रामलीला मैदान में देश-प्रदेश के दिग्गज कलाकार देंगे प्रस्तुतियां, कविता कृष्णमूर्ति और जान कुमार सानू के सुरों से होगा समापन
रायपुर। रायगढ़ एक बार फिर सुर, ताल, नृत्य और लोक परंपराओं के रंग में रंगने जा रहा है। महाराजा चक्रधर सिंह की कला साधना और संगीत-नृत्य की समृद्ध विरासत को समर्पित 41वां अंतरराष्ट्रीय चक्रधर समारोह-2026 14 से 23 सितंबर तक आयोजित होगा। दस दिनों तक रामलीला मैदान में हर शाम भारतीय कला और संस्कृति के अलग-अलग रंग देखने को मिलेंगे।
जिला प्रशासन के आयोजन और संस्कृति विभाग, छत्तीसगढ़ पर्यटन मंडल तथा जनसहयोग से होने वाले इस समारोह में देश और प्रदेश के प्रसिद्ध कलाकारों के साथ स्थानीय कलाकार भी मंच साझा करेंगे। प्रतिदिन शाम 6 बजे से शुरू होने वाले सांस्कृतिक कार्यक्रमों में कथक, भरतनाट्यम, ओडिसी, कुचिपुड़ी, मणिपुरी और कथकली जैसे शास्त्रीय नृत्यों के साथ पंडवानी, छत्तीसगढ़ी लोकनृत्य, लोकसंगीत, कबीर भजन, गजल, सूफी गायन और वाद्य संगीत की प्रस्तुतियां होंगी।
गणेश वंदना से होगी शुरुआत
14 सितंबर को समारोह की शुरुआत वेदमणि सिंह ठाकुर के शिष्यों की गणेश वंदना से होगी। इसके बाद पद्म पुरस्कार से सम्मानित अनुज शर्मा लोककला और लोकसंगीत की प्रस्तुति देंगे। पद्म पुरस्कार से सम्मानित डॉ. उषा बारले पंडवानी के माध्यम से पहली शाम को खास बनाएंगी।
15 सितंबर की शाम तबला वादन, कुचिपुड़ी, राजस्थानी लोककला और पंडवानी के नाम रहेगी। निशित गंगानी तबला वादन करेंगे, जबकि टी. लक्ष्मी रेड्डी कुचिपुड़ी प्रस्तुत करेंगी। स्टार्क सोसाइटी, बाड़मेर की प्रस्तुति में राजस्थानी लोककला देखने को मिलेगी। तरुणा साहू और उनकी टीम पंडवानी पेश करेंगी। मधुवारस बैंड की भजन प्रस्तुति भी आकर्षण का केंद्र होगी।
शास्त्रीय नृत्य से सजेगीं अगली शामें
16 सितंबर को कथक और छत्तीसगढ़ी लोकनृत्य की प्रस्तुतियां होंगी। मौमाला नायक कथक प्रस्तुत करेंगी, जबकि भूपेंद्र साहू और उनकी टीम छत्तीसगढ़ी लोकनृत्य पेश करेगी। डॉ. यास्मिन सिंह और उनकी टीम तथा विभूति शर्मा भी कथक प्रस्तुत करेंगे। पायल साहू और उनकी टीम लोककला के रंग बिखेरेगी।
17 सितंबर को बादल-बस्तर डांस, आर्ट एंड लिटरेचर अकादमी लोककला एवं संगीत प्रस्तुत करेगी। मधुमिता रॉय मिश्रा कथक, जान्हवी बेहरा ओडिसी और शिवरंजनी हरीश एवं कलार्पणा डांस ग्रुप भरतनाट्यम की प्रस्तुति देंगे। शिव शक्ति कला संस्थान का कथक भी कार्यक्रम का हिस्सा होगा।
18 सितंबर को डॉ. मंजू एलांगबम मणिपुरी नृत्य पेश करेंगी। पद्म सम्मानित भारती बंधु कबीर भजनों के जरिए आध्यात्मिक माहौल बनाएंगे। श्वेता नायक और उनकी टीम कुचिपुड़ी तथा अनुराग शर्मा लोकसंगीत की प्रस्तुति देंगे।
कविता और नृत्य का अनूठा संगम
19 सितंबर की शाम कला और साहित्य प्रेमियों के लिए खास होगी। गौरी शंकर दाश और रीला होता ओडिसी प्रस्तुत करेंगे। वहीं पद्म सम्मानित सुरेंद्र शर्मा और अन्य कलाकार कविता के माध्यम से हास्य और साहित्य का रंग भरेंगे।
20 सितंबर को बी. साहू और उनकी टीम गोटीपुआ नृत्य प्रस्तुत करेगी। Indian Idol फेम अमित साना अपनी गायकी से दर्शकों का मनोरंजन करेंगे। पद्म पुरस्कार से सम्मानित रामलाल बरेठ के निर्देशन में भूपेंद्र बरेठ और उनकी टीम कथक प्रस्तुत करेगी।
21 सितंबर को बनारस घराने के कथक के साथ संतूर, पखावज और तबले की जुगलबंदी देखने को मिलेगी। रुद्रशंकर सिन्हा और वासंती वैष्णव की कथक प्रस्तुतियां होंगी। सोनू गुप्ता और उनकी टीम लोकगीत पेश करेगी। ‘त्रिवेणी संगम’ संतूर, पखावज और तबले की प्रस्तुति देगा। संस्कार कला संघ नृत्य-नाटिका तथा नृत्यांजलि बनारस घराने का कथक प्रस्तुत करेगी।
कथकली, ओडिसी और सूफी संगीत का रंग
22 सितंबर को गुरु कोट्टक्कल नंदकुमारन नायर कथकली प्रस्तुत करेंगे। सु दीक्षा रथ ओडिसी और प्रो. डॉ. लवली शर्मा सितार वादन करेंगी। पुनारिक साहू और लहरंग्गा लोकसंगीत प्रस्तुत करेंगे। रायगढ़ के राकेश शर्मा सूफी गायन और गजलों से शाम को सुरमयी बनाएंगे।
कविता कृष्णमूर्ति और जान कुमार सानू करेंगे समापन
दस दिवसीय समारोह का भव्य समापन 23 सितंबर को होगा। पद्म पुरस्कार से सम्मानित प्रसिद्ध गायिका कविता कृष्णमूर्ति अपनी मधुर आवाज से समापन शाम को यादगार बनाएंगी। उनके साथ जान कुमार सानू भी गायन की प्रस्तुति देंगे।
चक्रधर समारोह केवल सांस्कृतिक कार्यक्रमों की श्रृंखला नहीं, बल्कि महाराजा चक्रधर सिंह की कला साधना और छत्तीसगढ़ की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को आगे बढ़ाने का महत्वपूर्ण मंच है। खास बात यह है कि स्थानीय कलाकारों को भी राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर के कलाकारों के साथ एक ही मंच पर अपनी प्रतिभा दिखाने का अवसर मिलेगा।
दस दिनों तक चलने वाला यह आयोजन रायगढ़ को कला और संस्कृति के बड़े केंद्र के रूप में स्थापित करेगा। शास्त्रीय नृत्य से लेकर पंडवानी, लोकसंगीत, भजन, गजल और लोकप्रिय गायन तक की विविध प्रस्तुतियां समारोह को भारतीय संस्कृति की जीवंत झांकी बनाएंगी।













