जाति विवाद में सेवा से हटाए गए सहायक शिक्षक मंगल साय सिंह भारिया को राहत; 2015 में जाति छानबीन समिति ने माना था उन्हें अनुसूचित जनजाति वर्ग का
बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने करीब 27 साल पहले जाति विवाद के चलते सेवा से बर्खास्त किए गए कोरबा जिले के सहायक शिक्षक मंगल साय सिंह भारिया के मामले में कलेक्टर को उनके लंबित अभ्यावेदन पर 30 दिन के भीतर कानून के अनुसार निर्णय लेने का निर्देश दिया है।
जस्टिस बिभु दत्ता गुरु ने स्पष्ट किया कि निर्णय लेते समय हाईकोर्ट के 20 अप्रैल 2010 के आदेश और राज्य स्तरीय जाति छानबीन समिति के 8 अक्टूबर 2015 के निष्कर्ष को ध्यान में रखा जाए।
1988 में हुई थी नियुक्ति, 1999 में बर्खास्तगी
मामले के अनुसार, मंगल साय सिंह की 9 सितंबर 1988 को सहायक शिक्षक के पद पर नियुक्ति हुई थी। बाद में उनकी जाति को लेकर विवाद खड़ा हुआ। विभाग का आरोप था कि उनकी जाति ‘भारिया (कोष्ठा)’ है, जो अन्य पिछड़ा वर्ग में आती है। इसी आधार पर उन्हें 7 अप्रैल 1999 को सेवा से बर्खास्त कर दिया गया।
बर्खास्तगी के खिलाफ उन्होंने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। अदालत ने 20 अप्रैल 2010 को बर्खास्तगी आदेश निरस्त करते हुए उनकी जाति की जांच राज्य स्तरीय जाति छानबीन समिति से कराने का निर्देश दिया।
2015 में समिति ने माना- ‘भारिया’ अनुसूचित जनजाति
हाईकोर्ट के निर्देश के बाद जाति छानबीन समिति ने मामले की जांच की। समिति ने 8 अक्टूबर 2015 के आदेश में मंगल साय सिंह की जाति ‘भारिया’ मानते हुए उसे अनुसूचित जनजाति वर्ग में शामिल माना।
इसके बावजूद उनकी सेवा में बहाली और उससे जुड़े सेवा लाभों को लेकर कोई अंतिम कार्रवाई नहीं हुई। मंगल साय सिंह ने इस संबंध में समय-समय पर अभ्यावेदन दिए। हाल ही में उन्होंने 10 अगस्त 2026 को कलेक्टर, कोरबा के समक्ष फिर अभ्यावेदन देकर सेवा में पुनर्नियुक्ति और परिणामी सेवा लाभ देने की मांग की।
सरकार ने कहा- अभ्यावेदन लंबित है तो होगा निराकरण
सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से शासकीय अधिवक्ता विवेक वर्मा ने निर्देश के आधार पर कहा कि यदि 10 अगस्त 2026 का अभ्यावेदन कलेक्टर के समक्ष लंबित है, तो उसका निर्धारित अवधि में कानून के अनुसार निराकरण किया जाएगा।
दोनों पक्षों को सुनने के बाद हाईकोर्ट ने याचिका का अंतिम निस्तारण कर दिया। अदालत ने कलेक्टर को निर्देश दिया कि अभ्यावेदन पर फैसला लेते समय हाईकोर्ट के 2010 के आदेश और जाति छानबीन समिति के 2015 के आदेश को ध्यान में रखा जाए।
हाईकोर्ट ने सीधे बहाली का आदेश नहीं दिया
हालांकि, हाईकोर्ट ने इस स्तर पर मंगल साय सिंह को सीधे सेवा में बहाल करने या बकाया सेवा लाभ देने का आदेश नहीं दिया है। अदालत ने केवल सक्षम प्राधिकारी को उनके अभ्यावेदन पर 30 दिन के भीतर कानून के अनुसार निर्णय लेने का निर्देश दिया है














