सीएम साय बोले- क्रिटिकल मिनरल्स से निवेश, उद्योग और रोजगार को मिलेगा बड़ा विस्तार; राज्य में 65 खनिज ब्लॉकों की हो चुकी नीलामी
रायपुर। छत्तीसगढ़ अब अपनी खनिज संपदा को केवल खनन तक सीमित नहीं रखना चाहता, बल्कि इसके जरिए राज्य में पूरी मिनरल वैल्यू चेन विकसित करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि सरकार का लक्ष्य खनिजों की खोज और उत्खनन से लेकर प्रसंस्करण, वैल्यू एडिशन, उन्नत विनिर्माण और रिसाइक्लिंग तक की पूरी व्यवस्था राज्य में तैयार करना है। इससे निवेश बढ़ेगा, नए उद्योग स्थापित होंगे और युवाओं के लिए बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर पैदा होंगे।
मुख्यमंत्री ने यह बात नवा रायपुर के मेफेयर लेक रिजॉर्ट में केंद्रीय खान मंत्रालय द्वारा आयोजित क्रिटिकल एवं स्ट्रैटेजिक मिनरल ब्लॉक्स की आठवें चरण की नीलामी के रोड शो को संबोधित करते हुए कही।
रक्षा से AI और इलेक्ट्रिक मोबिलिटी तक महत्वपूर्ण भूमिका
सीएम साय ने कहा कि क्रिटिकल और स्ट्रैटेजिक मिनरल्स आने वाले समय में देश की आर्थिक प्रगति, तकनीकी आत्मनिर्भरता और रणनीतिक सुरक्षा के प्रमुख आधार होंगे। लिथियम, ग्रेफाइट, रेयर अर्थ एलिमेंट्स, वैनेडियम, निकेल और क्रोमियम जैसे खनिज रक्षा उपकरणों, सेमीकंडक्टर, बैटरी, स्वच्छ ऊर्जा, इलेक्ट्रिक वाहनों, इलेक्ट्रॉनिक्स, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और आधुनिक विनिर्माण के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं।
उन्होंने कहा कि दुनिया के प्रमुख देश अपने रणनीतिक संसाधनों और सप्लाई चेन को सुरक्षित करने में जुटे हैं। ऐसे में क्रिटिकल मिनरल्स के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता भारत की आर्थिक मजबूती के साथ राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए भी जरूरी है।
छत्तीसगढ़ में क्रिटिकल मिनरल्स का बड़ा भंडार
मुख्यमंत्री ने बताया कि छत्तीसगढ़ में क्रिटिकल मिनरल्स की व्यापक संभावनाएं मौजूद हैं। कटघोरा और बस्तर में लिथियम और रेयर अर्थ एलिमेंट्स, बलरामपुर में ग्रेफाइट, वैनेडियम और गैलियम, बालोद में फॉस्फोराइट तथा महासमुंद में निकेल, क्रोमियम और ग्लॉकोनाइट की संभावनाएं सामने आई हैं।
आठवें चरण की नीलामी में सात राज्यों के 20 खनिज ब्लॉक शामिल हैं, जिनमें पांच ब्लॉक छत्तीसगढ़ के हैं। मुख्यमंत्री ने निवेशकों से इन ब्लॉकों की नीलामी में सक्रिय भागीदारी की अपील की।
उन्होंने कहा कि यह सिर्फ खनिज ब्लॉक हासिल करने का अवसर नहीं है, बल्कि खोज, प्रसंस्करण, वैल्यू एडिशन, तकनीकी नवाचार और नए उद्योगों के जरिए छत्तीसगढ़ और देश की अर्थव्यवस्था को नई दिशा देने का मौका है।
खनिज राज्य में ही बने तैयार उत्पाद
सीएम साय ने कहा कि सरकार चाहती है कि खनिजों को निकालकर सीधे बाहर भेजने के बजाय उनका प्रसंस्करण और मूल्य संवर्धन छत्तीसगढ़ में हो। इससे स्थानीय स्तर पर उद्योगों का विस्तार होगा और प्राकृतिक संसाधनों का अधिकतम आर्थिक लाभ राज्य और यहां के लोगों को मिलेगा।
नवा रायपुर में एआई आधारित डेटा सेंटर पार्क और इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर विकसित किए जा रहे हैं। राजनांदगांव में भी इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर पर काम चल रहा है। इन आधुनिक उद्योगों के लिए क्रिटिकल मिनरल्स की जरूरत होगी। ऐसे में राज्य में उपलब्ध खनिज संसाधन छत्तीसगढ़ को प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त दे सकते हैं।
निवेशकों के लिए नई औद्योगिक नीति में कई सुविधाएं
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में नई औद्योगिक नीति के जरिए नई पीढ़ी के उद्योगों को आकर्षित करने के लिए कई प्रोत्साहन दिए जा रहे हैं। कैपिटल इन्वेस्टमेंट सहायता, स्टांप ड्यूटी और बिजली शुल्क में छूट, ब्याज सब्सिडी तथा रोजगार आधारित प्रोत्साहन जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं।
‘वन-क्लिक सिंगल विंडो सिस्टम 2.0’ के जरिए विभिन्न अनुमतियों और एनओसी की प्रक्रिया को आसान बनाया गया है। कम और मध्यम जोखिम वाले उद्योगों के लिए भी प्रक्रियाओं को सरल किया गया है।
खनिज राजस्व 400 करोड़ से बढ़कर 16 हजार करोड़ पार
सीएम साय ने बताया कि राज्य गठन के समय छत्तीसगढ़ को खनिजों से करीब 400 करोड़ रुपये का राजस्व मिलता था। ढाई साल पहले यह लगभग 12 हजार करोड़ रुपये था, जो अब बढ़कर 16 हजार करोड़ रुपये से अधिक हो गया है।
खनिजों से मिलने वाले राजस्व का उपयोग राज्य के विकास और जनकल्याण में किया जा रहा है। जिला खनिज न्यास (DMF) के माध्यम से खनन प्रभावित क्षेत्रों में शिक्षा, स्वास्थ्य, पेयजल और अन्य बुनियादी सुविधाओं के साथ स्थानीय समुदायों के सामाजिक-आर्थिक विकास पर भी काम किया जा रहा है।
केंद्र ने कहा- खनन के साथ पर्यावरण और स्थानीय हित भी जरूरी
केंद्रीय कोयला एवं खान राज्य मंत्री सतीश चंद्र दुबे ने कहा कि क्रिटिकल और स्ट्रैटेजिक मिनरल्स में आत्मनिर्भरता भारत की आर्थिक और रणनीतिक ताकत के लिए जरूरी है। उन्होंने निवेशकों, युवाओं और स्टार्टअप्स से इस क्षेत्र में उपलब्ध अवसरों का लाभ उठाने का आह्वान किया।
उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार का उद्देश्य केवल खनिज निकालना नहीं, बल्कि सतत और जिम्मेदार खनन, पर्यावरण संरक्षण तथा स्थानीय समुदायों के हितों को प्राथमिकता देना है।
केंद्रीय राज्य मंत्री तोखन साहू ने कहा कि खनिज ब्लॉकों की नीलामी की सफलता केवल ब्लॉक आवंटन से नहीं मापी जानी चाहिए। इसका वास्तविक प्रभाव निवेश, प्रसंस्करण संयंत्रों की स्थापना, तकनीकी विकास, वैल्यू एडिशन और रोजगार के रूप में दिखाई देना चाहिए। उन्होंने खनन क्षेत्रों में आवास, परिवहन, पेयजल, स्वास्थ्य और शिक्षा जैसी सुविधाओं के योजनाबद्ध विकास पर भी जोर दिया।
निवेशकों को हर स्तर पर ‘हैंड होल्डिंग’ सपोर्ट
मुख्य सचिव विकास शील ने बताया कि ईज ऑफ डूइंग बिजनेस के तहत 43 सेवाओं को जोखिम आधारित व्यवस्था में अधिसूचित किया गया है। खनन क्षेत्र से जुड़े सर्वे, प्रवर्तन, परिवहन, रॉयल्टी भुगतान और नीलामी प्रक्रियाओं को डिजिटल बनाया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि पर्यावरण, वन, भूमि अधिग्रहण और अन्य आवश्यक मंजूरियों के मामले में निवेशकों को सरकार की ओर से हर स्तर पर सहयोग दिया जाएगा। उन्होंने उद्योगों से केवल खदानों में निवेश करने के बजाय पूरी मिनरल वैल्यू चेन और डाउनस्ट्रीम उद्योगों में निवेश करने की अपील की।
ढाई साल में 40 एक्सप्लोरेशन प्रोजेक्ट, 2800 किमी सर्वे
खनिज विभाग के संचालक एवं सीएमडीसी के प्रबंध संचालक रजत बंसल ने बताया कि पिछले ढाई वर्षों में राज्य में 40 खनिज अन्वेषण परियोजनाएं शुरू की गई हैं और 2800 किलोमीटर से अधिक क्षेत्र का भू-वैज्ञानिक सर्वेक्षण पूरा किया गया है।
पिछले वित्तीय वर्ष में राज्य को करीब 16,700 करोड़ रुपये का खनिज राजस्व मिला, जो निर्धारित लक्ष्य का लगभग 98 प्रतिशत है। खनिज राजस्व में सालाना करीब 14 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है।
उन्होंने बताया कि अब तक राज्य में 65 खनिज ब्लॉकों की नीलामी हो चुकी है, जिनसे करीब 4 लाख करोड़ रुपये की अनुमानित राजस्व क्षमता जुड़ी है। राज्य में लिथियम, ग्रेफाइट, वैनेडियम, गैलियम, सोना, टंगस्टन, निकेल, क्रोमियम, तांबा, सीसा-जस्ता और हीरा जैसे खनिजों की भी व्यापक संभावनाएं हैं।
‘ई-रेत संगवारी’ और ‘टिन पोर्टल’ लॉन्च
कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने ‘ई-रेत संगवारी’ और ‘टिन पोर्टल’ की शुरुआत की। ई-रेत संगवारी के जरिए प्रधानमंत्री आवास योजना के हितग्राहियों को रियायती दर पर रेत उपलब्ध कराने की प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और सुविधाजनक बनाया जाएगा।
वहीं, टिन पोर्टल के माध्यम से दंतेवाड़ा क्षेत्र के टिन से जुड़े आदिवासी परिवारों को उनके उत्पाद का उचित मूल्य दिलाने और व्यवस्था में पारदर्शिता बढ़ाने का प्रयास किया जाएगा।
कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ मिनरल डेवलपमेंट कॉरपोरेशन (CMDC) और इंडियन ओवरसीज बैंक के बीच एमओयू हुआ। इसके अलावा CMDC और पंडित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय के बीच कोरंडम कटिंग एवं पॉलिशिंग प्रशिक्षण के लिए समझौता किया गया। इन समझौतों से वित्तीय सहयोग, कौशल विकास, वैल्यू एडिशन और निवेश को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
केंद्रीय खान मंत्रालय के सचिव केशव चंद्र ने बताया कि देश में क्रिटिकल एवं स्ट्रैटेजिक मिनरल्स के 88 ब्लॉकों की नीलामी प्रक्रिया शुरू की गई है, जिनमें से अब तक 56 ब्लॉकों की सफल नीलामी हो चुकी है। उन्होंने बताया कि देश की पहली लिथियम युक्त खनिज ब्लॉक नीलामी छत्तीसगढ़ के कटघोरा लिथियम एवं रेयर अर्थ एलिमेंट ब्लॉक से जुड़ी थी।
कार्यक्रम में माइनर मिनरल्स पर पुस्तक का विमोचन भी किया गया तथा तीन चूना पत्थर खनन लीज ब्लॉकों के लिए एनआईटी जारी करने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई।














