रायपुर में राज्य स्तरीय कार्यशाला ‘स्ट्रेंथनिंग डिजिटल जस्टिस’ का आयोजन

रायपुर। देश में लागू नए आपराधिक कानूनों के साथ न्याय व्यवस्था एक नए दौर में प्रवेश कर चुकी है। इन कानूनों का उद्देश्य केवल अपराधियों को दंडित करना नहीं, बल्कि आम नागरिक को समयबद्ध, पारदर्शी और सुलभ न्याय उपलब्ध कराना है। आधुनिक तकनीक, डिजिटल प्रणाली और वैज्ञानिक साक्ष्यों के उपयोग से न्यायिक प्रक्रिया को अधिक प्रभावी और जवाबदेह बनाया जा रहा है।

यह बात मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने रविवार को रायपुर में आयोजित राज्य स्तरीय कार्यशाला ‘स्ट्रेंथनिंग डिजिटल जस्टिस’ को संबोधित करते हुए कही।

150 वर्ष पुराने कानूनों की जगह नई व्यवस्था

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में लागू भारतीय न्याय संहिता, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता और भारतीय साक्ष्य अधिनियम ने औपनिवेशिक दौर के लगभग 150 वर्ष पुराने कानूनों का स्थान लिया है। इनका मूल उद्देश्य ऐसी न्याय व्यवस्था स्थापित करना है, जिसमें पीड़ितों को शीघ्र न्याय मिले और अपराधी कानून से बच न सकें।

उन्होंने कहा कि पुराने कानून उस समय बनाए गए थे, जब डिजिटल तकनीक, सीसीटीवी, इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड और आधुनिक फोरेंसिक विज्ञान का अस्तित्व नहीं था। बदलते समय में अपराधों की प्रकृति भी बदल चुकी है, इसलिए नई व्यवस्था में डिजिटल साक्ष्यों और वैज्ञानिक जांच को कानूनी मान्यता दी गई है।

फोरेंसिक और डिजिटल साक्ष्य को मिलेगा बढ़ावा

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में नेशनल फोरेंसिक साइंस यूनिवर्सिटी की शाखा स्थापित होने से अपराध जांच और न्यायिक प्रक्रिया को नई दिशा मिलेगी। ई-साक्ष्य जैसी प्रणालियां इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों के सुरक्षित संरक्षण और प्रमाणीकरण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।

उन्होंने बताया कि अब ई-समन के जरिए संबंधित व्यक्ति तक सूचना तुरंत पहुंचाई जा सकती है। वहीं न्याय श्रुति जैसी व्यवस्था अदालतों की कार्यवाही का सुरक्षित डिजिटल रिकॉर्ड तैयार करने के साथ ऑनलाइन और हाइब्रिड सुनवाई को भी अधिक प्रभावी बना रही है।

ऑनलाइन एफआईआर और डिजिटल पुलिसिंग

मुख्यमंत्री ने बताया कि देशभर के थाने क्राइम एंड क्रिमिनल ट्रैकिंग नेटवर्क एंड सिस्टम (CCTNS) से जुड़े हैं, जिससे अपराधियों का रिकॉर्ड तुरंत उपलब्ध हो जाता है और पुलिस कार्रवाई में तेजी आती है।

उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ के सभी थाने ऑनलाइन मोड में कार्य कर रहे हैं। राज्य में अब तक 1,97,547 ऑनलाइन एफआईआर दर्ज की जा चुकी हैं तथा नागरिकों को डिजिटल हस्ताक्षरयुक्त एफआईआर की प्रतियां भी इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से उपलब्ध कराई जा रही हैं।

ICJS से बढ़ा संस्थाओं के बीच समन्वय

मुख्यमंत्री ने कहा कि इंटर-ऑपरेबल क्रिमिनल जस्टिस सिस्टम (ICJS) के माध्यम से न्यायालय, पुलिस, अभियोजन, जेल और अन्य संबंधित संस्थाओं के बीच सुरक्षित डिजिटल समन्वय स्थापित हुआ है। इससे सूचनाओं का आदान-प्रदान तेज हुआ है और न्यायिक प्रक्रिया में अनावश्यक विलंब कम हुआ है।

उन्होंने बताया कि साइबर अपराधों से निपटने के लिए राज्य में नौ नए साइबर थाने स्थापित किए गए हैं और व्यापक जनजागरूकता अभियान भी चलाए जा रहे हैं। साथ ही न्याय प्रणाली से जुड़े अधिकारियों और कर्मचारियों के नियमित प्रशिक्षण एवं क्षमता विकास पर सरकार विशेष ध्यान दे रही है।

मुख्य न्यायाधीश ने तकनीक आधारित न्याय व्यवस्था पर दिया जोर

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति रमेश सिन्हा ने कहा कि नए आपराधिक कानूनों का प्रभावी क्रियान्वयन राज्य की न्याय व्यवस्था को अधिक पारदर्शी, वैज्ञानिक और तकनीक आधारित बनाएगा।

उन्होंने कहा कि ई-साक्ष्य, ई-चालान, न्याय श्रुति और डिजिटल फोरेंसिक जैसे प्लेटफॉर्म इन कानूनों की भावना को साकार करने के महत्वपूर्ण माध्यम हैं। उनके अनुसार न्याय की प्रक्रिया घटनास्थल से ही शुरू होती है और यदि प्रारंभिक जांच वैज्ञानिक, निष्पक्ष एवं पारदर्शी हो तो पूरी न्यायिक प्रक्रिया अधिक मजबूत बनती है।

मुख्य न्यायाधीश ने बताया कि जून माह में जिला न्यायालयों में लगभग 9,910 तथा हाईकोर्ट में 58 मामलों की सुनवाई वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से हुई। उन्होंने न्यायिक प्रक्रिया में डिजिटल प्लेटफॉर्म के व्यापक उपयोग का आह्वान किया।

‘वन डेटा, वन एंट्री’ पर जोर

उपमुख्यमंत्री एवं गृह मंत्री विजय शर्मा ने कहा कि यह कार्यशाला न्याय व्यवस्था के इतिहास में मील का पत्थर साबित होगी। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री की समीक्षा के बाद इंटर-ऑपरेबल क्रिमिनल जस्टिस सिस्टम के तेजी से क्रियान्वयन के निर्देश दिए गए हैं।

उन्होंने कहा कि सरकार ‘वन डेटा, वन एंट्री’ की अवधारणा पर काम कर रही है। मैनुअल एफआईआर की प्रक्रिया समाप्त करने तथा ई-फोरेंसिक, ई-एविडेंस, न्याय श्रुति, CCTNS, NAFIS, CRPI एप्लीकेशन और डीएनए सैंपलिंग जैसी आधुनिक प्रणालियों के अधिकतम उपयोग पर जोर दिया जा रहा है।

कार्यक्रम में विधि एवं विधायी कार्य मंत्री गजेंद्र यादव, हाईकोर्ट के न्यायाधीश, वरिष्ठ न्यायाधीश, प्रमुख सचिव (गृह) निहारिका बारिक सिंह, प्रमुख सचिव (विधि) सुषमा सावंत, पुलिस महानिदेशक अरुण देव गौतम, विभिन्न जिलों के न्यायाधीश, पुलिस एवं अभियोजन अधिकारी, एफएसएल विशेषज्ञ, चिकित्सा महाविद्यालयों के चिकित्सक और अन्य विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे।

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