महानदी और शिवनाथ नदी उफान पर, गंगरेल बांध के सभी 14 गेट खोले गए

रायपुर-दुर्ग में जलभराव से जनजीवन पर खासा असर

गरियाबंद में बाढ़ के पानी में फंसी यात्री बस, रस्सियों के सहारे यात्रियों को निकाला गया

राजनांदगांव में उफनती नदी में फंसी कार से पांच लोगों को बचाया गया

रायपुर। छत्तीसगढ़ में लगातार हो रही भारी बारिश से कई जिलों में बाढ़ के हालात बन गए हैं। नदियों और नालों का जलस्तर बढ़ने से निचले इलाकों में पानी भर गया है। कई स्थानों पर सड़कें डूबने से आवागमन बाधित हुआ है और कुछ गांवों का संपर्क आसपास के क्षेत्रों से टूट गया है। रायपुर, दुर्ग, धमतरी, राजनांदगांव, गरियाबंद, महासमुंद और बस्तर संभाग के विभिन्न इलाकों में बारिश का व्यापक असर देखने को मिला है।

धमतरी में महानदी के जलस्तर में बढ़ोतरी के बीच गंगरेल बांध के सभी 14 गेट खोलकर पानी छोड़ा जा रहा है। दुर्ग और रायपुर के आसपास खारुन नदी का जलस्तर बढ़ने से कई गांवों में पानी भर गया है। रायपुर-दुर्ग को जोड़ने वाले अमलेश्वर के पुल के ऊपर 19 साल बाद पानी बह रहा है। राजनांदगांव में शिवनाथ नदी उफान पर है। गरियाबंद में तेज बहाव के बीच यात्री बस फंस गई, जबकि धमतरी और आसपास के क्षेत्रों में भी बाढ़ के पानी में वाहनों के फंसने की घटनाएं सामने आई हैं।

दुर्ग जिले के परसदा गांव में एसडीआरएफ की टीम ने बाढ़ में फंसे लगभग 55 लोगों का कल देर रात अंधेरे में रेस्क्यू कर सुरक्षित बाहर निकाला।

गंगरेल बांध के सभी 14 गेट खोले, महानदी में बढ़ा पानी

धमतरी जिले में लगातार बारिश और जलग्रहण क्षेत्रों से पानी की आवक बढ़ने के कारण गंगरेल बांध का जलस्तर तेजी से बढ़ा है। जलाशय के पूरी क्षमता तक भरने के बाद इसके सभी 14 गेट खोलकर पानी छोड़ा गया है। बांध से करीब 2.5 लाख क्यूसेक पानी छोड़े जाने की जानकारी दी गई है। इससे महानदी के जलस्तर में बढ़ोतरी हुई है। नदी के किनारे बसे गांवों में बाढ़ की आशंका को देखते हुए प्रशासन ने सतर्कता बरतने के निर्देश दिए हैं।

इससे पहले 25 सितंबर को जारी जलाशय संबंधी आंकड़ों के मुताबिक, गंगरेल बांध में पानी की आवक 64,117 क्यूसेक दर्ज की गई थी। उस समय 10 गेट खोलकर 54,950 क्यूसेक पानी छोड़ा जा रहा था। इसमें से 6,000 क्यूसेक पानी रुद्री बैराज के माध्यम से नहरों में और 48,950 क्यूसेक महानदी में छोड़ा जा रहा था। बाद में पानी की आवक और जलस्तर की स्थिति को देखते हुए निकासी बढ़ाई गई।

धमतरी जिले के मुरुमसिल्ली, दूधावा और सोंढूर जलाशयों में भी जलभराव बढ़ा है। 25 सितंबर की सुबह मुरुमसिल्ली जलाशय पूरी क्षमता तक भर चुका था, जबकि गंगरेल 98.14 प्रतिशत और दूधावा 97.21 प्रतिशत भरा हुआ था। सोंढूर में भी जलस्तर तेजी से बढ़ रहा था।

महानदी में पानी छोड़े जाने के कारण नदी के तटीय क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को सतर्क रहने कहा गया है। जलस्तर बढ़ने से निचले इलाकों में पानी फैलने और आवागमन बाधित होने की आशंका बनी हुई है।

रायपुर-दुर्ग में खारुन नदी का जलस्तर बढ़ा, घरों में घुसा पानी

रायपुर और दुर्ग जिले के कई इलाकों में लगातार बारिश के कारण जलभराव की स्थिति बनी हुई है। खारुन नदी का जलस्तर बढ़ने से नदी के आसपास बसे गांव प्रभावित हुए हैं। दुर्ग जिले के अमलेश्वर और खुड़मुड़ा गांवों में पानी भरने की खबरें  आई हैं।

कुछ स्थानों पर सड़कें पानी में डूब गई हैं और कई घरों में पानी घुसने से लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। जलभराव के कारण ग्रामीण इलाकों में आवागमन प्रभावित हुआ है।

रायपुर और दुर्ग के निचले क्षेत्रों में बारिश का पानी जमा होने से सामान्य जनजीवन बाधित हुआ है। सड़क पर पानी भरने के कारण लोगों को आने-जाने में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। लगातार बारिश के बीच नदियों का जलस्तर बढ़ने से स्थिति पर नजर रखना जरूरी हो गया है।

शिवनाथ नदी उफान पर, कार में फंसे पांच लोगों को बचाया

राजनांदगांव जिले में भारी बारिश के कारण शिवनाथ नदी का जलस्तर बढ़ गया है। नदी और आसपास के जलस्रोतों में पानी का बहाव तेज होने से कई स्थानों पर बाढ़ जैसे हालात बने हैं।

इस बीच उफनती नदी के पानी में एक कार फंस गई। कार में सवार पांच लोगों की जान खतरे में पड़ गई। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, गंडई थाना प्रभारी ने बचाव अभियान चलाकर सभी पांच लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला।

गरियाबंद में बाढ़ के पानी में फंसी बस, रस्सियों के सहारे यात्रियों का रेस्क्यू

गरियाबंद जिले में लगातार बारिश के कारण नदी-नालों का जलस्तर बढ़ गया है। जिले के पंटोरा और आसपास के क्षेत्रों में मुख्य मार्ग पर बाढ़ का पानी भरने के बाद यातायात प्रभावित हुआ।

इसी दौरान रायपुर से देवभोग जा रही एक यात्री बस सरई भदर के पास नाले के तेज बहाव में फंस गई। बस में बड़ी संख्या में यात्री सवार थे। पानी का बहाव तेज होने के कारण यात्रियों को बाहर निकालना चुनौतीपूर्ण हो गया। पुलिस और ग्रामीणों की मदद से रस्सियों के सहारे यात्रियों को सुरक्षित बाहर निकाला गया। बस पर सवार लगभग 40 यात्रियों को सुरक्षित निकाल लिया गया।

इस घटना ने बारिश के दौरान वैकल्पिक मार्गों की सुरक्षा को लेकर सवाल खड़े किए हैं। मुख्य सड़क पर पानी भरने के बाद दूसरे रास्तों से गुजरने वाले वाहनों के लिए भी नदी-नालों का तेज बहाव खतरा बन सकता है।

नवापारा-राजिम में महानदी का पानी बस्तियों तक पहुंचा

महासमुंद और गरियाबंद क्षेत्र के आसपास महानदी का जलस्तर बढ़ने से नदी के किनारे बसे इलाकों में बाढ़ का खतरा बढ़ गया है। नवापारा-राजिम क्षेत्र में महानदी के उफान के कारण निचली बस्तियों में पानी घुसने की खबरें सामने आई हैं।

बस्तर संभाग में भारी बारिश, सड़कें डूबीं और गांवों का संपर्क टूटा

बस्तर संभाग में भी भारी बारिश ने जनजीवन को प्रभावित किया है। बस्तर, दंतेवाड़ा, सुकमा और बीजापुर के विभिन्न इलाकों में तेज बारिश के कारण नदी-नालों का जलस्तर बढ़ा है। कई निचले क्षेत्रों में पानी भरने और सड़क संपर्क बाधित होने की खबरें सामने आई हैं।

बस्तर क्षेत्र में बाढ़ के कारण राष्ट्रीय राजमार्ग-30 के कुछ हिस्से डूब गए और कई गांवों का संपर्क प्रभावित हुआ। बारिश के चलते कुछ जिलों में स्कूल भी बंद रखने का निर्णय लिया गया। कोंडागांव जिले में बारिश से जुड़ी एक घटना में एक व्यक्ति की मौत की भी खबर दी गई है।

भारतीय मौसम विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, 25 सितंबर को जगदलपुर में 246.3 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई। लोहंडीगुड़ा में 230.5 मिलीमीटर, बस्तानार में 221.5 मिलीमीटर और तोकापाल में 200.1 मिलीमीटर बारिश हुई। बस्तर क्षेत्र में भारी बारिश के कारण नदी-नालों में पानी तेजी से बढ़ा है।

कई जिलों में बारिश का व्यापक असर, बिजली और यातायात पर भी दबाव

छत्तीसगढ़ के मध्य और दक्षिणी हिस्सों में लगातार बारिश के कारण जनजीवन प्रभावित हुआ है। धमतरी, गरियाबंद, बालोद और कांकेर के विभिन्न क्षेत्रों में भारी बारिश दर्ज की गई है।

मौसम संबंधी आंकड़ों के अनुसार, गरियाबंद जिले के देवभोग में 165.7 मिलीमीटर, मैनपुर में 155.4 मिलीमीटर और अमलीपदर में 152.6 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई। धमतरी में 108 मिलीमीटर और कुरुद क्षेत्र के आसपास 116 मिलीमीटर बारिश हुई। बालोद में 127.5 मिलीमीटर तथा कांकेर जिले के अंतागढ़ में 155.5 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई।

लगातार बारिश के कारण ग्रामीण सड़कों पर पानी भरने, पुल-पुलियों के ऊपर से पानी बहने और नदी किनारे की बस्तियों में जलभराव की स्थिति बनी हुई है। इससे दैनिक आवागमन, बाजारों तक पहुंच और अन्य जरूरी गतिविधियों पर असर पड़ रहा है।

आकाशीय बिजली से मौतें, बारिश के बीच सतर्कता जरूरी

प्रदेश में भारी बारिश के साथ आकाशीय बिजली गिरने की घटनाएं भी सामने आई हैं। टाइम्स ऑफ इंडिया की 24 सितंबर की रिपोर्ट के अनुसार, बेमेतरा, बालोद, धमतरी और कांकेर जिलों में बिजली गिरने से पांच लोगों की मौत हुई, जबकि पांच अन्य लोग गंभीर रूप से घायल हुए।

बेमेतरा जिले के बेरला क्षेत्र में दो प्रवासी मजदूरों की मौत की खबर दी गई। मौसम विभाग ने 25 और 26 सितंबर को भी प्रदेश के विभिन्न हिस्सों में भारी बारिश, गरज-चमक और आकाशीय बिजली की आशंका जताई थी।

बारिश के बीच राहत और सुरक्षा पर नजर

लगातार बारिश और नदियों के बढ़ते जलस्तर के बीच निचले इलाकों में रहने वाले लोगों की सुरक्षा सबसे अहम है। नदी किनारे बसे गांवों, जलमग्न सड़कों और पुल-पुलियों के आसपास सतर्कता बरतने की जरूरत है।

बाढ़ के पानी में फंसे वाहनों और यात्रियों को सुरक्षित निकालने की घटनाओं के बीच यह भी स्पष्ट हुआ है कि तेज बहाव वाले रास्तों से गुजरना जोखिम भरा हो सकता है। जलाशयों से पानी छोड़े जाने के कारण नदी के निचले हिस्सों में जलस्तर तेजी से बदल सकता है।

प्रदेश के कई जिलों में बारिश का असर जारी रहने के बीच प्रशासन और संबंधित विभागों के सामने प्रभावित क्षेत्रों में निगरानी, आवागमन की स्थिति और जरूरतमंद लोगों तक सहायता पहुंचाने की चुनौती बनी हुई है।

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