केंद्रीय राज्य मंत्री तोखन साहू ने ठेकेदार को ब्लैकलिस्ट करने की चेतावनी दी, विधायक अटल श्रीवास्तव बोले- जल्द सुधार नहीं हुआ तो करेंगे आंदोलन

बिलासपुर। बिलासपुर से गौरेला-पेंड्रा-मरवाही के लिए केंवची तक जाने वाले महत्वपूर्ण नेशनल हाईवे-45 की बदहाल हालत अब बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन गया है। करीब 510 करोड़ रुपये की लागत से बन रही फोरलेन सड़क पहली ही बारिश में जगह-जगह धंसने, उखड़ने और दलदल में बदलने लगी है। सड़क की हालत को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के नेताओं ने एक सुर में नाराजगी जताई है।

गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले के दौरे पर पहुंचे केंद्रीय नगरीय प्रशासन एवं आवासन राज्य मंत्री तोखन साहू ने सड़क की स्थिति पर चिंता जताते हुए कहा कि मामला उनके संज्ञान में है। उन्होंने अधिकारियों से इस संबंध में बात भी की है। मंत्री नेचेतावनी दी कि यदि सड़क को जल्द चलने लायक नहीं बनाया गया और स्थिति में सुधार नहीं हुआ तो संबंधित ठेकेदार को ब्लैकलिस्ट करने की कार्रवाई की जाएगी।

वहीं, इस क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करने वाले कोटा विधायक अटल श्रीवास्तव ने भी सड़क की खराब हालत को लेकर आंदोलन की चेतावनी दी है। उन्होंने कहा कि सड़क जनता के आवागमन के लिए बनाई जा रही है। ठेका किसी को भी मिला हो, उसकी गुणवत्ता और जनता की सुविधा से समझौता नहीं किया जा सकता। यदि जल्द सुधार नहीं हुआ तो कांग्रेस सड़क पर उतरकर आंदोलन करेगी।

ठेका पूर्व मंत्री के परिवार से जुड़ा

इस सड़क के निर्माण का ठेका कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री जयसिंह अग्रवाल के परिवार से जुड़ी कंपनी को मिलने की जानकारी सामने आई है। यही वजह है कि सड़क की खराब गुणवत्ता को लेकर राजनीतिक बयानबाजी के बीच यह मामला और अधिक चर्चा में आ गया है। हालांकि, सड़क निर्माण की गुणवत्ता और तकनीकी खामियों की वास्तविक जिम्मेदारी जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।

30 से 40 किलोमीटर हिस्सा प्रभावित

रतनपुर-केंदा-केंवची मार्ग के निर्माणाधीन हिस्से में करीब 30 से 40 किलोमीटर तक सड़क की हालत खराब है। लालपुर से मझवानी और केंदा तक कई स्थानों पर सड़क धंस गई है। कहीं डामर की परत उखड़ गई है तो कहीं सड़क पर लंबी दरारें दिखाई दे रही हैं। कुछ स्थानों पर दरारों की लंबाई पांच से दस फीट तक है।

भारी बारिश के बाद सड़क के कई हिस्से कीचड़ और बड़े-बड़े गड्ढों में तब्दील हो गए हैं। भारी और ओवरलोडेड कोयला वाहनों के लगातार आवागमन से स्थिति और गंभीर हो गई है। कई जगह वाहन फंसने के कारण घंटों जाम लग रहा है।

डायवर्सन ने बढ़ाई परेशानी

केंदा घाट, टिंगीपुर और बांसाझाल के आसपास हालात ज्यादा खराब बताए जा रहे हैं। निर्माणाधीन पुल-पुलियों के कारण वाहनों को वैकल्पिक रास्तों से निकाला जा रहा है। बारिश के बाद यही डायवर्सन रास्ते कई जगह दलदल में बदल गए हैं।

2 अगस्त को भारी बारिश के बीच बांसाझाल का करीब 35 साल पुराना पुल क्षतिग्रस्त होकर दो हिस्सों में टूट गया था। इस दौरान एक यात्री बस भी पुल पर फंस गई थी। पुल क्षतिग्रस्त होने के बाद बनाए गए वैकल्पिक मार्ग पर बारिश का पानी भरने से अब वाहन लगातार फंस रहे हैं।

स्थिति यह है कि कई स्थानों पर दो से तीन किलोमीटर तक वाहनों की कतार लग रही है। स्थानीय लोगों के अनुसार जिस सफर को सामान्य दिनों में ढाई तीन घंटे में पूरा किया जाता था, उसे अब छह से आठ घंटे तक लग रहे हैं।

ग्रामीणों में भारी आक्रोश

सड़क की स्थिति को लेकर स्थानीय ग्रामीणों और रोजाना इस मार्ग से गुजरने वाले यात्रियों में भारी नाराजगी है। उनका कहना है कि निर्माणाधीन सड़क की गुणवत्ता पर शुरुआत से ही सवाल उठते रहे हैं, लेकिन समय रहते सुधार नहीं किया गया। अब बारिश ने सड़क निर्माण की कथित खामियों को सामने ला दिया है।

ग्रामीणों का आरोप है कि सड़क के बेस में पर्याप्त मजबूती नहीं दी गई। मिट्टी और मुरूम का इस्तेमाल मानकों के अनुरूप नहीं किया गया और पर्याप्त संघनन किए बिना ही सड़क निर्माण आगे बढ़ाया गया। बारिश का पानी सड़क की नींव तक पहुंचने के बाद भारी वाहनों के दबाव से कई हिस्से बैठ गए।

जून में निरीक्षण के बाद भी नहीं सुधरी स्थिति

महत्वपूर्ण बात यह है कि 17 जून 2026 को लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों ने सड़क का निरीक्षण किया था। निरीक्षण के दौरान कई स्थानों पर निर्माण की गुणवत्ता में कमी पाए जाने की बात सामने आई थी। अधिकारियों ने ठेकेदार को कमियां दूर करने के निर्देश भी दिए थे।

इसके बावजूद यदि बारिश के बाद सड़क की यही स्थिति बनी है तो इससे निगरानी और गुणवत्ता नियंत्रण की व्यवस्था पर भी सवाल उठ रहे हैं। अब केंद्रीय मंत्री द्वारा अधिकारियों को ठेकेदार के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की चेतावनी दिए जाने के बाद इस मामले में जिम्मेदारी तय करने की मांग तेज हो गई है।

आखिर सड़क क्यों धंस रही है?

सड़क निर्माण में सामान्य तौर पर सबसे पहले सब-ग्रेड यानी मिट्टी की नींव तैयार की जाती है। इसे पर्याप्त रूप से दबाकर मजबूत किया जाता है। इसके ऊपर निर्धारित गुणवत्ता और अनुपात के अनुसार ग्रेनुलर सब-बेस (जीएसबी) की परत बिछाई जाती है। इसके बाद वेट मिक्स मैकेडम जैसी मजबूत परतें तैयार की जाती हैं।

हर परत का उचित संघनन भी जरूरी होता है। इसके लिए भारी वाइब्रेटरी रोलर का इस्तेमाल किया जाता है। साथ ही सड़क के दोनों तरफ पानी की निकासी के लिए पर्याप्त ड्रेनेज व्यवस्था जरूरी होती है।

तकनीकी तौर पर यदि सड़क के बेस में मिट्टी या मुरूम की मात्रा अधिक हो, गिट्टी और अन्य निर्धारित सामग्री पर्याप्त न हो तथा पानी की निकासी सही तरीके से न हो तो बारिश के दौरान बेस कमजोर पड़ सकता है। ऐसे में भारी वाहनों के दबाव से सड़क धंसने लगती है। एनएच-45 के इस हिस्से में भी इसी तरह की तकनीकी खामियों के आरोप लगाए जा रहे हैं।

बिलासपुर से अमरकंटक-जबलपुर तक महत्वपूर्ण संपर्क मार्ग

रतनपुर-केंदा-केंवची मार्ग केवल स्थानीय आवागमन के लिए ही महत्वपूर्ण नहीं है। यह बिलासपुर को गौरेला-पेंड्रा-मरवाही, अमरकंटक और मध्य प्रदेश की ओर जाने वाले महत्वपूर्ण मार्गों से जोड़ता है। आगे यह मार्ग जबलपुर और उत्तर भारत की ओर जाने वाले यात्रियों के लिए भी महत्वपूर्ण संपर्क उपलब्ध कराता है।

इस सड़क पर बड़ी संख्या में यात्री वाहनों के अलावा मालवाहक और कोयला परिवहन से जुड़े भारी वाहन भी चलते हैं। इसलिए सड़क की खराब स्थिति का असर केवल स्थानीय ग्रामीणों पर नहीं, बल्कि बिलासपुर और जीपीएम क्षेत्र के व्यापक परिवहन तंत्र पर पड़ रहा है।

मंत्री और विधायक की चेतावनी से बढ़ा दबाव

सड़क की खराब स्थिति को लेकर अब राजनीतिक स्तर पर भी दबाव बढ़ गया है। केंद्रीय राज्य मंत्री तोखन साहू ने अधिकारियों से तत्काल हस्तक्षेप करने और सुधार नहीं होने पर ठेकेदार को ब्लैकलिस्ट करने की बात कही है। दूसरी ओर कोटा विधायक अटल श्रीवास्तव ने सड़क की गुणवत्ता में जल्द सुधार नहीं होने पर आंदोलन की चेतावनी दी है।

ऐसे में अब निगाहें प्रशासन और निर्माण एजेंसी की अगली कार्रवाई पर हैं। सवाल यह है कि करोड़ों रुपये की लागत से बनाई जा रही सड़क पहली ही बारिश में यदि इस हालत में पहुंच गई है तो इसकी गुणवत्ता की जिम्मेदारी किसकी तय होगी और यात्रियों को सुरक्षित आवागमन कब तक मिल पाएगा।

कलेक्टर ने भी अधिकारियों को दिए निर्देश

बिलासपुर कलेक्टर संजय अग्रवाल के अनुसार रतनपुर-केंदा मार्ग की खराब स्थिति की जानकारी प्रशासन को मिली है। उन्होंने टीएल बैठक में अधिकारियों को सड़क निर्माण पर लगातार नजर रखने और इसे जल्द से जल्द चलने योग्य बनाने के निर्देश दिए हैं, ताकि लोगों को सुगम यातायात मिल सके।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here