प्रभावितों को 5-5 हजार रुपये की सहायता; मकानों के पुनर्निर्माण का भरोसा

शिवरीनारायण में तैनात की गई डीआरएफ की टीम; क्षतिग्रस्त सड़कों और पुल-पुलियों की मरम्मत के निर्देश

रायपुर। छत्तीसगढ़ में लगातार हो रही भारी बारिश से कई जिलों में बाढ़ जैसे हालात बन गए हैं। नदियों का जलस्तर बढ़ने से तटीय इलाकों में पानी भर गया है और निचली बस्तियों में रहने वाले लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाना पड़ रहा है। रायपुर जिले के नवापारा क्षेत्र में महानदी के उफान से कई गांव प्रभावित हुए हैं। कुछ इलाकों में पानी घरों के भीतर 8 फीट तक पहुंच गया है। स्थानीय लोगों के अनुसार, पिछले 25 वर्षों में उन्होंने इस तरह की जलभराव और तबाही नहीं देखी थी।

बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में राहत और बचाव अभियान चलाया जा रहा है। प्रशासन के मुताबिक, अब तक करीब 2,000 लोगों को सुरक्षित स्थानों और राहत शिविरों में पहुंचाया गया है। प्रभावित परिवारों के लिए भोजन, पेयजल और अन्य जरूरी सुविधाओं की व्यवस्था की गई है। वहीं, राज्य सरकार ने बारिश से क्षतिग्रस्त सड़कों और पुल-पुलियों की मरम्मत के लिए लोक निर्माण विभाग को तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।

महानदी का पानी बस्तियों तक पहुंचा, 2 हजार लोग सुरक्षित स्थानों पर भेजे गए

रायपुर जिले के अभनपुर विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत नवापारा और आसपास के गांवों में महानदी के उफान से बाढ़ की स्थिति बनी हुई है। सोमवारी बाजार, नेहरू घाट, परागांव, कुटीपारा और टीला सहित नदी किनारे बसे कई गांव प्रभावित हुए हैं।

महानदी का जलस्तर बढ़ने से निचले इलाकों में पानी भर गया है। कई घरों में पानी घुसने से लोगों को अपना सामान छोड़कर सुरक्षित स्थानों की ओर जाना पड़ा। नवापारा क्षेत्र में कुछ स्थानों पर पानी 8 फीट तक पहुंचने की जानकारी सामने आई है।

बाढ़ की गंभीरता को देखते हुए स्थानीय प्रशासन ने राहत और बचाव अभियान तेज कर दिया है। अब तक करीब 2,000 लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है। प्रभावितों को राहत शिविरों में ठहराया गया है, जहां उनके लिए भोजन, पेयजल और आवश्यक सुविधाओं की व्यवस्था की गई है।

मंत्री टंकराम वर्मा ने राहत शिविरों का किया निरीक्षण

राजस्व एवं आपदा प्रबंधन मंत्री टंकराम वर्मा ने शनिवार को बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का दौरा कर हालात का जायजा लिया। उन्होंने प्रभावित लोगों से मुलाकात कर उनकी समस्याएं सुनीं और राहत शिविरों में उपलब्ध सुविधाओं का निरीक्षण किया।

मंत्री ने प्रभावित परिवारों को भरोसा दिलाया कि राज्य सरकार इस संकट की घड़ी में उनके साथ है और उन्हें हरसंभव सहायता उपलब्ध कराई जाएगी।

बाढ़ से प्रभावित परिवारों को तत्काल राहत देने के लिए 5-5 हजार रुपये की सहायता राशि के चेक वितरित किए गए। मंत्री ने बाढ़ से क्षतिग्रस्त मकानों के पुनर्निर्माण में भी मदद का आश्वासन दिया।

उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि बाढ़ से हुए नुकसान का सर्वे तेजी से और सही तरीके से किया जाए। इसमें मकानों, फसलों, संपत्ति और अन्य नुकसान का आकलन किया जाएगा। सर्वे पूरा होने के बाद राजस्व पुस्तक परिपत्र (आरबीसी) 6-4 के प्रावधानों के तहत प्रभावितों को प्राथमिकता से मुआवजा देने की बात कही गई है।

गंगरेल बांध के सभी 14 गेट खुले, तटीय इलाकों में निगरानी बढ़ी 

धमतरी जिले के गंगरेल बांध के सभी 14 गेट खोले जाने और जांजगीर-चांपा जिले में लगातार बारिश के बीच प्रशासन ने महानदी के तटीय इलाकों में निगरानी बढ़ा दी है।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के निर्देश पर जांजगीर-चांपा के कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक ने महानदी के तटवर्ती क्षेत्रों का निरीक्षण किया। अधिकारियों ने नदी के जलस्तर, बहाव और संवेदनशील स्थानों पर सुरक्षा व्यवस्था का जायजा लिया।

राजस्व, पुलिस, जल संसाधन और होमगार्ड सहित संबंधित विभागों को सतर्क रहने के निर्देश दिए गए हैं। अधिकारियों से कहा गया है कि नदी के जलस्तर और आसपास के क्षेत्रों की स्थिति पर लगातार नजर रखें तथा किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए आवश्यक संसाधन तैयार रखें।

शिवरीनारायण में डीआरएफ की टीम तैनात, एसडीआरएफ से भी समन्वय

बाढ़ और अन्य आपात स्थितियों से निपटने के लिए जिला प्रशासन ने होमगार्ड की जिला आपदा प्रतिक्रिया बल (डीडीआरएफ) की दो टीमें तैयार रखी हैं।

इनमें से एक टीम को मोटरबोट और अन्य जरूरी बचाव उपकरणों के साथ शिवरीनारायण में तैनात किया गया है। दूसरी टीम को जिला मुख्यालय में रिजर्व रखा गया है। जरूरत पड़ने पर अतिरिक्त सहायता उपलब्ध कराने के लिए बिलासपुर की एसडीआरएफ टीम से भी लगातार संपर्क बनाए रखा जा रहा है।

कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक ने शिवरीनारायण बैराज, महानदी के घाटों, पुलों, सांस्कृतिक केंद्र और बसंतपुर बैराज सहित संवेदनशील स्थानों का निरीक्षण किया।

सुरक्षा के लिहाज से घाटों और पुलों पर बैरिकेडिंग की गई है तथा पुलिस बल तैनात किया गया है। अधिकारियों को नदी के जलस्तर और बहाव पर लगातार निगरानी रखने के निर्देश दिए गए हैं।

पुल-पुलियों पर पानी चढ़ने पर यातायात रोकने के निर्देश

लगातार बारिश से पुलों, पुलियों और सड़कों पर पानी भरने की आशंका को देखते हुए प्रशासन ने आवागमन की सुरक्षा पर विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए हैं।

प्रभावित जिलों के कलेक्टर और पुलिस अधीक्षकों ने अधिकारियों से कहा है कि यदि किसी पुल या पुलिया के ऊपर से पानी बहने के कारण आवागमन जोखिमपूर्ण हो जाए तो तत्काल यातायात नियंत्रित किया जाए। जरूरत पड़ने पर संबंधित मार्ग पर आवाजाही पूरी तरह रोक दी जाए।

महानदी के तटवर्ती गांवों और पहले जलभराव से प्रभावित हो चुके इलाकों में विशेष सतर्कता बरतने के निर्देश दिए गए हैं। ग्रामीणों को मुनादी के जरिए संभावित जलभराव और जरूरी सावधानियों की जानकारी देने को कहा गया है। जरूरत पड़ने पर प्रभावित लोगों को तत्काल सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने और वहां आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराने के निर्देश भी दिए गए हैं।

प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे नदी, पुल, पुलिया और तेज बहाव वाले स्थानों के पास अनावश्यक रूप से न जाएं। पानी के नजदीक सेल्फी लेने या वीडियो बनाने के लिए जोखिम न उठाएं। किसी भी आपात स्थिति की सूचना तत्काल संबंधित अधिकारियों को देने की अपील की गई है।

क्षतिग्रस्त सड़कों और पुल-पुलियों की तत्काल मरम्मत के निर्देश

लगातार बारिश के कारण प्रदेश के विभिन्न हिस्सों में सड़कें और पुल-पुलियां क्षतिग्रस्त हुई हैं। उप मुख्यमंत्री एवं लोक निर्माण मंत्री अरुण साव ने विभागीय अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि क्षतिग्रस्त मार्गों की मरम्मत में देरी न हो और आवागमन जल्द से जल्द बहाल किया जाए।

जहां तत्काल मरम्मत संभव है, वहां संबंधित एजेंसियों और ठेकेदारों के माध्यम से काम शुरू कराकर यातायात बहाल करने को कहा गया है। जिन स्थानों पर व्यापक मरम्मत या पुनर्निर्माण की जरूरत है, वहां प्राथमिकता के आधार पर प्रस्ताव तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं। इसके लिए आवश्यक धनराशि उपलब्ध कराने की बात भी कही गई है।

लोक निर्माण विभाग के इंजीनियर-इन-चीफ ने सभी मुख्य अभियंताओं, अधीक्षण अभियंताओं, कार्यपालन अभियंताओं और अन्य मैदानी अधिकारियों को बारिश से हुए नुकसान का आकलन करने के निर्देश दिए हैं।

अधिकारियों को क्षतिग्रस्त सड़कों और पुल-पुलियों की तस्वीरें और वीडियो तैयार कर नुकसान का विवरण दर्ज करने को कहा गया है। मरम्मत पर आने वाले खर्च का आकलन कर संबंधित कार्यालयों को जानकारी देने के निर्देश भी जारी किए गए हैं।

10 दिन में मरम्मत के प्रस्ताव, 15 दिन में स्वीकृति देने की तैयारी

लोक निर्माण विभाग ने निर्देश दिए हैं कि जिन सड़कों और पुल-पुलियों की मरम्मत मौजूदा अनुबंध के दायरे में संभव है, वहां संबंधित एजेंसी तत्काल काम पूरा करे।

जिन स्थानों पर विशेष मरम्मत या पुनर्निर्माण की जरूरत है, उनके प्रस्ताव सक्षम प्राधिकारी के समक्ष 10 दिनों के भीतर प्रस्तुत करने को कहा गया है। विशेष मरम्मत कार्यों के लिए पर्याप्त धनराशि उपलब्ध होने की जानकारी विभाग ने दी है।

विशेष मरम्मत (एफडीआर) के कार्यों को 15 दिनों के भीतर स्वीकृति देने की प्रक्रिया को प्राथमिकता पर पूरा करने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही, जरूरत के अनुसार जोनवार धनराशि की मांग का विवरण तैयार कर इंजीनियर-इन-चीफ कार्यालय को भेजने को कहा गया है।

विभाग ने स्पष्ट किया है कि बाढ़ से क्षतिग्रस्त सड़कों की मरम्मत स्थायी प्रकृति की होनी चाहिए। जहां जरूरी हो, वहां टो-वॉल और कंक्रीट सड़क बनाने के प्रस्ताव तैयार किए जाएं। पुलों के क्षतिग्रस्त हिस्सों, कंक्रीट सतह और रेलिंग की मरम्मत भी तत्काल कराने के निर्देश दिए गए हैं।

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