मुख्यमंत्री साय ने मुक्तिधाम, बालिका शौचालय, जल संरक्षण और ग्रामीण रोजगार से जुड़ी कई बड़ी घोषणाएं कीं

रायपुर, 7 अगस्त। विकसित भारत–रोजगार एवं आजीविका गारंटी मिशन (ग्रामीण) (VB-G RAM-G) के तहत छत्तीसगढ़ में ग्रामीण विकास को नई गति देने के लिए मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कई महत्वपूर्ण घोषणाएं की हैं। उन्होंने बताया कि 15 अगस्त 2026 से 26 जनवरी 2027 तक राज्यभर में ‘मेरी बेटी–मेरा अभिमान’ विशेष अभियान चलाया जाएगा। इसके तहत प्रत्येक गांव में मुक्तिधाम और प्रतीक्षालय का निर्माण तथा ग्रामीण क्षेत्रों के सभी शासकीय स्कूलों में बालिकाओं के लिए शौचालय बनाए जाएंगे। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह अभियान बेटियों के सम्मान, ग्रामीण स्वच्छता, सामाजिक गरिमा और आधारभूत सुविधाओं को मजबूत करने की दिशा में ऐतिहासिक कदम है।

मुख्यमंत्री ने बताया कि अभियान के अंतर्गत ग्रामीण शासकीय स्कूलों में 6,671 बालिका शौचालय बनाए जाएंगे, जिन पर 286.85 करोड़ रुपये खर्च होंगे। प्रत्येक शौचालय की लागत 4.30 लाख रुपये निर्धारित की गई है। इसके अलावा 6,524 गांवों में प्रतीक्षालय सहित मुक्तिधाम के निर्माण पर 391.44 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। वहीं 549 अतिरिक्त मुक्तिधाम 18.22 करोड़ रुपये की लागत से बनाए जाएंगे।

जल संरक्षण को प्राथमिकता देते हुए राज्य के 10,027 बंद पड़े बोरवेल में सैंड फिल्टर और रिचार्ज संरचनाएं विकसित की जाएंगी। इस कार्य पर 52.14 करोड़ रुपये खर्च होंगे। मुख्यमंत्री ने कहा कि इससे भूजल स्तर बढ़ेगा, वर्षा जल का बेहतर संरक्षण होगा और ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल संकट कम करने में मदद मिलेगी। उन्होंने सभी परियोजनाओं को प्राथमिकता के आधार पर तत्काल शुरू करने के निर्देश दिए।

ग्रामीण रोजगार और विकास के लिए सबसे बड़ा निवेश

मुख्यमंत्री ने बताया कि VB-G RAM-G योजना पूरे देश में 1 जुलाई 2026 से लागू हुई है। इसके तहत सभी विकास कार्य ग्रामसभा की स्वीकृति से होंगे और मजदूरी दर बढ़ाकर 300 रुपये प्रतिदिन कर दी गई है। उन्होंने कहा कि चालू वित्तीय वर्ष में मनरेगा और इस योजना के माध्यम से राज्य को लगभग 6,855 करोड़ रुपये मिलेंगे, जो ग्रामीण रोजगार और विकास के लिए अब तक का सबसे बड़ा निवेश होगा। योजना की पहली किस्त के रूप में 1,538 करोड़ रुपये से अधिक की स्वीकृति केंद्र सरकार से मिल चुकी है।

किसानों और श्रमिकों के हितों का संतुलन

मुख्यमंत्री ने बताया कि कृषि कार्यों के दौरान श्रमिकों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए वर्ष में 60 दिनों तक योजना के कार्य स्थगित रखने का प्रावधान किया गया है। इससे खेती और रोजगार दोनों प्रभावित नहीं होंगे।

318 प्रकार के विकास कार्य होंगे

योजना के तहत 318 प्रकार के विकास कार्य शामिल किए गए हैं। इनमें जल संरक्षण, ग्रामीण आधारभूत संरचना, आजीविका संवर्धन तथा जलवायु परिवर्तन एवं आपदा प्रबंधन से जुड़े कार्य प्रमुख हैं। तालाब, चेकडैम, सिंचाई विस्तार, सड़क, पुलिया, पंचायत भवन, आंगनबाड़ी, अतिरिक्त कक्ष, ग्रामीण पुस्तकालय, प्रयोगशाला, किचन शेड, ठोस एवं तरल अपशिष्ट प्रबंधन, मुक्तिधाम और पशु चिकित्सालय जैसी सुविधाओं का निर्माण किया जाएगा।

ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिलेगा नया आधार

मुख्यमंत्री ने कहा कि हाट-बाजार, कृषि उपज भंडारण, कोल्ड स्टोरेज, डेयरी, मत्स्य पालन और पशुपालन से जुड़े बुनियादी ढांचे का विकास किया जाएगा। साथ ही बाढ़ और चक्रवात आश्रय, जल निकासी, तटबंध, वनाग्नि रोकथाम और आपदा के बाद पुनर्निर्माण जैसे कार्यों को भी प्राथमिकता दी जाएगी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि योजना का उद्देश्य केवल रोजगार उपलब्ध कराना नहीं, बल्कि जल संरक्षण, स्वच्छता, शिक्षा, सामाजिक आधारभूत ढांचे और आजीविका को मजबूत कर आत्मनिर्भर एवं विकसित गांवों का निर्माण करना है। सभी कार्य ग्रामसभा की मंजूरी से होंगे और डिजिटल मॉनिटरिंग, समय पर मजदूरी भुगतान, गुणवत्ता नियंत्रण तथा सामाजिक अंकेक्षण के माध्यम से पारदर्शी और समयबद्ध क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जाएगा।

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