निजी अस्पताल में 3 लाख तक का खर्च बताया गया, आयुष्मान भारत योजना के तहत सीआईएमएस में हुआ निःशुल्क जटिल ऑपरेशन
बिलासपुर, 7 अगस्त।
छत्तीसगढ़ आयुर्विज्ञान संस्थान (CIMS) के प्रसूति एवं स्त्री रोग विभाग ने एक अत्यंत जटिल कैंसर सर्जरी सफलतापूर्वक कर 78 वर्षीय महिला को नया जीवन दिया है। दर्रीघाट निवासी बुजुर्ग महिला पिछले पांच-छह महीनों से पेट के निचले हिस्से में लगातार दर्द और तेजी से बढ़ रही बड़ी गांठ से परेशान थीं। निजी अस्पताल में इलाज और ऑपरेशन का खर्च दो से तीन लाख रुपये बताया गया था, लेकिन आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण परिवार चिंतित था। बाद में CIMS पहुंचने पर आयुष्मान भारत योजना के तहत उनका पूरा इलाज और ऑपरेशन निःशुल्क किया गया।
जांच में सामने आया एक किलो का कैंसरग्रस्त ट्यूमर
विशेषज्ञ चिकित्सकों की जांच में पता चला कि रजोनिवृत्ति (पोस्ट-मेनोपॉज़) के बाद महिला की बाईं ओवरी में लगभग 15×12×10 सेंटीमीटर आकार का कैंसरग्रस्त ट्यूमर विकसित हो गया था, जिसका वजन करीब एक किलोग्राम था। ट्यूमर का आकार इतना बड़ा था कि वह शरीर के अन्य महत्वपूर्ण अंगों पर दबाव बना रहा था। रेडियोलॉजी विभाग की विभागाध्यक्ष डॉ. अर्चना सिंह द्वारा की गई सोनोग्राफी में इसकी पुष्टि हुई, जिसके बाद चिकित्सकों ने इसे अत्यंत जोखिमपूर्ण सर्जरी माना।
कई विभागों की टीम ने मिलकर की चुनौतीपूर्ण सर्जरी
विशेषज्ञ चिकित्सकों की बहु-विषयक टीम ने 3 अगस्त 2026 को जटिल कैंसर सर्जरी को सफलतापूर्वक अंजाम दिया। ऑपरेशन के दौरान कैंसर स्टेजिंग सर्जरी, ट्यूमर डिबल्किंग (ट्यूमर का भार कम करना), गर्भाशय और दोनों ओवरी को निकालना, बाईं यूरेटर की मरम्मत तथा उसमें डबल-जे (डीजे) स्टेंट प्रत्यारोपित किया गया।
इस सफल ऑपरेशन में स्त्री एवं प्रसूति रोग विभाग की विभागाध्यक्ष डॉ. संगीता रमण जोगी के नेतृत्व में डॉ. दीपिका, डॉ. सौम्या और डॉ. वर्षा की अहम भूमिका रही। सामान्य शल्य चिकित्सा विभाग से डॉ. रघुराज सिंह, डॉ. बी.डी. तिवारी और डॉ. गरिमा ने सहयोग दिया। वहीं एनेस्थीसिया विभाग के डॉ. मधुमिता मूर्ति, डॉ. बी. रायजादा, डॉ. एस. कुजूर और डॉ. एम. देववर्मा ने ऑपरेशन को सुरक्षित और सफल बनाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया।
ऐसे मामलों में रहता है गंभीर जोखिम
CIMS के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. लखन सिंह ने बताया कि इतने बड़े ओवरी ट्यूमर की सर्जरी में अत्यधिक रक्तस्राव होने और यूरेटर, मूत्राशय तथा आंत जैसे महत्वपूर्ण अंगों को नुकसान पहुंचने का खतरा बना रहता है। ऐसे ऑपरेशन के लिए उच्च स्तर की सर्जिकल विशेषज्ञता, सटीक एनेस्थीसिया प्रबंधन और लगातार निगरानी आवश्यक होती है। विशेषज्ञ टीम ने सभी चुनौतियों का सफलतापूर्वक सामना करते हुए ट्यूमर निकालकर मरीज की जान बचाई।
आधुनिक सुविधाओं से संभव हुई सफलता
सी अधिष्ठाता डॉ. रमणेश मूर्ति ने कहा कि रजोनिवृत्ति के बाद इतनी बड़ी ओवरी कैंसर गांठ का मामला अत्यंत दुर्लभ और उच्च जोखिम वाला होता है। ऐसे मामलों में समय पर पहचान, विभिन्न विभागों के विशेषज्ञों के बीच समन्वय और आधुनिक कैंसर सर्जरी मरीज की जान बचाने में निर्णायक भूमिका निभाते हैं। उन्होंने कहा कि CIMS में उपलब्ध आधुनिक चिकित्सा सुविधाओं और विशेषज्ञ डॉक्टरों की बदौलत इस तरह के जटिल ऑपरेशन सफलतापूर्वक किए जा रहे हैं। आयुष्मान भारत योजना के माध्यम से आर्थिक रूप से कमजोर मरीजों को उच्च गुणवत्ता का इलाज निःशुल्क उपलब्ध कराया जा रहा है।
स्वास्थ्य में सुधार, परिजनों ने जताया आभार
ऑपरेशन के बाद महिला की स्थिति संतोषजनक बताई गई है और वह चिकित्सकों की निगरानी में स्वस्थ हो रही हैं। मरीज के परिजनों ने सफल उपचार और आयुष्मान भारत योजना के तहत निःशुल्क इलाज उपलब्ध कराने के लिए CIMS के चिकित्सकों और स्वास्थ्यकर्मियों का आभार व्यक्त किया।













