दावा- सही और गलत उत्तरों पर समान अंक, 1:3 अनुपात नहीं होने पर भी उठाए सवाल

बिलासपुर। छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग (CGPSC) की परीक्षा में कथित अनियमितताओं को लेकर जिला कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष सिद्धांशु मिश्रा और महेंद्र गंगोत्री ने बुधवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस की। उन्होंने परीक्षा प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए सरकार से इंटरव्यू की प्रक्रिया फिलहाल स्थगित करने की मांग की।

कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया कि मुख्य परीक्षा की उत्तरपुस्तिकाओं के मूल्यांकन में गंभीर विसंगतियां सामने आई हैं। उनका दावा है कि कुछ मामलों में सही और गलत उत्तर लिखने वाले अभ्यर्थियों को समान अंक दिए गए, जबकि कहीं-कहीं गलत उत्तर पर भी अंक दिए जाने के उदाहरण मिले हैं।

265 पद, लेकिन इंटरव्यू के लिए 608 अभ्यर्थी

कांग्रेस नेताओं के मुताबिक PSC ने कुल 265 पदों के लिए विज्ञापन जारी किया था। नियम के अनुसार इंटरव्यू के लिए पदों की संख्या के तीन गुना अभ्यर्थियों को बुलाया जाना चाहिए। इस हिसाब से 795 अभ्यर्थियों को इंटरव्यू के लिए पात्र होना चाहिए था।

उनका कहना है कि मुख्य परीक्षा के बाद केवल 608 अभ्यर्थियों को इंटरव्यू के लिए योग्य घोषित किया गया। आयोग की ओर से कथित तौर पर 187 अभ्यर्थियों के न्यूनतम आवश्यक अंक हासिल नहीं करने की बात कही गई है। कांग्रेस नेताओं ने मांग की कि आयोग यह स्पष्ट करे कि इन 187 अभ्यर्थियों ने न्यूनतम अंक किस आधार पर हासिल नहीं किए।

उत्तरपुस्तिकाओं के मूल्यांकन पर उठाए सवाल

कांग्रेस नेताओं ने 2024 की मुख्य परीक्षा की दो अभ्यर्थियों की उत्तरपुस्तिकाओं का हवाला देते हुए मूल्यांकन में अंतर का आरोप लगाया। उनके अनुसार प्रश्न क्रमांक 5(i) में दोनों अभ्यर्थियों ने समान और सही उत्तर लिखा, लेकिन एक को 2 में से 0 और दूसरे को 2 में से 2 अंक दिए गए।

इसी तरह भक्तिन माता राजिम से जुड़े प्रश्न में एक अभ्यर्थी को सही उत्तर लिखने के बावजूद 8 में से 3.5 अंक मिले, जबकि दूसरे अभ्यर्थी के कथित तौर पर गलत उत्तर को भी 1.5 अंक दिए गए।

छत्तीसगढ़ में होम रूल लीग की स्थापना से संबंधित प्रश्न में भी कांग्रेस नेताओं ने मूल्यांकन की विसंगति का दावा किया। उनके अनुसार सही उत्तर देने वाले अभ्यर्थी और होम रूल लीग को वर्ष 1923 तथा स्वराज पार्टी से जोड़ने वाले  गलत उत्तर को समान 2.5-2.5 अंक दिए गए।

इसी तरह घरेलू हिंसा कानून में ‘पीड़ित व्यक्ति’ से संबंधित उत्तर में एक अभ्यर्थी ने पुरुष को पीड़ित व्यक्ति बताया, जिसे कांग्रेस नेताओं ने गलत उत्तर बताया। इसके बावजूद उसे 2 में से 0.5 अंक मिले, जबकि सही उत्तर देने वाले दूसरे अभ्यर्थी को भी 0.5 अंक दिए गए।

बौद्ध धर्म के महाभिनिष्क्रमण से संबंधित प्रश्न में दोनों अभ्यर्थियों ने सही उत्तर लिखा, लेकिन एक को 2 में से 0.5 और दूसरे को 1.5 अंक दिए जाने का दावा किया गया।

पिछली परीक्षा का भी दिया हवाला

कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया कि 2024 की PSC परीक्षा के दौरान भी मूल्यांकन प्रक्रिया को लेकर सवाल उठे थे। उनका दावा है कि उस समय LB संवर्ग के ऐसे स्कूल शिक्षकों से उत्तरपुस्तिकाओं का मूल्यांकन कराया गया, जो इसके लिए पात्र नहीं थे। उन्होंने मूल्यांकनकर्ताओं के नाम और मोबाइल नंबर सार्वजनिक होने को भी परीक्षा की गोपनीयता से जुड़ा गंभीर मामला बताया।

उन्होंने PSC की तत्कालीन कार्यवाहक अध्यक्ष और बाद में अध्यक्ष बनीं रीता शांडिल्य के कार्यकाल का भी उल्लेख करते हुए सरकार पर संरक्षण देने का आरोप लगाया। यह आरोप कांग्रेस नेताओं का है।

कांग्रेस नेताओं ने यह भी कहा कि राज्य सेवा परीक्षा 2024 में मुख्य परीक्षा के बाद इंटरव्यू के लिए निर्धारित अनुपात से 95 अभ्यर्थी कम चुने गए थे।

कांग्रेस की ये हैं प्रमुख मांगें

कांग्रेस नेताओं ने सरकार और PSC से मांग की कि—

  • विवाद दूर होने तक इंटरव्यू स्थगित किए जाएं।
  • सभी अभ्यर्थियों की उत्तरपुस्तिकाएं इंटरव्यू से पहले सार्वजनिक की जाएं।
  • इंटरव्यू के लिए चयनित अभ्यर्थियों के अलावा अन्य अभ्यर्थियों को भी उत्तरपुस्तिका की प्रति निःशुल्क उपलब्ध कराई जाए।
  • उत्तरपुस्तिकाओं के मूल्यांकन के लिए स्पष्ट पात्रता और मानदंड तय किए जाएं।
  • मुख्य परीक्षा के मॉडल उत्तर जारी किए जाएं।
  • सभी अभ्यर्थियों की उत्तरपुस्तिकाओं का पुनर्मूल्यांकन कराया जाए।
  • इंटरव्यू में पदों के तीन गुना यानी 1:3 अनुपात का पालन किया जाए।

प्रेस कॉन्फ्रेंस में पूर्व विधायक शैलेश पांडेय, पूर्व शहर अध्यक्ष नरेंद्र बोलर और विजय पांडेय, रविंद्र सिंह, मोहम्मद जसस, रौनक ऐरी सहित अन्य कांग्रेस नेता मौजूद रहे।

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