5 सितंबर को दोषी ठहराए गए थे सभी आरोपी; एक आरोपी की सुनवाई के दौरान हो चुकी है मौत

जगदलपुर। छत्तीसगढ़ के चर्चित झीरम घाटी हत्याकांड में NIA की विशेष अदालत ने बुधवार को 10 दोषी माओवादियों को मौत की सजा सुनाई। अदालत ने 5 सितंबर को इन सभी आरोपियों को दोषी ठहराया था। विशेष न्यायाधीश अजय सिंह राजपूत ने मामले में उपलब्ध साक्ष्यों और गंभीर धाराओं के आधार पर यह सजा सुनाई।

दोषियों में प्रमिला मोडियाम, सुमित्रा पुनेम, मुक्का मंडावी, मड़कम देवा, कोसा कवासी, आयत मरकाम, बंजामी सेना, चैतु लेकाम, जोगा मड़कम और महादेव नागा शामिल हैं। सभी आरोपी फिलहाल जगदलपुर केंद्रीय जेल में बंद हैं।

2013 में हुआ था झीरम घाटी हमला

25 मई 2013 को सुकमा से लौट रही कांग्रेस की परिवर्तन यात्रा पर दरभा थाना क्षेत्र की झीरम घाटी में माओवादियों ने घात लगाकर हमला किया था। जगदलपुर से करीब 42 किलोमीटर दूर राष्ट्रीय राजमार्ग-30 पर हुए इस हमले में कांग्रेस के तत्कालीन प्रदेश अध्यक्ष नंदकुमार पटेल, वरिष्ठ नेता महेंद्र कर्मा, उनके बेटे दिनेश पटेल, पूर्व केंद्रीय मंत्री विद्याचरण शुक्ल, पूर्व विधायक उदय मुदलियार और योगेंद्र शर्मा समेत 32 लोगों की मौत हुई थी।

हमले में सुरक्षा बलों और आम नागरिकों सहित 38 अन्य लोग घायल हुए थे। इस घटना ने पूरे छत्तीसगढ़ को झकझोर दिया था और बस्तर की राजनीति तथा सुरक्षा व्यवस्था पर इसका लंबे समय तक असर रहा।

11 आरोपियों के खिलाफ चला था मुकदमा

मामले में कुल 11 आरोपियों के खिलाफ सुनवाई हुई। इनमें से एक आरोपी की सुनवाई के दौरान मौत हो गई। NIA ने वर्ष 2015 में करीब 1,000 पन्नों की चार्जशीट दाखिल की थी। मुकदमे के दौरान अदालत में 101 गवाहों के बयान दर्ज किए गए।

अदालत ने 5 सितंबर को 10 आरोपियों को दोषी करार दिया था। बुधवार को सजा के लिए हुई सुनवाई में उन्हें मौत की सजा सुनाई गई।

गंभीर धाराओं में था मौत की सजा का प्रावधान

अभियोजन और बचाव पक्ष के वकीलों के अनुसार, जिन गंभीर कानूनी धाराओं के तहत आरोपियों को दोषी ठहराया गया, उनमें उम्रकैद से लेकर मौत की सजा तक का प्रावधान है। अदालत ने मामले की गंभीरता को देखते हुए दोषियों को मृत्युदंड सुनाया।

फैसले के बाद फिर चर्चा में झीरम

5 सितंबर के दोषसिद्धि के फैसले के बाद कांग्रेस ने इसे अधूरा न्याय बताते हुए प्रदेशभर में प्रेस कॉन्फ्रेंस की थी और हाईकोर्ट जाने की बात कही थी। पार्टी के नेताओं ने यह सवाल भी उठाया था कि हमले के वास्तविक साजिशकर्ताओं की जांच और पूछताछ किस स्तर तक हुई।

वहीं, अब 10 दोषियों को मौत की सजा सुनाए जाने के बाद झीरम घाटी का मामला एक बार फिर बस्तर में चर्चा के केंद्र में है। 13 साल से अधिक समय बीत जाने के बावजूद इस हमले की स्मृति लोगों के बीच आज भी बनी हुई है।

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