कई लोगों के ठिकानों पर छापे; 2021 की PSC परीक्षा में पेपर लीक के जरिए ₹3 करोड़ से अधिक की अवैध कमाई का आरोप
रायपुर। छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग (CGPSC) की 2021 की परीक्षाओं में कथित गड़बड़ी और पेपर लीक से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने मंगलवार को छत्तीसगढ़ में कई स्थानों पर छापेमारी की। कार्रवाई के दौरान एजेंसी ने पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के पूर्व निजी सहायक (PA) केके चंद्रवंशी के भतीजे उत्कर्ष चंद्राकर को गिरफ्तार किया है।
ED की कार्रवाई रायपुर, भिलाई, धमतरी और जशपुर में कई ठिकानों पर हुई। एजेंसी ने पूर्व PA केके चंद्रवंशी उर्फ केके चंद्राकर, पूर्व OSD चेतन बोर्घरिया, अतिरिक्त कलेक्टर एनके भगत और सेवानिवृत्त पटवारी कमलेश राजपूत से जुड़े परिसरों की तलाशी ली।
गिरफ्तारी के बाद रायपुर की PMLA अदालत ने उत्कर्ष चंद्राकर को पांच दिन की ED हिरासत में भेज दिया है।
30 अभ्यर्थियों को परीक्षा से पहले पेपर देने का आरोप
ED ने अदालत में दावा किया कि उत्कर्ष चंद्राकर ने वर्ष 2021 में CGPSC की डिप्टी कलेक्टर और डिप्टी एसपी परीक्षा के प्रश्नपत्र उपलब्ध कराने का भरोसा देकर अभ्यर्थियों से ₹3 करोड़ से अधिक की नकद राशि कथित तौर पर जुटाई।
जांच एजेंसी के अनुसार परीक्षा से एक दिन पहले करीब 30 अभ्यर्थियों को एक मैरिज हॉल में एकत्र किया गया, जहां उन्हें कथित रूप से प्रश्नपत्र उपलब्ध कराए गए। ED का आरोप है कि इन अभ्यर्थियों ने प्रारंभिक परीक्षा पास की और बाद में उन्हें मुख्य परीक्षा के प्रश्नपत्र भी एक रिसॉर्ट में दिए गए।
एजेंसी ने उत्कर्ष चंद्राकर को इस कथित साजिश में मुख्य निजी बिचौलिया और मध्यस्थ बताया है। ED का आरोप है कि उसने सरकारी कर्मचारियों और निजी व्यक्तियों के साथ मिलकर प्रश्नपत्र लीक करने की साजिश में भूमिका निभाई।
₹2.8 करोड़ रिश्तेदार के पास जमा कराने का दावा
ED के मुताबिक कथित अपराध से प्राप्त राशि में से करीब ₹2.8 करोड़ उत्कर्ष चंद्राकर के बहनोई के पास जमा कराए गए। एजेंसी अब इस रकम के लेन-देन और इससे जुड़े बैंकिंग रिकॉर्ड की भी जांच कर रही है।
मामले की मनी लॉन्ड्रिंग जांच छत्तीसगढ़ EOW की FIR और इसके बाद जुलाई 2024 में CBI की ओर से दर्ज मामले तथा वर्ष 2025 में दाखिल तीन आरोपपत्रों से जुड़ी है।
पूर्व PSC अध्यक्ष टामन सिंह सोनवानी भी गिरफ्तार
इस मामले में CGPSC के पूर्व अध्यक्ष टामन सिंह सोनवानी को भी ED ने जुलाई में गिरफ्तार किया था। इससे पहले CBI ने उन्हें 2024 में गिरफ्तार किया था।
ED ने आरोप लगाया है कि PSC अध्यक्ष रहते हुए सोनवानी ने अन्य सरकारी अधिकारियों और निजी लोगों के साथ मिलकर प्रश्नपत्र लीक करने और चयन प्रक्रिया में कथित हेरफेर की साजिश रची। एजेंसी के अनुसार अवैध रकम के बदले अपने रिश्तेदारों और पसंदीदा अभ्यर्थियों को डिप्टी कलेक्टर और डिप्टी एसपी जैसे वरिष्ठ पदों पर चयनित कराने का प्रयास किया गया।
ED ने यह भी दावा किया था कि 2021 में CGPSC के भर्ती नियमों में बदलाव कर ‘परिवार’ की परिभाषा से ‘nephew’ शब्द हटा दिया गया, जिससे सोनवानी के रिश्तेदारों के चयन का रास्ता आसान हुआ।
जांच का दायरा बढ़ने के संकेत
ED के अनुसार कथित अपराध से अर्जित रकम का कुछ हिस्सा नकद और कुछ हिस्सा अलग-अलग बैंक खातों के जरिए लेयरिंग करते हुए आगे भेजा गया। मंगलवार की छापेमारी और उत्कर्ष चंद्राकर की गिरफ्तारी के बाद जांच का दायरा और बढ़ने के संकेत हैं।
वहीं, पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल इससे पहले शराब और कोयला लेवी से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामलों में ED के आरोपों को खारिज कर चुके हैं। उन्होंने इन कार्रवाइयों को अपने और उनसे जुड़े लोगों के खिलाफ राजनीतिक प्रतिशोध बताया था।
फिलहाल CGPSC परीक्षा में कथित पेपर लीक, चयन में हेरफेर और धन के लेन-देन से जुड़े आरोप जांच के दायरे में हैं। ED की आगे की कार्रवाई और अदालत में पेश किए जाने वाले साक्ष्यों से मामले की तस्वीर और स्पष्ट होगी।














