जनप्रतिनिधित्व कानून का हवाला देते हुए कोर्ट ने कहा-चुनाव याचिका में केवल चुनाव लड़ने वाले उम्मीदवार ही पक्षकार होंगे
बिलासपुर। मरवाही विधानसभा चुनाव के परिणाम को चुनौती देने वाली चुनाव याचिका में छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण आदेश दिया है। न्यायमूर्ति संजय के. अग्रवाल की एकल पीठ ने चुनाव आयोग, मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी, जिला निर्वाचन अधिकारी और रिटर्निंग ऑफिसर के नाम याचिका से हटाने का निर्देश दिया है।
कोर्ट ने स्पष्ट किया कि जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 के तहत चुनाव याचिका में चुनाव लड़ने वाले उम्मीदवारों को ही पक्षकार बनाया जा सकता है। चुनाव आयोग या निर्वाचन अधिकारियों को आवश्यक या उचित पक्षकार नहीं माना जा सकता।
अधिकारियों ने दायर किया था आवेदन
चुनाव आयोग और संबंधित अधिकारियों की ओर से अधिवक्ता राकेश कुमार झा और सौम्या दास ने आवेदन दाखिल कर अपने नाम पक्षकारों की सूची से हटाने की मांग की थी। उनका तर्क था कि कानून के अनुसार वे इस मामले में न तो आवश्यक और न ही उचित पक्षकार हैं।
याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता ललित भूषण पासवान ने इसका विरोध किया और अधिकारियों को पक्षकार बनाए रखने की दलील दी।
हाईकोर्ट ने अधिकारियों के आवेदन को स्वीकार करते हुए याचिकाकर्ता को तीन दिन के भीतर पक्षकारों की सूची से प्रतिवादी क्रमांक 1 से 4 के नाम हटाने और शेष पक्षकारों का क्रम ठीक करने का निर्देश दिया है। मामले की अगली सुनवाई 7 सितंबर को होगी।
विजेता का निर्वाचन रद्द करने की मांग
मरवाही विधानसभा से चुनाव लड़ने वाली उर्मिला मार्को ने जनप्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा 80 के तहत चुनाव याचिका दायर की है। इसमें विजयी प्रत्याशी प्रणव कुमार मरपच्ची के निर्वाचन को निरस्त करने की मांग की गई है।
याचिका में विजयी प्रत्याशी और अन्य चुनाव लड़ने वाले उम्मीदवारों के साथ चुनाव आयोग तथा निर्वाचन अधिकारियों को भी पक्षकार बनाया गया था।
हाईकोर्ट ने धारा 82 और सुप्रीम कोर्ट के Jyoti Basu v. Debi Ghoshal तथा Michael B. Fernandes v. C.K. Jaffer Sharief मामलों का उल्लेख करते हुए कहा कि चुनाव याचिका का दायरा सीमित है। गैर-उम्मीदवार अधिकारियों को पक्षकार बनाने की अनुमति देने से चुनाव विवाद अनावश्यक रूप से लंबा और जटिल हो सकता है।














