34 कॉलेजों में करीब 500 छात्रों ने दी थी परीक्षा, विश्वविद्यालय ने पुलिस में शिकायत की; NSUI और ABVP ने की कड़ी कार्रवाई की मांग

बिलासपुर। छत्तीसगढ़ के इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय में बीएससी कृषि द्वितीय वर्ष, द्वितीय सेमेस्टर की एंटोमोलॉजी परीक्षा को आयोजित होने के कुछ घंटे बाद रद्द कर दिया गया। परीक्षा के दौरान इस्तेमाल प्रश्नपत्र से करीब 70 प्रतिशत तक मिलती-जुलती सामग्री वाला एक दस्तावेज WhatsApp पर प्रसारित होने के बाद पेपर लीक के आरोप सामने आए। हालांकि विश्वविद्यालय ने अभी यह पुष्टि नहीं की है कि वास्तविक प्रश्नपत्र परीक्षा से पहले लीक हुआ था या नहीं। मामले की जांच के लिए पुलिस में शिकायत की जा रही है।

विश्वविद्यालय के अंतर्गत छत्तीसगढ़ के 34 कॉलेजों में गुरुवार को सुबह 10 से दोपहर 1 बजे तक AENT 221 – Pest Management in Crops and Stored Grains-I (Rabi Crops) की परीक्षा आयोजित की गई थी। इसमें करीब 500 बीएससी कृषि छात्रों के शामिल होने की जानकारी है।

WhatsApp पर वायरल दस्तावेज से उठा विवाद

विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार डॉ. कपिल देव दीपक के अनुसार परीक्षा केंद्रों पर प्रश्नपत्र करीब 9.30 बजे खोला जाता है और 10 बजे परीक्षा शुरू होती है। इसी बीच WhatsApp पर एक दस्तावेज प्रसारित हुआ, जो आधिकारिक प्रश्नपत्र नहीं था, लेकिन उसमें मौजूद करीब 70 प्रतिशत सामग्री वास्तविक प्रश्नपत्र से मेल खाती पाई गई।

मामला सामने आने के बाद विश्वविद्यालय ने इसे गंभीरता से लिया। पांच सदस्यीय समिति ने पूरे घटनाक्रम की समीक्षा की और शाम को परीक्षा रद्द करने का निर्णय लिया। विश्वविद्यालय अब यह पता लगाने की कोशिश कर रहा है कि संबंधित सामग्री परीक्षा शुरू होने से पहले कहीं से लीक हुई थी या नहीं।

रजिस्ट्रार ने बताया कि मामले में तेलीबांधा थाने में शिकायत दर्ज कराने की प्रक्रिया चल रही है। पुलिस जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि प्रश्नपत्र वास्तव में लीक हुआ था या किसी ने पहले से अनुमान के आधार पर ऐसा दस्तावेज तैयार किया था।

NSUI और ABVP ने किया प्रदर्शन

घटना की जानकारी मिलने के बाद कांग्रेस के छात्र संगठन NSUI के कार्यकर्ता गुरुवार दोपहर विश्वविद्यालय परिसर पहुंचे और प्रदर्शन किया। वहीं अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) ने भी विरोध जताते हुए विश्वविद्यालय को शिकायत सौंपी। दोनों संगठनों ने परीक्षा रद्द करने के साथ पूरे मामले की निष्पक्ष जांच और दोषियों पर कार्रवाई की मांग की।

छत्तीसगढ़ कांग्रेस की मुख्य प्रवक्ता वंदना राजपूत ने घटना को लेकर राज्य सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि यदि परीक्षा से पहले प्रश्नपत्र बाहर पहुंचा है तो यह केवल परीक्षा व्यवस्था की चूक नहीं, बल्कि मेहनत करने वाले हजारों विद्यार्थियों के साथ अन्याय है। उन्होंने मामले की उच्चस्तरीय जांच कर जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की।

सितंबर के पहले सप्ताह में होगी दोबारा परीक्षा

विश्वविद्यालय के निदेशक निर्देश/परीक्षा नियंत्रक की ओर से जारी सूचना में कहा गया है कि 20 अगस्त 2026 को आयोजित AENT 221 की परीक्षा प्रशासनिक कारणों से निरस्त की गई है। अब यह परीक्षा सितंबर के पहले सप्ताह में दोबारा आयोजित की जाएगी।

विश्वविद्यालय ने फिलहाल इसे आधिकारिक तौर पर ‘पेपर लीक’ नहीं माना है। पुलिस जांच से यह तय होगा कि WhatsApp पर प्रसारित दस्तावेज वास्तविक प्रश्नपत्र के स्रोत से जुड़ा था या नहीं।

पहले भी सामने आ चुका है पेपर लीक का मामला

छत्तीसगढ़ में इस साल बोर्ड परीक्षा के दौरान भी WhatsApp के जरिए प्रश्नपत्र प्रसारित होने का मामला सामने आया था। छत्तीसगढ़ माध्यमिक शिक्षा मंडल ने 14 मार्च को आयोजित कक्षा 12वीं हिंदी की परीक्षा को रद्द कर दिया था। उस मामले में पेपर लीक की पुष्टि होने के बाद एफआईआर भी दर्ज की गई थी।

वहीं, भर्ती परीक्षा में कथित भ्रष्टाचार से जुड़े एक मामले में छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने इसी महीने पेपर लीक को बेहद गंभीर अपराध बताते हुए कहा था कि इसका असर केवल अभ्यर्थियों तक सीमित नहीं रहता, बल्कि पूरे समाज पर पड़ता है। अदालत ने 2021 की CGPSC राज्य सेवा परीक्षा में कथित भ्रष्टाचार के मामले में गिरफ्तार सेवानिवृत्त IAS अधिकारी की जमानत याचिका खारिज कर दी थी।

कृषि विश्वविद्यालय की ताजा घटना ने एक बार फिर परीक्षा प्रश्नपत्रों की गोपनीयता और परीक्षा व्यवस्था की सुरक्षा पर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब सभी की नजर पुलिस जांच पर है, जिससे यह स्पष्ट होगा कि WhatsApp पर प्रसारित प्रश्नपत्र से मिलता-जुलता दस्तावेज महज संयोग था या परीक्षा से पहले प्रश्नपत्र की गोपनीय सामग्री वास्तव में बाहर पहुंची थी।

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