउड मैनेजमेंट के उपाय कम पड़ गए। विपक्षी दलों और स्थानीय नागरिकों ने आरोप लगाया है कि मुख्य मार्गों पर भक्तों के प्रवेश और निकास की सही व्यवस्था न होने की वजह से ही यह भयावह स्थिति पैदा हुई।

भारी बारिश के बावजूद जारी रही रथयात्रा

दिल दहला देने वाले इस हादसे के बावजूद, भगवान जगन्नाथ के प्रति भक्तों की आस्था कम नहीं हुई। पुरी में लगातार हो रही तेज बारिश और उमस के बीच भी लाखों श्रद्धालु सड़कों पर डटे रहे और भगवान के रथों को खींचने की रस्म को आगे बढ़ाया। मुख्यमंत्री मोहन माझी और प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं। अधिकारियों का कहना है कि अब स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में है और सुरक्षा बलों की अतिरिक्त टुकड़ियों को बड़ा डांडा के संवेदनशील पॉइंट्स पर तैनात कर दिया गया है ताकि आगे ऐसी कोई अप्रिय घटना दोबारा न हो।

 

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